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आज भी डिप्रेशन है बड़ी समस्या

by Darshana Bhawsar
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डिप्रेशन को लेकर आज के समय में भी बहुत कम जागरूकता है. डिप्रेशन या अवसाद को आमतौर पर लोग दिमाग से सम्बंधित बीमारी या मानसिक बीमारी कहते हैं।  कई बार अगर किसी व्यक्ति का व्यवहार बदल गया है या वह मानसिक रूप से परेशान है तो भी यही माना जाता है कि वह व्यक्ति डिप्रेशन में हैं। लेकिन ऐसा मानना या सोचना बिल्कुल गलत है क्योंकि हर दिमागी बिमारी डिप्रेशन नहीं हो सकती। दिमाग से सम्बंधित कई आम बीमारियाँ होती हैं जैसे: सिजोफ्रेनिया, एन्जाइटी डिसऑर्डर, फोबिया, साइकोसिस, ओसीडी या फिर नशे की आदत होना। अधिकतर डिप्रेशन की समस्या छोटी-छोटी चिंताओं के कारण या किसी तनाव के बाद ही होता है। कभी-कभी डिप्रेशन अनवांशिक भी होता है। डिप्रेशन की कई वजह होती हैं जैसे कोई पुरानी बीमारी का होना या फिर विटामिन की कमी होना।

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  • डिप्रेशन के प्रकार:

डिप्रेशन के कई प्रकार होते हैं जिन्हें समझना बहुत जरुरी होता है।

  • पोस्ट पेटम डिप्रेशन:

अगर बच्चे के जन्म के बाद माँ को डिप्रेशन होता है तो वह पोस्ट पेटम डिप्रेशन कहलाता है। इसलिए गर्भावस्था के समय डॉक्टर हमेशा महिला के डिप्रेशन के लक्षण पर नज़र रखते हैं। इसके लिए वे गर्भधारण के समय से लेकर बच्चे के जन्म के बाद तक स्क्रिंनिंग प्रश्नावली का प्रयोग करते हैं।

  • सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर:

जैसा कि इसके नाम से ही साफ़ है कि यह किसी मौसम में होने वाला डिप्रेशन हैं। कई बार व्यक्ति केवल सर्दियों में बार-बार डिप्रेशन का शिकार होता है। इसे सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर कहा जाता है। कई लोग इस डिप्रेशन का शिकार होते हैं। इससे बाहर निकलना आसान होता है।

  • बायपोलर डिसॉर्डर:

मेनिया के एपिसोड के साथ में अगर डिप्रेशन है तो उसे बायपोलर डिसॉर्डर कहा जाता है इस प्रकार का डिप्रेशन हानिकारक आता है। यह खतरनाक भी होता है इसलिए इसके प्रति सतर्क रहना चाहिए।

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  • डिस्थीमिया डिप्रेशन

कुछ व्यक्तियों में कम गति वाले डिप्रेशन के लक्षण काफी लम्बे समय तक रहते हैं। अगर ये लक्षण दो साल या उससे अधिक देखने को मिल रहे हैं तो इसे डिस्थीमिया डिप्रेशन कहा जाता है। इसका इलाज भी करवाना बहुत जरुरी होता नहीं तो यह बहुत अधिक बढ़ सकता है।

  • एटिपिकल डिप्रेशन:

एटिपिकल डिप्रेशन में व्यक्ति की नींद और भूख बढ़ जाती है, बहुत अधिक थकावट होती है और संवेदनशीलता भी बहुत अधिक बढ़ जाती है। इस तरह के लक्षण अगर किसी व्यक्ति में देखे जाते हैं तो वह व्यक्ति एटिपिकल डिप्रेशन का शिकार होता है। इससे रोकना बहुत ही आवश्यक होता है।

  • डिप्रेशन के लक्षण:

डिप्रेशन के कई लक्षण होते हैं और ये बहुत ही आसानी से व्यक्ति में देखने को मिल जाते हैं। ये कुछ आम लक्षण है जो व्यक्तियों में डिप्रेशन के दौरान देखने को मिलते हैं। जैसे मन का अधिकतर उदास रहना, बार-बार रोने का मन करना, किसी भी चीज़ में या कार्य में मन न लगना, एन्जॉय न कर पाना, जल्दी थकान होना, आत्मविश्वास में कमी आना, बार-बार दिमाग में नकारात्मक सोच का आना, नींद कम आना, भूख कम लगना, आत्महत्या या स्वयं को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करना। ये सभी व्यव्हार डिप्रेशन वाले व्यक्ति में देखने के लिए मिलते हैं। इनमें से अगर पांच या पांच से अधिक लक्षण किसी व्यक्ति में देखने को मिलते हैं इसका मतलब है कि वह व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार है। उसका इलाज करवाना बहुत ही जरुरी होता है।

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  • किसी भी प्रकार के डिप्रेशन से बचाव के उपाय:

डिप्रेशन से बचाव करना बहुत ही ज्यादा जरुरी होता है। अगर कोई व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार है तो उसे निम्न उपाय करना चाहिए:

  • पहले तो डिप्रेशन की वजह को जानने और उसके समाधान के लिए दोस्तों, परिवार वालों की एव सहकर्मियों से मदद लें।
  • संतुलित आहार लेना बहुत जरुरी होता है और ये ध्यान रखें कि आपका वजन भी नियंत्रित रहे।
  • समय-समय पर रूटीन चेकउप करवाना चाहिए और साथ ही थाइरॉइड की भी जाँच करवा लें।
  • रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद जरूर लें।
  • अपनी सोने, उठने और खाने की एक दिनचर्या बना लें।
  • जिम वाले लोग स्टीरॉइड से दूर रहे और जो भी सप्लीमेंट ले रहे हैं वे डॉक्टर की सलाह से लें।
  • दोस्तों के साथ समय बिताएं।
  • खुश रहने का प्रयास करें।
  • अगर कोई परेशानी है तो उसे अपने सहपाठियों या दोस्तों या फिर परिवार वालों के साथ शेयर करें।
  • कहीं घूमने जायें।
  • योग और मैडिटेशन जरूर करें।

डिप्रेशन से बचने के ये मुख्या उपाय हैं इन्हें अपनाने से आप डिप्रेशन को काम कर पाएंगे और इससे दूर रह पाएंगे। तनाव डिप्रेशन कि मुख्या वजह होता है। इसलिए तनाव से स्वयं को दूर रखें।

  • तनाव क्या है:

तनाव एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति अधिक चिंता में डूबा रहता है और छोटी-छोटी बातों के प्रति संवेदनशील हो जाता है। नियमित तनाव होने से व्यक्ति में डिप्रेशन और अवसाद पैदा होने लगता है। इसलिए तनाव से दूर रहना बहुत ही जरुरी है। तनाव कई प्रकार से व्यक्ति को प्रभावित करता है और व्यक्ति तनाव के कारण नकारत्मक हो जाता है।

  • तनाव मुक्त रहने के उपाय:

तनाव से मुक्त रहने के लिए स्वयं को खुश रखना बहुत ही जरुरी होता है। अगर स्वयं को खुश रखा जाए तो तनाव और डिप्रेशन जीवन में घर नहीं करेंगे। तनाव मुक्त रहने के लिए ये नुस्खे अपनाएं:

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  • 30 में स्वयं को अच्छा लगने वाला काम करें:

यह जरुरीं नहीं है कि तनाव से मुक्ति के लिए सिर्फ यग और मैडिटेशन ही किया जायें। आपको जो भी अच्छा लगता है आप वह करें। बस ये ध्यान रखें कि आप वही करें जिससे आपके शरीर को फिट रखने में मदद मिले। अगर आपको डांस करने में ख़ुशी मिलती है तो डांस करें, अगर आपको व्यायाम करने में ख़ुशी मिलती है तो आप व्यायाम करें। जो भी आपको अच्छा लगता है करें।

  • उन बातों को लिखें जो आपको पसंद हैं:

ऐसा कहा जाता है जब आपके मन के विचार कहीं पर व्यक्त होते हैं तो नींद अच्छी आती है। विचारों को व्यक्त करना बहुत ही जरुरी होता है। इसलिए आप अपने विचारों को पन्नों पर लिखें। आप वो सभी बातें लिखें जो आपको पसंद हैं जैसे आप क्या करना चाहते हो, जहाँ आप जाना चाहते हो। और रोज ऐसा करें। एक दिन आपके ये सपने सच भी होंगे और आप तनाव मुक्त भी रहेंगे।

