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वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का सामान रखें

by Darshana Bhawsar
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वास्तु शास्त्र के बारे में तो सबने सुना ही होगा। वास्तु शास्त्र एक प्राचीन विज्ञान है। जब किसी घर का निर्माण या इमारत का निर्माण किया जाता है या फिर किसी भवन या मंदिर का निर्माण किया जाता है तो उसके लिए एक आर्किटेक्चर तैयार किया जाता है। यह आर्किटेक्चर जब वास्तु शास्त्र के अनुसार तैयार किया जाता है तो भवन में क्या चीज़ कहाँ होना चाहिए और कौन सी चीज़ कहाँ बनी होनी चाहिए इन सभी बातों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। जिन वस्तुओं का हम नियमित प्रयोग करते हैं उनको किस जगह रपर खा जाये उसका भी एक नियम होता है। वास्तुकला वास्तु शास्त्र से ही सम्बंधित होता है।

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वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन निर्माण भी किया जाता है और घर के सामान को व्यवस्थित भी किया जाता है। वैसे अगर वास्तु शास्त्र के अनुसार ही घर का सामन रखा जाता है तो इससे घर में सकारात्मक उर्जा का प्रवाह होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के रसोई से लेकर पूजा घर तक का निर्माण सोच समझ कर किया जाता है। घर का हर एक कोना ऐसा बनाया जाता है जहाँ से सकारात्मक उर्जा आये और घर में सुख सम्रद्धि बनी रहे। पहले के समय में जब मंदिर और किलों का निर्माण होता था तब इस  विज्ञान का प्रयोग किया जाता था लेकिन जो सामान्य लोग होते थे उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। लेकिन आज के समय में लोगों को वास्तु शास्त्र के बारे में जानकारी है इसलिए आज के समय में भवनों का अधिकतर निर्माण वास्तु के अनुसार होता है। साथ ही साथ लोग घर की वस्तों को भी वास्तु के अनुसार ही रखते हैं।

जब भी भवन का निर्माण करवाया जाता है तब व्यक्ति की यही उम्मीद होती है कि उस घर में खुशियाँ हों, सुख शांति हो। और इसी के अनुसार और इन्ही बातों का ध्यान रखते हुए व्यक्ति भवन के पूर्ण होने पर उसमें पूजा करवाता है। ऐसे ही वास्तु शास्त्र भी भवन निर्माण का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। व्यक्ति को इस हिस्से को हमेशा भवन निर्माण में प्रयोग करना चाहिए। वैसे आज हम वास्तु शास्त्र के कई बिन्दुओं पर केन्द्रित होंगे।

  • शयनकक्ष या बेडरूम:

शयनकक्ष या बेडरूम घर का एक अहम् हिस्सा होता है। वास्तु के अनुसार शयनकक्ष की दिशा एवं इसमें रखे जाने वाले सामान के बारे में जानकारी होना बहुत आवश्यक है।

  • शयनकक्ष हमेशा साफ़ होना चाहिए एवं इसमें रखी हुई चीज़ें हमेशा व्यवस्थित होना चाहिए।
  • एक बात का हमेशा ध्यान रखें कभी भी बेडरूम में आक्रमक जानवर, देवी देवताओं की तसवीरें नहीं लगाना चाहिए।
  • बेडरूम में कभी भी दर्पण नहीं होना चाहिए लेकिन आज के समय में बेडरूम में दर्पण लगाये जाते हैं तो उसकी दिशा निर्धारण करें और वास्तु शास्त्र का सहारा लें।
  • कभी भी रौशनी के बिल्कुल नीचे बेड नहीं होना चाहिए।
  • बेडरूम का आकार ऐसा होना चाहिए जैसे: पेंटागोनल, अर्धवृत्त, सर्कल (गोल), अष्टकोणीय इत्यादि। कभी भी बेडरूम का आकार चौकोर या आयत नहीं होना चाहिए।
  • बेडरूम की दीवारें हमेशा हलके रंगों से रंगी हुई होना चाहिए जो मन को सुकून पहुँचायें।
  • अलमारी ऐसे नहीं लगी होना चाहिए जिससे प्रवेश द्वार में बाधा उत्पन्न हो।
  • बेडरूम में कभी भी एक्वेरियम या पौधे नहीं रखना चाहिए ये अशुभ होता है।
  • बेडरूम में हमेशा हल्की रौशनी होना चाहिए जो शांति का प्रतीक हो।
  • बेडरूम के कोने में कभी भी कोई खिड़की या प्रवेश द्वार नहीं होना चाहिए।
  • आज के समय में बेडरूम के साथ ही शौचालय बनाने का चलन है तो इसका दरवाजा हमेशा बंद होना चाहिए नहीं तो नकारात्मक उर्जा आती है।

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  • रसोई घर:
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रसोई घर घर का बहुत अहम् हिस्सा है इसके बिना घर अधूरा होता है। वास्तु के अनुसार रसोई घर हमेशा आग्नेय(दक्षिण-पूर्व कोण) दिशा में होना चाहिए। अग्नि को आग्नेय कोण का स्वामी माना जाता है और इसलिए ही रसोई का इस दिशा में होना शुभ होता है इससे भोजन में सकारात्मक उर्जा रहती है एवं घर के सभी लोग स्वास्थ्य रहते हैं। घर हमेशा धन धन्य से भरा रहता है।

