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हिन्दू धर्म में ॐ शब्द का बहुत महत्व माना जाता है| सभी मूल मंत्रों  में उसको सबसे ऊँचा स्थान दिया गया है।  ॐ ब्रह्मांड की अनाहत ध्वनि है| इस मंत्र का प्रारंभ तो है पर अंत नहीं है| इसलिए  इसको सभी मन्त्रों का बीजमंत्र कहा जाता हैं। माना जाता है कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड से सदा ॐ की ध्वनी निकलती रहती है। ओम शब्द का रोज उच्चारण करने मात्र से शरीर की आत्मा जागृत हो जाती है और रोग एवं तनाव से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि मानसिक और शारीरिक लाभ के लिए ओम का जाप करने की सलाह दी जाती है। दूसरी और वास्तु के अनुसार ओम के जाप से घर में मौजूद वास्तु दोषों को दूर किया जा सकता है। इसके अलावा वैज्ञानिक भी ओम के उच्चारण से निकलने वाली ध्वनि तरंगों पर शोध कर चुके हैं। अतः रिसर्च द्वारा इसके उच्चारण से अनेकों स्वास्थ लाभ सामने आये हैं।

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ओम (ॐ) शब्द तीन अक्षरों से मिलकर बना है…..अ उ म।

अ से तात्पर्य है उत्पन्न होना, उ से तात्पर्य है विकास और म से तात्पर्य है मौन हो जाना या ब्रह्मलीन हो जाना।

जानते है ओम () शब्द  के उच्चारण से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में :

  • तनाव: तनाव से मुक्ति पाने का यह सबसे फायदेमंद इलाज है| इसका उच्चारण शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर कर तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।
  • थायरॉयड: ॐ का उच्चारण करते समय गले में कंपन उत्पन्न होता है, जिसकी वजह से थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • पाचन: ॐ का उच्चारण केवल मानसिक रोगों को ठीक करने तक ही सीमित नहीं है। यह आंतरिक परेशानियों खास तौर से पाचन क्रिया पर सकारात्मक प्रभाव  डालता है, और पाचन तंत्र को सुचारु तथा मजबूत बनाये रखता है।
  • घबराहट: यदि व्यक्ति को घबराहट महसूस होती है तो आंखें बंद करके गहरी सांस लेते हुए ॐ का उच्चारण करने से घबराहट कम महसूस होती है।
  • नींद: अगर आप नींद नहीं आने की समस्या से परेशान हैं तो ओम का उच्चारण कुछ देर तक कीजिए। कुछ ही देर में आपका दिमाग शांत हो जाएगा और आप अच्छी नींद ले सकेंगे।
  • मेडिटेशन: ॐ का उच्चारण मेडिटेशन की तरह किया जाता है, जिससे मन को शांति मिलती है।
  • खून का प्रवाह: ॐ के उच्चारण से हार्ट चुस्त – दुरुस्त रहता है और खून का प्रवाह सही प्रकार से होता है।
  • स्फूर्ति: इसके उच्चारण से शरीर में स्फूर्ति का संचार रहता है।
  • थकान: ॐ के उच्चारण से थकान मिटती है।
  • फेफड़े: इसके उच्चारण से फेफड़े दुरुस्त बने रहते हैं।
  • रीढ़ की हड्डी: इसके उच्चारण से कंपन उत्पन्न होता है जो रीढ़ की हड्डी को मजबूती देता है।

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रिपोर्ट: डॉ. हिमानी