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बुखार और खाँसी के लिए घरेलू उपचार

by Darshana Bhawsar
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कई बार ऐसा होता है कि बुखार आता है और उसे हम सामान्य बुखार समझ लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं वह बुखार सामन्य है या फ्लू है या फिर कुछ और। शायद नहीं लेकिन आप फिर भी अपने अनुसार कोई भी बुखार कम करने की दवा ले लेते हैं। जिससे उस समय के लिए तो हमें आराम मिल जाता है लेकिन वह बुखार फिर से लौट कर आ जाता है और भयानक रूप से वापस आता है। इसलिए यह जानना बहुत ही जरुरी है कि बुखार किस प्रकार का है। वैसे तो सामान्य बुखार से निजात पाने के कई घरेलु उपचार हैं लेकिन अगर फ्लू, मलेरिया या फिर कुछ अन्य प्रकार का बुखार है तो इसके लिए खून की जाँच बहुत ही जरुरी साथ ही सही इलाज भी जरुरी है।

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पहली बात तो आपको पता होना चाहिए कि आपको बुखार किस प्रकार है उसके बाद उसका उपचार शरू करना चाहिए और इसके लक्षण दिखते ही इसके प्रति सचेत हो जाना चाहिए। बुखार के कुछ विशेष लक्षण होते हैं उन्हें ध्यान में रखें:

  • ठण्ड लगना और अचानक ही शरीर का तापमान बढ़ जाना।
  • सर्दी, जुकाम के साथ शरीर का तापमान बढ़ जाना।
  • थोड़ा सा काम करने पर अत्यधिक थकान होना।
  • सिर में दर्द होना और घबराहट होना।
  • जीभ का स्वाद बदलना और उलटी का मन होना।

बुखार आने के समय ऐसे कई लक्षण आपको दिखाई देने लगते हैं। और इनके बाद 90% आपको बुखार आ ही जाता है। इसलिए इसके प्रति सचेत रहना चाहिए कि यह सामान्य लक्षण हैं या इनके पीछे कोई अन्य कारण है। इसके लिए आप एक बार खून की जाँच जरूर करवाएँ, जिससे आपको पता चल जाये कि बुखार किस प्रकार का है। कई बार बुखार के साथ ही आपको खाँसी की समस्या भी होती है। इसलिए इसकी जाँच जरुरी है। वैसे तो इनका घरेलु इलाज संभव है। इसलिए अगर आप बुखार और खाँसी से पीड़ित हैं तो आप ये घरेलु उपचार कर सकते हैं।

  • तुलसी का काढ़ा:

तुलसी के पत्ते हर बीमारी को दूर करने में सक्षम होते हैं। आयुर्वेद में तुलसी के पत्तों को विशेष स्थान प्राप्त है। इसलिए सर्दी, जुकाम, खाँसी और बुखार में तुलसी का काढ़ा बनाकर पीने से इनसे बहुत ही जल्दी निजात मिलता है। अगर तुलसी के पत्ते इन बीमारी में फायदा नहीं पहुँचायेंगे तो इसके कोई दुष्परिणाम भी नहीं है। वैसे भी तुलसी का काढ़ा सेहत के लिए अच्छा माना जाता है।

  • मुनक्का:

मुनक्का में काला नमक मिलाकर खाने से हड्डियों का बुखार और सामान्य बुखार गायब हो जाता है। वैसे तो मुनक्का हर प्रकार के बुखार के लिए उपयोगी है लेकिन अगर इससे बुखार नहीं जा रहा तो आपको किसी अच्छे चिकित्सक के पास जाना चाहिए और बुखार का कारण पता करना चाहिए। मुनक्का खाने से भूख भी अच्छी लगती है और पाचन तंत्र भी सुधरता है।

  • हल्दी सेककर खाएँ:

अगर बुखार के साथ खाँसी भी है तो इसमें आप दूध में तुलसी और हल्दी डालकर पियें या फिर हल्दी सेककर खाएँ और ऊपर से गुनगुना पानी पी लें इससे आपको बहुत राहत मिलेगी। खाँसी में तो हल्दी बहुत ही फायदेमंद साबित होती है। साथ ही इससे बुखार में भी राहत मिलती है। यह बहुत ही आसान सा उपचार है।

  • पोदीना की चाय:

पोदीना की चाय पीने से खाँसी, सर्दी, जुकाम और बुखार से राहत मिलती है। इससे शरीर का तापमान भी सामान्य हो जाता है। इसलिए यह बहुत ही फायदेमंद घरेलु उपचार है। इससे भी पाचन तंत्र सुधरता है। आप सामान्य तौर पर भी पोदीना की चाय पी सकते हैं इसके किसी भी प्रकार के नुकसान नहीं हैं।

  • चिरायता:

चिरायता कई जड़ी बूटियों को मिलाकर बनता है। और आप अगर बुखार और खाँसी, जुकाम में इसका काढ़ा बनाकर पियें तो बुखार से निजात मिलता है और बुखार लौट कर वापस नहीं आता। चिरायता आयुर्वेद में बुखार, सर्दी और खाँसी का सबसे पुराना और लाभदायक उपचार है।  इससे आप कई और भी बिमारियों से बचाव कर सकते हैं।

  • ज्वरनाशक क्वाथ:

ज्वरनाशक क्वाथ बाबा रामदेव की बहुत ही उम्दा दवा है इसके सेवन से सर्दी, खाँसी, जुकाम और बुखार बहुत ही जल्दी नष्ट हो जाते हैं और इससे शरीर में ताकत भी आती है। इसका सेवन आप रोज कर सकते हैं। इसके अनगिनत फायदे हैं। यह आसानी से उपलब्ध होने वाली दवा है जो घरेलू उपचार में ही शामिल है।

  • तुलसी का रस:

तुलसी के 10 से 15 पत्ते लीजिये और उनका रस निकाल लीजिये। उस रस को पीने से किसी भी प्रकार की खाँसी, जुकाम और बुखार में राहत मिलती है। यह एक बहुत ही उम्दा और आसान घरेलु उपचार है। इसका असर भी बहुत  ही जल्दी दिखाई देने लगता है। आप अगर रोजाना भी इसका सेवन करते हैं तो उसके अनगिनत फायदे हैं जैसे चर्म रोगों से मुक्ति, गले की परेशानियों से निजात इत्यादि।

  • बुखार आने के कारण:

बुखार आने के कई कारण हो सकते हैं जैसे मौसम के परिवर्तन के कारण, जब शरीर जरुरत से ज्यादा मेहनत करे या फिर वायरल के कारण, मछ्हर के काटने से, गंदगी के कारण इत्यादि। तो बुखार आने की कई वजह हो सकती हैं। और इसकी जानकारी आपको होना चाहिए कि आपको बुखार क्यों आ रहा है तब ही आप इसका इलाज करवा सकते या घर पर इसका इलाज कर सकते हैं। और ध्यान रखें कि कोई भी दवा न लें जिससे कि बाद में आपको नुकसान उठाना पड़े।

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कभी-कभी खाँसी, जुकाम और बुखार का कारण असंतुलित आहार भी होता है। इलसिए जब भी आप इसका इलाज करवाते हैं आपको संतुलित आहार लेने की सलाह दी जाती है जिससे आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़े और आप बीमारी से लड़ पायें। बुखार शरीर को तोड़ कर रख देता है इसलिए आपको इससे लड़ने के लिए संतुलित आहार पर ध्यान देना बहुत ही आवश्यक है। वैसे तो कोई भी बीमारी हो उसमें शरीर को तकलीफ उठानी ही होती है। तो अगर आप बिमारियों से बचना चाहते हैं तो तुलसी और नीम की पत्तियों का सेवन प्रतिदिन करें। इससे कई फायदे होंगे और कई बिमारियों से आप स्वयं को बचा पाएंगे।

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