  • दौड़ना:
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दुआदना शरीर को फिट रखने में भी सहायक है और दिमाग को फिट रखने में भी सहायक है। अगर आप फिर रहना चाहते हैं और तनाव मुक्त रहना चाहते हैं तो दौड़ लगाएं। अगर आप इसके लिए सुबह का समय चुनते हैं तो बहुत ही उम्दा होगा। कम से कम 30 मिनिट इसे जरूर दें।

  • दूसरों से जुड़ना:

लोगों से बात करना, उन्हें मिलना जुलना और उनसे जुड़ना बहुत ही जरुरी होता है। इसलिए आप इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि अगर आप तनाव और डिप्रेशन से मुक्त रहना चाहते हैं तो आप दूसरों से जुड़ें। आप इनके साथ एन्जॉय करें, समय बिताएं और अगर आपकी किसी से अच्छे से बात होती है तो उसे अपनी परेशानी बताएं।

  • तनाव और डिप्रेशन का आपसी सम्बन्ध:

तनाव और डिप्रेशन का आपस में गहन सम्बन्ध है। जो व्यक्ति हमेशा तनाव में रहता है वह बहुत ही जल्दी अवसाद या डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। कहते हैं न कि छोटी-छोटी चिंताएं व्यक्ति को खा जाती हैं। ये चिंताएं कभी-कभी इतनी अधिक बढ़ जाती हैं कि व्यक्ति इनके अलावा कुछ सोचता ही नहीं है और इनसे घिर जाता है। इन चिंताओं को दूर करना बहुत ही अधिक जरुरी होता है तभी तनाव से दूर रहना संभव होता है। अगर व्यक्ति तनाव से दूर नहीं हो पाता तो वह डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। डिप्रेशन से दूर होना इतना आसान नहीं होता जितना की व्यक्ति सोचता है।

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  • योग और मैडिटेशन का डिप्रेशन को दूर करने में योगदान:

योग और मैडिटेशन व्यक्ति के तन, मन और शरीर को एक जगह पर एकाग्र करने की बहुत ही पुरानी प्रक्रिया है। इसके द्वारा किसी भी प्रकार की बीमारी को दूर रखा जा सकता है। जब बात तनाव या डिप्रेशन की आती है तो यह सलाह दी जाती है कि मैडिटेशन या योग किया जायें। क्योंकि इनमें ही ऐसी शक्ति है जिससे व्यक्ति पूर्ण रूप से तनाव और डिप्रेशन से मुक्त हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से योग और मैडिटेशन करता है तो वह तनाव और डिप्रेशन के अलावा कई अन्य बिमारियों से भी मुक्त रहता है। तनाव और डिप्रेशन दिमागी फितूर के कारण होते हैं।

  • संतुलित आहार से डिप्रेशन को दूर किया जा सकता है:

जी हाँ आहार शरीर के लिए एक अहम् तत्व है इसके बिना शरीर को चलाना संभव ही नहीं है। इसलिए संतुलित भोजन से डिप्रेशन को दूर किया जा सकता है। संतुलित भोजन तनाव को कम करने में सहायक होता है। संतुलित आहार में आप इन चीज़ों का सेवन कर सकते हैं जैसे: अंकुरित अनाज, सलाद, अनार, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, जूस, सूप इत्यादि। सभी विटामिन, आयरन और मिनरल युक्त भोजन व्यक्ति को लेना चाहिए। इससे कई प्रकार की बिमारियों से भी छुटकारा मिलता है।

  • डिप्रेशन की दवाओं के नुकसान:
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ज्यादा दवाओं का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता। वैसे ही अगर हम बात करें डिप्रेशन की दवाओं की तो डिप्रेशन के मरीज को दी जाने वाली दवाओं के कई प्रकार के नुकसान होते हैं। आज के समय में भी डिप्रेशन को लेकर कम जागरूकता है। डिप्रेशन के लिए ली जाने वाली दवा अंगों द्वारा सरोटोनिन के अवशोषण को रोकती है जिससे शरीर के अंग ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पाते। कई बार नींद की दवाओं का भी प्रयोग डिप्रेशन के मरीज के लिए किया जाता है जिससे कि मरीज को इसकी आदत पड़ जाती है। कभी-कभी यह स्थिति डिप्रेशन से भी बेकार हो जाती है जिसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। इससे कई हृदय सम्बन्धी और रक्त सम्बन्धी रोग भी हो जाते हैं। इसलिए इन दवाओं का सेवन भी ज्यादा नहीं करना चाहिए।

