इन घरेलु उपायों से करें अपने शिशु की सर्दी जुकाम से सुरक्षा

by Dr. Himani Singh

छोटे बच्चे अपरिपक्व होने के कारण उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत नहीं होती है  जिसके कारण वह जल्दी ही कई बिमारियों की चपेट में आ जाते हैं, सर्दी जुकाम सबसे आम  समस्या है जिससे बच्चों को आये दिन गुजरना पड़ता है, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण कोई भी वायरस आसानी से बच्चे के ऊपर अटैक कर सकता है। बच्चों और शिशुओं को जुकाम सामान्यतः संक्रमण के कारण ही  होता है और लगभग 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को जुकाम के लिए बिना डॉक्टर के परामर्श के दवा देना उचित नहीं माना जाता है। ऐसे में यदि आपका  शिशु जुकाम से पीड़ित है तो उसके  सर्दी-जुकाम को ठीक करने के लिए घरेलू उपचारों  की मदद लेना आपके लिए बहुत ही लाभकारी साबित हो सकता है। परन्तु अपने शिशु के संक्रमण को खत्म करने के लिए  घरेलु उपचारों का चयन करने  से पहले आपको पता होता चाहिए कि कहीं  आपके शिशु को  किसी घरेलू सामग्री से कोई एलर्जी या संवेदनशीलता तो नहीं।  अकसर लोग इस बात का ध्यान रखना भूल जाते हैं , इस बात का ध्यान न रखने पर  समस्या  और अधिक बढ़  सकती है। यदि आपको अपने शिशु में  निम्नलिखित लक्षण जैसे हल्की नाक बहना,हल्की खांसी आना, गले में खराश, नाक के बंद  होने के कारण साँस न ले पाना,बैचैन रहना, खाना न खाना ,बिना आंसू बहाए रोना, होंठ फटना त्वचा पर धब्बे दिखना  और सुस्त दिखना  दिखाई दें तो ऐसे में  आप  बताये गए इन उपचारों का प्रयोग कर सकते हैं।

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आइये जानते हैं किन घरेलु उपायों और उपचारों  का प्रयोग करके आप अपने शिशु के सर्दी जुकाम को कम कर सकते हैं।

  • आराम (सभी उम्र):

अच्छे से आराम करने से संक्रमण से लड़ने के लिए ऊर्जा मिलती है। आराम करने से आपके बच्चे को अपनी ऊर्जा वापस पाने और ठीक होने में मदद मिलती है। तनाव कभी-कभी बीमारी में भी भूमिका निभाता है। यदि आपका बच्चा पूरे दिन बिस्तर पर आराम नहीं करना चाहता है, तो घर में ही अलग अलग जगह बदल कर उसको आराम करना लाभकारी सिद्ध हो सकता है। यदि मौसम अच्छा है, तो आप अपने बच्चे को आराम करने के लिए बालकनी, बरामदा या अपने बगीचे में एक आरामदायक जगह  पर बैठा  सकते हैं।  कोशिश करें उसे अकेला न छोड़े। यदि आपका बच्चा यदि आपका बच्चा फिर भी आराम करने को तैयार न हो तब ऐसे में उसको कुछ मनोरंजक कहानियों को सुनाएं या फिर  कुछ नर्सरी कविताएँ सिखाएँ सुनाँए , इससे उसको अच्छा लगेगा जिससे वह आराम भी कर पायेगा।

  • माँ का दूध:

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जुकाम या बुखार के कारण 3 माह से कम आयु के बच्चों को डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है।  ऐसे में शिशु का ध्यान भटकाने की कोशिश करें जिससे वह  थोड़ा बेहतर महसूस करें। जुकाम , खासी या बुखार होने के कारण  आपके शिशु को बहुत कम प्यास  लग सकती है जिससे वह  डिहाइड्रेशन से ग्रसित हो सकता है, ऐसे में माँ के दूध का सेवन बच्चे को डिहाइड्रेशन और उसके साथ बुखार और अन्य संक्रमण के विषाणुओं को नष्ट करने में मदद करता है। माँ के दूध में बहुत सी लाभकारी एंटीबॉडी उपस्थित होती है जो बच्चे  को स्वस्थ रखने में महतव्पूर्ण भूमिका निभाता है।  यह उपचार बच्चे को   सर्दी जुकाम से बचाने का  सर्वोत्तम प्राकृतिक उपचार है। 6 महीने से कम आयु के  बच्चो के लिए माँ का दूध सर्दी जुकाम को  दूर  करने  के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है।   इसे पिलाने के बाद बच्चे को किसी भी प्रकार की दवा खिलाने की आवश्यकता नहीं  होती है। जो माताएं शिशु को दूध पिलाती हैं उनको कैफीन के सेवन से बचना चाहिए  क्योंकि यह शिशु की नींद को प्रभावित कर सकता है।यदि आपका शिशु स्तनपान करता है तो शिशु को सामान्य से अधिक बार दूध पिलाने का प्रयास करें। क्योकि अक्सर बीमार होने के कारण शिशु स्तनपान  सही से एक बार में नहीं कर पाते हैं, इसलिए आप उसे थोड़ा-थोड़ा करके दिन में कई बार   दूध पिलाएं। ऐसा करने से आपका शिशु पर्याप्त तरल पदार्थ भी ले पायेगा।

