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सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य दर्शन नहीं किसी योग से कम

by Mahima

हमारे हिन्दू धर्म में सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हुए तथा शाम को डूबते सूर्य को संध्या वंदन करते हुए कुछ देर तक निहारने की मान्यता हैं जिस प्रकार सूर्य के प्रकाश से क्रियाशील होकर पेड़ पौधे क्लोरोफिल का निर्माण कर भोजन बनाते है, उसी प्रकार मनुष्य की आँखों में एक तत्व होता है जो सूर्य प्रकाश से क्रियाशील हो कर ऊर्जा का निर्माण करता है और शरीर को आरोग्य प्रदान करता है। सूर्य को निहारना एक प्रकार का योग माना जाता है। सूर्योदय के एक घंटे बाद तक और सूर्यास्त से एक घंटे पहले तक का समय सूर्य दर्शन के लिए सुरक्षित होता है। इससे अतिरिक्त समय में सूर्य को  देखने पर आँखों की रौशनी पर गलत प्रभाव भी पड़ सकता है। अतः हम कह सकते हैं कि अपने मन को एकाग्रचित करके कुछ देर सूर्य को देखने के काफी लाभकारी फाएदे है।

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आइये जानते है सूर्य को देखने के लाभ :

  • सूर्य को निहारने से मेलाटोनिन और सेरोटोनिन का उत्‍पादन बढ़ता है। दरअसल सूर्य की तरफ देखने से पीनियल ग्रंथि उत्‍तेजित होती है जो सीधे आंखों से जुड़ी होती है और यह दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाती है।
  • मेलाटोनिन और सेरोटोनिन हॉर्मोन्स के उत्पादन से मनुष्य को अच्छा  एहसास होताहैं। जिसकी वजह से मनुष्य में तनाव कम होता  है, साथ ही  आंखों को सुकून मिलता है जिसकी वजह से  मनुष्य को अच्छां महसूस होता है।
  • सूर्य को नंगी आंखों से देखने से मानव को शक्ति मिलती है और वे अधिक क्रियाशील रहते है।
  • सूर्य की तरफ थोड़ी देर तक देखने से पिनियल ग्रंथि का आकार बढ़ता है। जिसको हम तीसरी आंख के नाम से  भी जानते है जो कि दोनों आखो के बीच में माथे पर होती है। हार्मोन के स्‍तर में बढ़ोतरी होने से ऐसा होता है। उम्र बढ़ने के साथ साथ पीनियल ग्रंथि सिकुड़ने लगती है। सूर्य को रोज नंगी आखो से देखने वाले 70 साल के व्‍यक्ति की पीनियल ग्रंथि अन्‍य लोगों की तुलना में तिगुनी बड़ी होती है।
  • सूर्य की तरफ देखने से दिमाग और शरीर दोनों को पोषण मिलता है। सूर्य की तरफ देखने से खाने की इच्‍छा कम होती है जिससे वजन घटता है। यह मन और इंद्रियो को काबू कर लेता है जिससे अधिक खाने की इच्‍छा नहीं रहती है।
  • सुबह उठकर खुली हवा में सूर्य को देखने से व्‍यक्ति के दिमाग में सकारात्‍मक विचार आते हैं जिसकी वजह से मनुष्य तनाव से  दूर रहता है और सक्रिय बना रहता है।

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रिपोर्ट: डॉ. हिमानी 

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