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सूर्य नमस्कार को अपनाकर पाएं अनेकों स्वास्थ्य लाभ

by Mahima

सूर्य नमस्कार का अर्थ है सूरज को नमस्कार करना। हमारे भारतीय समाज में सूर्य नमस्कार, सूर्य के प्रति सम्मान व आभार प्रकट करने की एक प्राचीन विधि मानी जाती है। ऐसा मन जाता है की मानव शरीर में पाया जाने वाला मणिपुर चक्र (नाभि के पीछे स्थित केंद्र) सूर्य से संबंधित है। सूर्य नमस्कार के लगातार अभ्यास से मणिपुर चक्र विकसित होता है।जिससे व्यक्ति की रचनात्मकता और अन्तर्ज्ञान बढ़ते हैं। यही कारण है कि ऋषिओं मुनियों द्वारा  सूर्य नमस्कार को रोज अपने जीवन में अपनाने के लिए जोर दिया जाता है। सूर्य नमस्कार एक ऐसा योग है जिसको लोग ऊर्जा और ज्ञान प्राप्ति के लिए करते हैं। सूर्य-नमस्कार के नियमित अभ्यास से शारीरिक और मानसिक स्फूर्ति की वृद्धि के साथ विचारशक्ति और स्मरणशक्ति भी तीव्र होती है।

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इसके अन्य कई लाभ हैं जो इस प्रकार हैं :

  •  आंखों की रोशनी बढ़ती है।
  • शरीर में खून का प्रवाह तेज होता है जिससे ब्लड प्रेशर की बीमारी में आराम मिलता है।
  • पेट के पास की चर्बी घटती है
  • बालों को सफेद होने, झड़ने एवं रूसी से बचाता है।
  • क्रोध पर काबू रखने में मदद मिलती है तथा मन की एकाग्रता बढ़ती है।
  • रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और विटामिन-डी मिलता है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं।
  • त्वचा रोग होने की संभावना समाप्त हो जाती है।
  • हृदय व फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है।
  • शरीर की सभी महत्वपूर्ण ग्रंथियों, जैसे पिट्यूटरी, थॉयराइड, पैराथॉयराइड, एड्रिनल, लीवर, पैंक्रियाज, ओवरी आदि ग्रंथियों के स्रव को संतुलित करने में मदद करता है।
  • शरीर के सभी संस्थान, रक्त संचरण, श्वास, पाचन, उत्सर्जन, नाड़ी तथा ग्रंथियों को क्रियाशील एवं सशक्त करता है।
  • पाचन सम्बन्धी समस्याओं, अपच, कब्ज, बदहजमी, गैस तथा भूख न लगने जैसी समस्याओं के समाधान में बहुत ही उपयोगी भूमिका निभाता है।
  • इसका नियमित अभ्यास करने वाले व्यक्ति को हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, निम्न रक्तचाप, मधुमेह, गठिया, कब्ज जैसी समस्याओं के होने की आशंका बेहद कम हो जाती है।
  • पैरों एवं भुजाओं की मांसपेशियों को सशक्त करता है। सीने को विकसित करता है।

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सूर्य नमस्कार हमारे लिए फायदेमंद तो होता है लेकिन इसको करने में हमे कुछ सावधानी भी बरतनी चाहिए जैसे कि-

  • जब कभी बुखार हो या पैरों में सूजन आ जाए तो हमें सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।
  • अनियमित उच्च रक्तचाप, चक्कर आने पर तथा दिल के रोग में सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।
  • गर्भावस्था के 4 महीने के बाद सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।

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रिपोर्ट: डॉ.हिमानी

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