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  • केला:

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अधिकांशतः देखा गया है कि कई माताएं बच्चे को जुकाम- खांसी  होने पर केला खिलाना बंद कर  देती है, क्योकि उनको लगता है कि केला खिलाने  से उनके बच्ची का जुकाम और अधिक बढ़  जायेगा, परन्तु ऐसा बिलकुल भी नहीं है, आपको बता दें कि केले में भरपूर मात्रा में पोटेशियम होता है जो की हमारे  शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है। एक केले में लगभग  100 कैलोरी होती है जिससे हमारे  शरीर को ऊर्जा  मिलती  है साथ ही केले में उपस्थित  इलेक्ट्रोलाइट्स और मिनरल्स बॉडी में इम्युनिटी को बढ़ाने में भी बहुत लाभकारी होते हैं।  अतः  जब आपके शिशु को  जुकाम-खांसी हो तो उसे  केले का सेवन जरूर  कराएं , कोशिश करें  केला को अच्छे से मैश  करके उसमें थोड़ा शहद मिला कर दिन में 2 -3  बार शिशु को खिलाएं।

  • शहद:

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शहद को इसके विभिन्न रोगाणुरोधी और एंटी इंफ्लामेन्ट्री गुणों के कारण खांसी से राहत देने में मददगार माना जाता है। यह भी सुझाव दिया जाता  है कि इसकी चिपचिपी प्रकृति के कारण यह गले के सूखेपन को ख़त्म करके गले में होने वाले दर्द से रहत दिलाती है।  एक साल या उससे छोटी उम्र  के बच्चो के लिए सर्दी जुकाम से बचने के लिए शहद का सेवन बहुत ही लाभकारी और सुरक्षित माना जाता है।  एक चम्मच नींबू के रस में 2 चम्मच कच्चा शहद मिला कर शिशु को दिन में 2 -3 बार खिलाने से शिशु के सर्दी जुकाम में जल्दी ही लाभ मिलता है।  गर्म-दूध में , शहद मिलाकर पीने से सूखी खांसी और सीने के दर्द में जल्दी राहत मिलती है।

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  • स्पंजस्नान:

जब आपका शिशु सर्दी जुकाम से पीड़ित हो तो ऐसे में अपने शिशु को प्रोपर नहलाने की जगह स्पंज स्नान कराएं। इसके लिए गुनगुना पानी लें और उसमें टावल भिगोकर बच्चे के शरीर को  अच्छी तरह से साफ़ करें। स्पंज स्नान  करवाने से पहले  पानी को चेक कर  ले. , पानी का तापमान कमरे के तापमान के बराबर होना चाहिए।

  • लहसुन और अजवाइन पोटली:

लहसुन और अजवाइन, खांसी व जुकाम के लिए बहुत ही शक्तिशाली और लाभकारी इलाज माना जाता हैं क्योंकि यह  एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण से युक्त  होता है। यह मिश्रण बच्चों के  जुकाम  को सही करने के लिए बेहतरीन उपचार के रूप में माना जाता है। उपचार करने के लिए  2 लहसुन की कली और 1 चम्मच अजवाइन लेकर उन्हें सूखा भून लें और ठंडा होने के बाद,  इस भुने हुए लहसुन व अजवाइन को एक मलमल के कपड़े में कसकर बांध लें।  अब इस पोटली  से  शिशु के सीने  की सिकाई करें या आप इस  पोटली को  शिशु के पैरों के तलवों में  भी रगड़ सकती हैं।यदि शिशु 3 -4  महीने से छोटा है तो इस पोटली को शिशु के तकिये के पास थोड़ी दूरी पर रखें जिससे  अजवाइन और लहसुन की सुगंध शिशु  की नाक तक जाती रहे , ऐसा करने से  शिशु को आराम मिलेगा, परन्तु  ध्यान रखें इस पोटली को शिशु के बहुत पास न रखें क्योंकि इसकी तीव्र महक से बच्चे का गला चोक हो सकता है।

