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पूजन से लेकर भोजन तक नारियल से जुड़ी कुछ खास बातें

by Naina Chauhan
coconut

नारियल एक ऐसा फल जो हर शुभ काम में इस्तेमाल किया ता है। नारियल का फल और तेल खाद्य पदार्थ व औषधीय रूप में इस्तेमाल होता है। वहीं इसके रेशों, पत्तों से झाड़ू, चटाई, रस्सी, छत, सोफे, कुर्सी की गद्दी, ब्रश आदि बनाए जाते हैं। इसे संस्कृत में श्रीफल, गुजराती में नारियर, बंगला में नारिकेल, मराठी में नारल और कश्मीरी में खूपर भी कहते हैं।

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पौराणिक कथा के अनुसार, देवताओं से नाराज होकर राजर्षि से ब्रह्मर्षि बने विश्वामित्र ने स्वयं सृष्टि की रचना प्रारंभ कर दी थी। उनका बनाया सिर ही नारियल है। ब्रह्मा की सृष्टि में इंसानों के दो आंखें होती हैं, जबकि विश्वामित्र ने अपनी मानव रचना में तीन आंखें बनाई थीं इसीलिए नारियल में आंखों के आकार के तीन प्रतीक देखने को मिलते हैं। यही वजह है कि नारियल को त्रिनेत्र भी कहा जाता है।

पूजन से लेकर भोजन तक में प्रयोग

नारियल के फल का बाहरी कवच मोटा तथा रेशेदार होता है, जो एक कठोर आवरण से ढंका रहता है। नारियल के कच्चे (हरे) फल को ‘डाभ’ कहते हैं। काटने पर इससे मीठा जल प्राप्त होता है, जो बहुत गुणकारी होता है।

इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार

नारियल में रेडियम व कोबाल्ट पाया जाता है, इसीलिए कैंसर रोगियों को गरी या नारियल पानी को डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा यह हृदय, यकृत गुर्दे, मुंह के छाले आदि रोगों में बहुत फायदेमंद होता है।

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गुणों से भरा नारियल पानी

नारियल का इस्तेमाल खानपान और सौंदर्य निखारने के लिए करते आए हैं। नारियल का हर हिस्सा किसी न किसी तरह से फायदेमंद ही होता है, लेकिन नारियल के पानी मे कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जिनकी शरीर को सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

चमत्कारी हैं घरेलू नुस्खे

सूखे नारियल से निकाले गए तेल का औषधीय महत्व बहुत अधिक होता है। इसकी मालिश त्वचा को कांतिवान बनाती है और बालों में इसके प्रयोग से रूसी व फंगस की समस्या से निजात मिलती है।

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