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प्राचीनकाल से ही माँ का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार माना जाता रहा है। शिशु के जन्म से लेकर 6 माह तक माँ का दूध शिशु के लिए वरदान से कम नहीं होता है।  यदि नवजात को जन्म के एक घंटे के अंदर मां का पीला गाढ़ा दूध पिलाया जाए, साथ ही छह माह तक सिर्फ माँ का स्तनपान कराया जाए तो शिशु को अनेको प्रकार की बिमारियों से बचाया जा सकता है।  माँ के दूध के सेवन से शिशु की इम्युनिटी मजबूत होती है। वैज्ञानिकों ने मां के दूध में पाए जानेवाले पोषक और एंटीऑक्सीडेंट तत्वों की वजह से इसे ‘फर्स्ट वैक्सीन’ का दर्जा दिया है। यह शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए भी बहुत जरूरी है। यदि मां को कोइ बीमारी न हो, तो बच्चे को छह माह सिर्फ मां का दूध और उसके बाद थोड़ी थोड़ी मात्रा में अर्ध ठोस आहार देना चाहिए।

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आइये जानते है शिशु को स्तनपान से क्या फायदे होते है :

  • मां के दूध में स्टेम कोशिकाएं पायी जाती हैं जो अल्जाइमर और कैंसर जैसे रोगो का प्रतिरोध आसानी से  कर सकती है। इन कोशिकाओं में वही गुण होते हैं जो भ्रूण कोशिकाओं में पाये जाते है। स्टेम कोशिकाएं शरीर की  किसी भी कोशिका के  रूप में परिवर्तित हो सकती है। इनको ‘मास्टर कोशिकाए’ भी कहा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार मास्टर कोशिकाएं कैंसर, दृष्टिहीनता, मधुमेह, अल्जाइमर, पार्किंसन और लकवा जैसी बीमारियों को ठीक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • Leukocytes नामक जीवित सेल केवल ब्रेस्ट मिल्क में पाया जाता है जो की शिशु में इन्फेक्शन होने से रोकने में मदद करता है। ब्रेस्ट मिल्क में पाये जाने वाले लाभकारी एंटीबाडीज, एन्ज़ाइम्स और होर्मोनेस का समायोजन शिशु को जीवनभर स्वस्थ रखने का कार्य करता है।
  • माँ का दूध 6-8 माह तक के बच्चे के लिए बहुत लाभकारी माना गया है आमतौर पर माँ के दूध का सेवन करने वाले बच्चो की तुलना में, वह बच्चे जो माँ के दूध का सेवन इस उम्र में नहीं कर पाते कम स्वस्थ रहते है।
  • मां का दूध शिशु को उसी तापमान में मिलता है, जो की शिशु के शरीर का होता है। इससे शिशु को सर्दी नहीं होती है।
  • एक साल से कम उम्र के शिशु में डायरिया से लड़ने की क्षमता कम पायी जाती है। मां के दूध में इस रोग से लड़ने की काफी अधिक क्षमता होती है।
  • मां के स्तन से पहली बार निकलने वाले दूध के साथ एक गाढ़ा पीले रंग का द्रव बाहर आता है, जिसे कोलोस्ट्रम कहते हैं। इसमे शिशु को संक्रमण से बचाने और शिशु की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की काफी अधिक क्षमता होती है।
  • टीकाकरण से ठीक पहले अथवा बाद में बच्चो को स्तनपान कराने से उनको कम तकलीफ होती है।

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रिपोर्ट : डॉ. हिमानी