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  • डिप्रेशन का इलाज जरुरी है:

डिप्रेशन का इलाज बहुत ही ज्यादा जरुरी है क्योकि डिप्प्रेशन का मरीज कई बार ऐसे कदम उठा लेता है जिससे उसकी जान को भी खतरा हो सकता है। लेकिन जितना हो सके इसके घरेलु उपाय करना चाहिए। और मनोवैज्ञानिक की समय-समय पर सलाह लेते रहना चाहिए। डिप्रेशन के कुछ घरेलु उपाय इस प्रकार हैं:

  • डिप्रेशन के मरीज को अकेला न छोड़ा जायें:

जो व्यक्ति डिप्रेशन में होता है वह हमेशा इसी कोशिश में रहता है कि कोई भी उसके आस पास न भटके वह जितना हो सके अकेला  रहे। तो अगर व्यक्ति अकेला रहना चाहता है तो ऐसा न होने दे। डिप्रेशन वाले व्यक्ति के साथ हमेशा कोई न कोई रहे और उसका ध्यान ख़ुशी वाली चीज़ों कि तरफ केंद्रित करे। इससे डिप्रेशन में कई हद तक सुधार किया जा सकता है।

  • डिप्रेशन के मरीज को हँसाने की कोशिश करें:

कहते हैं ख़ुशी हर मर्ज की दवा होती है तो अगर कोई व्यक्ति डिप्रेशन में है तो उसे डिप्रेशन से दूर करने के लिए उसे हँसाने का प्रयास करें। उसके सामने ऐसी बातें करें जिससे वह व्यक्ति खुश हो जाए। डिप्रेशन वाले व्यक्ति के मन में ख़ुशी पैदा करना बहुत जरुरी होता है इससे वह डिप्रेशन से बहुत ही जल्दी बाहर आ सकता है।

  • कही घूमने जाएँ:

अगर डिप्रेशन का मरीज कहीं घूमने जाता है तो उसके वातावरण में परिवर्तन आता है एवं यह परिवर्तन उसके लिया अच्छा सिद्ध होता है। इससे व्यक्ति को ख़ुशी मिलती है। कभी-कभी जगह और मौसम परिवर्तित होने से भी तनाव में कमी आती है। घूमने के लिए व्यक्ति कि पसंद कि जगह ही चुनना चाहिए।

  • खाने का रखें ध्यान:

डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति को वह सब खिलाएं जो उसे पसंद हों। और उसे जुड़े हुए कुछ हंसी वाले किस्से भी सुनाएं। इससे व्यक्ति का डिप्रेशन बहुत ही जल्दी कम होगा और व्यक्ति की चिंताओं में भी कमी आएगी। तनाव कम होगा तो डिप्रेशन भी कम होता चला जायेगा। इन सभी बातों का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है।

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तनाव हो या फिर डिप्रेशन दोनों ही सेहत के लिए हानिकारक हैं। इनसे बचाव करना भी मनुष्य के ही हाथ में होता है इसलिए व्यक्ति को इसके लिए स्वयं ही प्रयास करने होंगे जिससे कि तनाव या डिप्रेशन उन्हें न घेरे। एक बार अगर व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो जाता है तो फिर इससे छुटकारा पाना बहुत ही अधिक मुश्किल हो जाता है। कई शोध में यह बताया गया है कि ख़ुशी ही एक ऐसी चीज़ है जो तनाव और डिप्रेशन पर काबू पा सकती है। अगर डिप्रेशन को दूर करना है तो ख़ुशी से दोस्ती करना ही होगी तब ही जाकर डिप्रेशन और तनाव दूर भागेंगे। डिप्रेशन का दवाएं लेना डिप्रेशन को नष्ट नहीं कर सकता इसलिए जितना हो सके ऐसे प्रयास करें जिससे डिप्रेशन को दूर करें जिनके कोई दुष्परिणाम न हों।

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