  • लहसुन, सरसों का तेल और अजवाइन का मिश्रण :

सरसों का तेल, लहसुन और अजवाइन एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण के लिए जाने जाते हैं।  यदि थोड़े से सरसो के तेल में थोड़ा अजवाइन और एक दो लहसुन की कलियों को पीसकर हल्का गुनगना करके बच्चे के सीने में व पैरों के तलवे में मालिश  की जाए तो आपके शिशु को जल्दी ही सर्दी और जुकाम से आराम मिलेगा। इस बात का खयाल रखें कि  इस तेल का मिश्रण शिशु के मुँह में न जाए  क्योंकि इससे आपके शिशु  को पेट की बीमारियां हो सकती हैं।

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  • गाजर का रस:

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गाजर में बहुत सारे आवश्यक पोषक तत्व और विटामिन उपस्थित होते हैं जो इम्यून सिस्टम की क्षमता को बढ़ाने में  लाभदायक होते हैं। यह बच्चों में जुकाम के लिए सर्वोत्तम घरेलू उपचारों में से एक माना जाता है। गाजर कई रंग की होती है। सभी प्रकार की गाजरों के गुण समान होते हैं। काली गाजर में आयरन अधिक होने  के कारण  यह अधिक लाभकारी होती है। पतली और छोटी गाजर स्वादिष्ट, पौष्टिक और गुणों से अधिक भरपूर होती है। गाजर  का  ताजा जूस निकाल कर उसमें थोड़ा सा काला नमक मिलाकर अपने शिशु को पिलाने से सर्दी के मौसम में  आपके शिशु का शरीर गर्म रहता है और उसकी सर्दी- जुकाम  से बचाव होता है। गाजर के रस में शहद मिलाकर भी आप अपने शिशु को पीला सकती हैं इससे आपके शिशु के शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली  और भी अधिक मजबूत  होगी  साथ ही साथ  ठंड से उत्पन्न कफ भी दूर होता है। छह  माह से अधिक आयु के बच्चों को ही यह जूस पिलाएं। यह अवश्य सुनिश्चित करें कि कहीं आपके  बच्चे को किसी भी प्रकार की एलर्जी  तो नहीं।

  • सरसों का तेल और सेंधा नमक:

थोड़े से सरसो के तेल को गरम करके उसमें थोड़ा सा सेंधा नमक  मिलाके,  इस मिश्रण से शिशु की छाती और पीठ पे मालिश करने से आपके शिशु को जुकाम खासी से बहुत आराम मिलता है। मालिश करते  समय इस बात का ध्यान रखें की शिशु को कम्बल या रजाई से  जरूर ढके  ताकि उसे ठण्ड न लगे। सेंधा नमक और सरसों के तेल का यह मिश्रण शिशु के शरीर को वो गर्माहट प्रदान करता है जो  उसे  खांसी और कफ की परेशानी से राहत दिलाता है। इसके अतिरिक्त रात को सोते समय  पैरों के तलवों पर सरसों के तेल की मालिश नियमित रूप से करने से आपके शिशु की आँखे भी  स्वस्थ  होंगी  और आँख की रौशनी भी बढ़ेगी |

  • विक्स बेबी रब :

