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हृदय रोग के लक्षण और उपचार

by Darshana Bhawsar
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आज के समय में व्यक्ति कई रोगों से घिरा हुआ है उसी में से एक है हृदय रोग। हृदय रोग के कई मामले हम रोजाना देखते हैं यह बहुत ही आम बीमारी हो गई है लेकिन यह एक जानलेवा बीमारी भी है। रोग चाहे जो भी हो उससे शरीर को काफी तकलीफ होती है। इसलिए इन बिमारियों को होने से पहले रोकना ही सबसे उम्दा उपचार है। हृदय रोग से मतलब है दिल की बीमारी। हृदय की बीमारी आपके हृदय में हो रही किसी भी समस्या के कारण होना संभव है। आज के समय में हृदय रोग होना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है क्योंकि लोगों की दिनचर्या ही ऐसी हो गई है कि लोग कई बिमारियों से घिरते जा रहे हैं। हृदय की बीमारी के भी कई प्रकार होते हैं। हम आज हृदय रोग, उनसे जुड़े हुए लक्षण, हृदय रोग के कारण सभी कुछ जानेंगे। लेकिन उसके पहले हम जानेंगे ऐसा क्यों है। क्यों व्यक्ति इस तरह से बिमारियों से घिरता जा रहा है। इसके कई कारण हो सकते हैं। जिनमें से कुछ कारण हम जानेंगे जो अधिकतर देखे जाते हैं।

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  • असंतुलित भोजन:
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शरीर के लिए बहुत सी चीज़ें जरुरी होती हैं जैसे समय पर खाना समय पर सोना, ऑक्सीजन और पानी। और भी कई चीज़ें हैं जो शरीर के लिए जरुरी हैं। लेकिन ये जीवन के लिए बहुत आवश्यक हैं इनके बिना जीवित रहना नामुमकिन है। इस्सलिये संतुलित भोजन लेना भी बहुत जरुरी है। अगर संतुलित भोजन लिया जाये तो कई हद तक बिमारियों को रोका जाना संभव है। खाने में जितना हो सकता है हरी सब्जियाँ खाएँ, जूस पियें, सूप पियें, अंकुरित अनाज खाएँ। और जितना हो सके फ़ास्ट फ़ूड, जंक फ़ूड से दूर रहें, जितना आप इनसे दूर रहेंगे उतना आपको फायदा होगा। संतुलित भोजन शरीर के लिए बहुत जरुरी है।

  • नियमित व्यायाम न करना:

व्यायाम शरीर के लिए बहुत जरुरी होता है। व्यायाम न करना और दिनभर बैठे रहना शरीर के लिए बहुत हानिकारक होता है। इसलिए नियमित व्यायाम करना चाहिए। नियमित व्यायाम करने से कई रोग नियंत्रित किये जा सकते हैं और नष्ट भी किये जा सकते हैं। व्यायाम में आप कुछ भी कर सकते हैं योग, पावर योग, पैदल चलना इत्यादि। व्यायाम शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इसलिए अपनी दिनचर्या में व्यायाम को जरूर शामिल करें।

अधिकतर हृदय रोग या किसी भी रोग को होने का कारण होता है अनियमित दिनचर्या और असंतुलित भोजन। कई बार लोग सोचते हैं कि खाना शारीरिक ऊर्जा और पौष्टिकता के लिए मायने नहीं रखता लेकिन यह सोचना बिल्कुल ही गलत है। संतुलित आहार शरीर को कई रोगों से बचाता है। खाने में कभी भी बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन नहीं खाना चाहिए और जंक फ़ूड से तो दूर रहना चाहिए जंक फूड कई दुष्परिणाम है।

  • हृदय रोग से तात्पर्य:

जब हृदय की धमनियों तक ठीक प्रकार से रक्त नहीं पहुँच पाता तो हृदय ठीक से धड़कना बंद कर देता है एवं सांस लेने में तकलीफ होती है। ऐसे में हृदय से जुडी कई समस्याएँ होने लगती है जैसे है ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, हार्ट ब्लॉकेज इत्यादि। हृदय रोग से अधिकतर जानलेवा होते हैं। इनसे बचना बहुत मुश्किल हो जाता है, लेकिन अगर आप नियमित व्यायाम करें और पौष्टिक भोजन लें तो इनसे बचा जा सकता है। हृदय रोग कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे:

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  • हृदयाघात
  • रुमेटिक हृदय रोग
  • जन्मजात खराबियां
  • हृदय की विफलता
  • पेरिकार्डियल बहाव
  • हृदयाघात:

हृदयाघात का मतलब होता है हार्ट अटैक। जिसे कई बार दिल का दौरा भी कहा जाता है। जब कभी हृदय के रक्त संचार में बाधा आती है तो दिल का दौरा पड़ने जैसे मामले सामने आते हैं। इस दौरान दिल की कोशिकाएं नष्ट जाती हैं। हार्ट अटैक कई कारणों से हो सकता है जैसे बहुत ज्यादा ऑइली भोजन करना, अत्यधिक शराब पीना या फिर किसी बात का सदमा लग जाना। हार्ट अटैक के ये सभी कारण हो सकते हैं। इन स्थितियों में व्यक्ति के हृदय तक पर्याप्त मात्रा में रक्त संचार नहीं हो पता और हार्ट अटैक जैसी स्थिति सामने आती है।

  • रुमेटिक हृदय रोग:

रुमेटिक हृदय रोग को रुमैटिक फीवर कहते हैं। जब हृदय का बाल्व किसी बीमारी की वजह से क्षतिग्रस्त हो जाता है तब स्ट्रेप्टोकोकल बैक्टीरिया की वजह से गले में संक्रमण शुरू हो जाता है जिसका इलाज संभव नहीं है। और यही संक्रमण रुमैटिक फीवर में तब्दील हो जाता है। जब यह बुखार नियमित आता रहता है और इससे हृदय रोग भी विकसित होने लगता है। रुमैटिक फीवर के कारण शरीर के कई भागों में सूजन आ जाती है जैसे त्वचा, जोड़, हृदय, मस्तिष्क इत्यादि। जब यह बुखार स्थायी रूप से शरीर और ह्रदय क्षतिग्रस्त करने लगता है तब हृदय रोग होने लगते हैं। यह अधिकतर पाँच से पंद्रह वर्ष के बच्चों में देखा जाता है।

  • जन्मजात खराबियाँ:

कई बार बचपन से ही बच्चों में हृदय रोग होते हैं जैसे दिल में छेद होना, या अन्य कोई बीमारी। लेकिन कई बार तो यह बचपन में ही पता चल जाता है और कई बार इसके बारे में कई सालों बाद पता चलता है। इसका इलाज अब संभव है लेकिन अगर स्थिति ज्यादा जटिल हो तो मरीज को ज्यादा समय तक जीवित रखना मुश्किल होता है। दिल के कमजोर होने की वजह से व्यक्ति का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है जैसे उसे कोई तनाव न हो, वह ज्यादा उछल कूद वाला कार्य न करे इत्यादि।

  • हृदय की विफलता:
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हृदय की विफलता का मतलब हार्ट फ़ैल भी ले सकते हैं। अगर हृदय उतना पंप नहीं कर रहा जितने की जरुरत है तो उस स्थिति में हृदय की विफलता हो सकती है। इस दौरान व्यक्ति की जान भी जा सकती हैं। जब किसी को हार्ट अटैक आ चूका होता है उसके बाद हृदय की विफलता के कई मामले सामने आते हैं। इसे कन्जेस्टिव हार्ट फेल्यर भी कहा जाता है। हृदय के अच्छे तरह से पंप न करने के कारण जब शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ती है तब यह कन्जेस्टिव हार्ट फेल्यर की स्थिति पैदा होती है।