  • रसोई का चूल्ह हामेशा आग्नेय कोण में रखा हुआ होना चाहिए। कभी भी दीवार से सटाकर चूल्हा नहीं रखना चाहिए और साथ ही उत्तर दिशा में भी चूल्हा नहीं होना चाहिए। उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा कहा जाता है और कुबेर और अग्नि की आपस में कभी नहीं बनती ऐसा माना जाता है।
  • सिंक रसोई का अहम् हिस्सा है जिसका प्रयोग पानी और झूठे बर्तन धोने के लिए किया जाता है। सिंक  हमेशा ईशान कोण में होना चाहिए।
  • फ्रीज़ या बिजली से चलने वाले सभी उपकरण के लिए भी वास्तु शास्त्र के अनुसार दिशा निर्धारण किया गया है। तो बिजली के सभी उपकरण पश्चिम दिशा में रखे हुए होना चाहिए।
  • स्टोर में जो सभी चीज़ें आती है जैसे दाल, चावल, आटा, मसाले इत्यादि। ये सभी चीज़ें पश्चिम दिशा या दक्षिण दिशा में रखी हुई होना चाहिए। माना जाता है। पश्चिम दिशा या दक्षिण दिशा में स्टोर रखने से कभी भी इनमें कमी नहीं होती।
  • खिड़कियाँ रसोई घर का महत्वपूर्ण हिस्सा है और वास्तु के अनुसार खिड़कियाँ उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए।
  • रसोई घर में एग्ज़ॉस्ट फैन पूर्वी दीवार पर लगाना चाहिए या फिर खिड़की के बिल्कुल ऊपर लगाना भी बहुत शुभ माना जाता है।
  • स्लैब को हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए जिससे कि खाना बनाते समय मुख उत्तर या दक्षिण दिशा में रहे।
  • रसोई घर का मुख्या दरवाजा हमेशा ईशान कोण में होना चाहिए इससे सकारात्मक उर्जा बनी रहती है।
  • पूजा घर:
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पूजा घर किसी भी भवन का वह हिस्सा होता है जहाँ व्यक्ति को जाकर सुकून और शांति का अनुभव होता है। यहाँ भगवान् की मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं एवं यहाँ पूजा अर्चना संपन्न की जाती है।

  • पूजा घर में भगवान् की मूर्तियाँ हमेशा ऐसे रखी हुई होना चाहिए कि उनका मुँह पूर्व या पश्चिम दिशा में हो। मूर्तियों का मुँह कभी भी उत्तर या दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए।
  • और मूर्तियाँ हमेशा ऐसे रखना चाहिए कि देवतों की दृष्टि एक दूसरे पर न पड़े।
  • पूजा घर के खिड़की व दरवाजे हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा में होने चाहिए।
  • पूजा घर का दरवाजा लकड़ी का नहीं होना चाहिए।
  • पूजा घर के आस पास शौचालय, स्टोर जैसी चीज़ें नहीं होना चाहिए। एवं पूजा घर के ऊपर या नीचे भी शौचालय, स्टोर नहीं होना चाहिए।
  • बैडरूम में कभी भी पूजा घर नहीं होना चाहिए या पूजा का स्थान बैडरूम में नहीं होना चाहिए।
  • पूजा घर की दीवारों पर सफ़ेद या हल्का पीला रंग होना चाहिए ऐसा शुभ माना जाता है।

पूजा घर के लिए इन सभी बातों का ध्यान रखें ये घर में सुख संपत्ति लाती हैं।

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  • बाथरूम:

बाथरूम और शौचालय स्वच्छ भारत का एक अहम् हिस्सा है और यह घर का भी अहम् हिस्सा है। इसके लिए एक विशेष दिशा का निर्धारण वास्तु के अनुसार किया गया है।

  • बाथरूम और शौचालय दोनों अलग-अलग बने हुए होना चाहिए।
  • शौचालय में सीट का मुँह दक्षिण या उत्तर की तरफ होना चाहिए। शौचालय में लगा हुआ एग्जास्ट फैन उत्तरी या पूर्वी दीवार में होना चाहिए।
  • इसकी दीवारों का रंग हल्का होना चाहिए जैसे सफ़ेद या हल्का गुलाबी, या हल्का पीला।
  • आग्नेय कोण में शौचालय बनवाना चाहिए और साथ ही पूर्व की ओर बाथरूम बनवाना चाहिए।
  • बाथरूम व शौचालय नैऋत्य व ईशान कोण में कभी भी नहीं होना चाहिए।
  • सीढ़ियाँ:

सीढ़ियाँ भी घर का एक बहुत ही अहम् हिस्सा होती है। छत पर जाने के लिए या अगर घर 2 या ज्यादा मंजिला बना हुआ है तो ऊपर जाने के लिए सीढ़ियाँ ही काम आती है। इसलिए सीढ़ियाँ घर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

  • सीढ़ियाँ हमेशा पूर्व या दक्षिण दिशा में होना चाहिए। अगर  पूर्व या दक्षिण दिशा में होना तो बहुत ही शुभ मानी जाती है।
  • घुमावदार सीढ़ियों में ये पूर्व से दक्षिण, दक्षिण से पश्चिम, पश्चिम से उत्तर और उत्तर से पूर्व की दिशा में ही होनी चाहिए।

ये कुछ विशेष बातें थी जिसमें हमने आपको बताया कि वास्तु के अनुसार कौन सा सामान और कक्ष कहाँ होना चाहिए एवं इसका क्या महत्व है। आप अगर भवन निर्माण का सोच रहे हैं तो आप भी किसी अच्छे वास्तु शास्त्री की सहायता ले सकते हैं।

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