अधिकाशतः लोग सर्दी – जुकाम होने पर विक्स वेपोरब का प्रयोग करते हैं, विशेषकर रूप से जब नाक बंद हो परन्तु यदि आपका शिशु भी सर्दी जुकाम से पीड़ित हो तब भी ऐसे में विक्स बहुत ही कारगर  होता है यह आपके  शिशु की खांसी, बंद नाक और कफ जैसी समस्याओं को दूर करने का सबसे आसान तरीका  साबित  होता है। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बड़ों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली विक्स वेपोरब को बच्चों के लिए  बिलकुल भी इस्तेमाल  न करें क्योकि बड़ों के लिए तैयार  विक्स वेपोरब की महक  शिशु के लिए बहुत ही  तीक्षण  होती है साथ ही बड़ों के लिए तैयार  विक्स वेपोरब से शिशु की नाजुक और संवेदनशील त्वचा को नुकसान  पहुँच सकता है। अतः शिशु के प्रयोग के लिए विक्स बेबी रब  का ही प्रयोग करें।  विक्स बेबी रब  को दिन में दो -तीन बार शिशु के सीने और गले पर लगाकर हलके हाथ से मल दें और हो सके तो साथ में थोड़ी भांप  भी दें, इससे बहुत जल्दी प्रभाव पड़ेगा।विक्स बेबी रब का प्रयोग आप रात में भी कर सकते हैं क्योकि यह आपके  शिशु को रात भर आरामदायक नींद प्रदान करेगा। अगर आप का शिशु चार महीने  से बड़ा है तभी आप विक्स बेबी रब  का प्रयोग करें इससे छोटे शिशुओं के लिए विक्स का प्रयोग नुकसानदायक हो सकता है। शिशु के पैर के तलुए पे विक्स बेबी रब को लगा कर ऊपर से मोज़े पहना दीजिये। विक्स बेबी रब  शिशु के श्वसन तंत्र के  वायु मार्ग को खोलने में मदद करता है जिससे सीने में जमे कफ (बलगम) को बहार निकालने  में सहायता करता है। इससे श्वसन तंत्र का वायु मार्ग खुल जाता है और शिशु ठीक से साँस ले पाता है।

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  • शिशु को स्टीम दें:

नाक और छाती में जमा कफ  बहार नहीं आ पाता है जिसकी वजह से शिशु को बहुत तकलीफों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में गरम पानी का भाप एक बेहतरीन उपाय साबित होता है। शिशु को स्टीम देने से उसके सीने का बलगम खत्म हो जाएगा और उसकी बंद नाक में आराम मिलता है। जब शिशु गरम पानी का भाप लेता है तो नाक और छाती में जमा कफ ढीला हो जाता है जिससे वह आसानी से शरीर से  बहार निकल सकता है। इस उपाए को अपनाने से आपके  शिशु की बंद नाक और छाती की जकड़ना समाप्त होती है। और उसे आराम मिलता है। अपने शिशु को स्टीम देने से पहले और बाद में उसे अच्छी तरह से हाइड्रेटेड करें क्योंकि भाप लेते समय उसके शरीर में पानी की कमी हो सकती है। अपने शिशु को स्टीम देने के लिए अपने  बाथरूम में गर्म पानी का शावर थोड़ी देर चलाकर  छोड़ दें जिससे बाथरूम में  भाप इकट्ठा  हो जायेगा। फिर शावर बंद करके लगभग 15 मिनट के लिए आप शिशु को लेकर बाथरूम में बैठ जाएं और उसे हल्की-हल्की स्टीम लगने दें। यदि आपके बाथरूम में गर्म पानी का शावर नहीं है तो ऐसे में आप शिशु को गरम पानी का भाप देने के लिए शिशु को अपने पैरों पे लेकर बैठ जाएँ और एक  बड़े  गरम पानी के बर्तन को अपने पैरों के पास रखें। और उस भाप को शिशु को लगने दें  इस तरह से शिशु को भरपूर मात्रा में गरम पानी का भाप मिल सकेगा। इस प्रक्रिया को 10-15 मिनट तक करें। अपने शिशु को गरम पानी के बहुत करीब मत ले जाइये। इससे शिशु को खतरा हो सकता है। आप गरम पानी के बर्तन को अपने समीप रख के शिशु के मुख को गरम पानी की दिशा में करने से शिशु को भरपूर भाप मिल  पायेगा।

  • केसर :

केसर शरीर में उत्तेजना पैदा करता है। यह शारीरिक उत्तेजना शिशु के सर्दी, जुकाम और बंद नाक की समस्या को सही करने में लाभकारी होती है। सर्दी और जुकाम की दवा के रूप में व्यस्क लोग केसर का सेवन दूध  के  साथ करते हैं परन्तु छह – सात  महीने के बच्चों को इस तरह से दूध में केसर का सेवन कराना थोड़ा मुश्किल होता है, इसीलिए आप केसर  का पेस्ट बना के शिशु के माथे और छाती पे लगा सकती हैं। ऐसे में आप केसर के पेस्ट को  शिशु के गले और पैर  के तलुए पर   लगा कर  मालिश कर सकती हैं। यह उपाय  आप तब तक करें जब तक आपके  शिशु की सर्दी जुकाम और बंद नाक की समस्या पूरी तरह से सही  न हो जाये।