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  • पेरिकार्डियल बहाव:

पेरिकार्डियल स्थान में जब द्रव्य की असामान्य मात्रा उपस्थित होती है उसे पेरिकार्डियल बहाव कहा जाता है। ऐसा स्थानीय या प्रणालीगत विकारों की वजह से हो सकता है। यह बहाव तेज़ या फिर दीर्घकालिक हो सकता है। यह बहुत ही खतरनाक स्थिति होती है क्योंकि व्यक्ति इस स्थिति में गंभीर रूप से बीमार हो जाता है।

  • हृदय रोग के लक्षण:

हृदय रोग के कई लक्षण होते हैं। अगर आपको स्वयं में ऐसे लक्षण दिखाई पड़ते हैं तो इसके प्रति सचेत रहे और किसी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करें और जाँच करवाएं।

  • बेचैनी महसूस होना:

हृदय रोग का यह सबसे आम लक्षण है। जब आर्टरी ब्लॉक होती है उस समय छाती पर दबाव महसूस होता है और साथ ही साथ छाती में तेज दर्द होता है। और इसके ही साथ खिचाव भी मासूस होता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हार्ट अटैक की सम्भावना भी होती है। यह लक्षण अक्सर हार्ट अटैक के समय दिखाई देता है मतलब हार्ट अटैक के कुछ देर पहले यह लक्षण रोगी को महसूस होने लगते हैं।

  • हार्टबर्न, मतली और पेट में दर्द होना:

हृदय रोग होने पर व्यक्ति को हार्टबर्न, मतली और पेट में दर्द होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इस दौरान पाचन सम्बन्धी दिक्कतें भी होती हैं। यह भी हृदय सम्बन्धी रोग का सबसे आम लक्षण हैं। इस लक्षण के दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करके उन्हें इसके बारे में बताना चाहिए। ऐसे मामलों में देरी करना मतलब अपने जीवन से हाथ धो बैठना भी होता है।

  • हाथ में दर्द होना:
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जब व्यक्ति हृदय रोग से ग्रसित होता है तो व्यक्ति के बाएं हाथ और कंधे में दर्द होता है और धीरे-धीरे यह दर्द हाथ की हथेली तक आने लगता है। यह दर्द कई बार इतना जोर का होता है कि व्यक्ति इसे सहन नहीं कर पाता। यह बहुत ही गंभीर स्थिति होती है। यह भी हृदय रोग का आम संकेत होता है।

  • सांस लेने में दिक्कत होना:

सांस लेने में दिक्कत होना हार्ट अटैक और हार्ट फ़ैल का बहुत बड़ा लक्षण होता है। अगर किसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी हो रही है और यह परेशानी बढ़ती जा रही है इसका मतलब है कि व्यक्ति को हार्ट अटैक आ सकता है या उसे हार्ट फ़ैल की समस्या हो सकती है। इसका इलाज जल्दी से जल्दी करवाना चाहिए।

  • पसीना आना:
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वैसे पसीना आना सेहत के लिए उम्दा माना जाता है लेकिन जब असामान्य तरह से पसीना आता है वह सेहत के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं होता। असामान्य रुप से पसीना आना हृदय रोग होने का एक लक्षण हो सकता है। इसलिए अगर आपको भी असामन्य पसीना आता है तो डॉक्टर से इसके बारे में सलाह जरूर लें।

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  • पैरों में सूजन:

वैसे तो कई कारणों की वजह से पैरों में सूजन आ सकती है लेकिन अगर टखनों में, तलवों में, पैरों में एवं ऐंकल्स में सूजन आ रही है इसका मतलब है कि आप हृदय रोग से ग्रसित हैं। यह भी हृदय रोग का आम लक्षण होता है। इन लक्ष्यों के दिखते ही डॉक्टर से सलाह जरूर लेना चाहिए।

ये कुछ आम लक्षण है। इनके अलावा भी कुछ और हृदय रोग में दिखने वाले लक्षण हैं जैसे सिर में जोर का दर्द रहना, तनाव रहना, चक्कर आना, हाथ-कमर और जॉ में बहुत अधिक दर्द होना इत्यादि।

  • हृदय रोग के कारण:

हृदय रोग के कई कारण हो सकते हैं। हृदय रोग व्यक्ति की लापरवाही की वजह से ही होते हैं जैसे: अत्यधिक ध्रूमपान, बहुत अधिक शराब पीना, नियमित तनाव, बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल बढ़ना, आनुवांशिकता, बहुत अधिक मोटा होना एवं उच्च रक्तचाप। ये सभी हृदय रोग के कारण हैं। हृदय रोग एक ऐसी बीमारी हैं जिसमें व्यक्ति को बचाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। अगर इन सभी चीज़ों पर नियंत्रण कर लिया जाये तो हृदय रोग नहीं होंगे या होंगे भी तो उन पर योग या व्यायाम के द्वारा काबू पाया जा सकता है।

  • हृदय रोगों के लिए उपचार:

हृदय रोगों को दूर करने के लिए कई उपचार हैं। कुछ उपचार तो घरेलु हैं लेकिन जब स्थिति अनियंत्रित हो जाती है तो घरेलु उपचार कार्य नहीं करते और किसी विशेष चिकित्सक की मदद लेनी होती है। लेकिन इन उपचार के द्वारा पहले से ही रोगों को नियंत्रित किया जाना संभव है ताकि वे अनियंत्रण की स्थिति में न आएं।

  • लहसुन:

प्रतिदिन लहसुन का सेवन करना चाहिए। लहसून रक्त को पतला करता है और रक्त संचार को मजबूत करता है। प्रतिदिन कच्चा लहसुन खाने से या थोड़ा सा भून कर लहसुन खाने से हृदय रोगों से मुक्ति मिलती है। यह बहुत सरल एवं आसान घरेलु उपाय है। अगर आप प्रतिदिन लहसुन खाने की आदत डाल लेते हैं तो कई और भी बीमारियाँ दूर हो जाएँगी।

  • चना:

चना खाना सेहत के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं। काले चने भिगाकर खाने चाहिए या फिर इन्हें अंकुरित करके भी खा सकते हैं। काले चने खाने से शरीर में ऊर्जा आती है और रक्त संचार ठीक होता है। इसलिए चने नियम से खाने चाहिए। इससे चर्म रोग भी दूर हो जाते हैं। काले चने बहुत ही फायदेमंद होते हैं।

  • गाय का दूध और सोंठ:

गाय का दूध बहुत ही शुद्ध होता है इसलिए गाय का दूध और सोंठ मिलकर रोज रात को पीना चाहिए। इससे बहुत फायदा होता है। हृदय रोगों के लिए यह बहुत ही अच्छा उपचार है। इसलिए इसका सेवन रोज करना चाहिए। गाय का दूध और सोंठ कई और रोगों का भी उपचार होता है। आयुर्वेद में इसे बहुत महत्व दिया गया है।

  • गाजर और दूब:

गाजर का रस और दूब को कुचलकर एक साथ मिला लें और खाने के बाद इसका सेवन करें। इससे बहुत ही जल्दी हृदय रोगों में फायदा होता है। इससे मोटापा भी बहुत जल्दी कम होता है एवं इससे शरीर में ऊर्जा आती है साथ ही त्वचा में भी चमक आती है। गाजर का जूस और दूब बहुत ही फायदेमंद उपचार है एवं इसके नियमित सेवन से कई लाभ होते हैं।

ये सभी उपचार हृदय रोगों से नुकसान पहुँचाने वाले संक्रमण से बचाते हैं। इसलिए आप इन उपचार को अपना सकते हैं। साथ ही आप योग का सहारा भी ले सकते हैं। यह एक बहुत ही उम्दा उपचार है। इससे शारीरिक और मानसिक रूप से आपको सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी।

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