  • गुड़ अजवाइन का पानी:

अजवाइन के छोटे-छोटे बीजों में बहुत से  गुणकारी तत्‍व मौजूद होते हैं, इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्‍सीडेंट और जलनरोधी तत्‍व  उपस्थित होते हैं, जो न सिर्फ छाती में जमे कफ से निजात  दिलाते हैं बल्‍कि सर्दी और जुकाम से भी छुटकारा दिलाते हैं। अजवाइन को सर्दी-जुकाम, बहती नाक और ठंड से निजात  दिलाने के लिए अचूक दवा माना जाता है। इसके साथ ही गुड़  का सेवन और सोने पर सुहागा का काम करता है क्योकि गुड़ की तासीर गर्म होती है साथ ही इसमें अनेकों प्रकार के एंटीएलर्जिक तत्व भी मौजूद होते हैं जो सर्दी जुक्काम के लिए रामबाण का काम करता है।  एक कप पानी में एक चुटकी अजवाइन और करीब एक छोटा चम्मच गुड़ लगभग 5  से 7 मिनट तक उबालें फिर इसे छान लें। अब इस मिश्रण की 1 चम्मच मात्रा बच्चे को दिन में 3  से 4  बार पिलाएं। सर्दी जुकाम में – बंद नाक या सर्दी जुकाम होने पर आप अजवाइन को दरदरा कूट कर महीन कपड़े में बांधकर अपने शिशु को सुंघा भी सकती हैं।

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  • नारियल तेल :

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नारियल तेल बंद नाक को खोलने का एक बेहतरीन उपाय माना जाता  है। जब भी कभी आके शिशु की  नाक बंद हो जाए, तो आप  थोड़ा सा नारियल तेल अंगुली से लेकर उसके  नाक के अंदर तक और थोड़ा तेल शिशु की नाभि पर लगाएं।इस प्रकिया को दिन में 2-3 बार दोहराएं कुछ ही दिनों में शिशु की  नाक खुल जाएगी। ध्यान रखें नारियल का तेल पिघला हुआ होना चाहिए।

  • हैंड सेनिटाइजर का इस्तेमाल करे:

सर्दी, जुकाम और बंद नाक के संक्रमण में गंदे हाथों की भूमिका बहुत  महतव्पूर्ण होती  है, ओर  बहुत से लोग ध्यान नहीं देते हैं। जब आप का शिशु सर्दी, जुकाम और बंद नाक से परेशान हो तो उस वक्त आप के गंदे हाथों द्वारा आसानी से आप के शिशु में जीवाणु पहुँच सकते हैं। अतः ऐसे में कोशिश करें आप अपने हाथों को साफ  करने के बाद ही अपने शिशु को छुएं इसके साथ ही कोशिश करें कि अपने शिशु के हाथों को भी  साफ़ रखें, क्योकि बची अपने हाथों से संक्रमित और गन्दी वस्तुओं को छूते रहते हैं और यही हाथ उनके मुँह में जाते हैं। शिशु के हाथों  को साफ करने से लिए आप  बेबी वाइव्स का भी प्रयोग कर सकती हैं।  घर में हैंड सेनिटाइजर रखें  ताकि परिवार में जो भी बच्चे उठाये, पहले हैंड सेनिटाइजर का इस्तेमाल करे।

  • बच्चे का सिर ऊंचा रखें:

बच्चे को बीच  बीच में अच्छी  नींद उसके शरीर को  स्वस्थ्य  रखने के लिए बहुत जरुरी होती है इसलिए उसे गहरी नींद में सोने का समय दें। बच्चे के सोते समय उसके सिर को थोड़ा ऊंचा रखें, ऐसा करने से उसे सांस लेने में आसानी होगी। इसके लिए  एक तौलिए को मोड़ कर या एक नर्म तकिए को अपने बच्चे के सिर के नीचे रख सकते हैं। याद रखें  तकिए की ऊंचाई बहुत अधिक न हो क्योकि अधिक ऊचें तकिये के प्रयोग से आपके बच्चे की गर्दन में परेशानी हो सकती है।

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