Home हेल्थडिप्रेशन भारतीय महिलाएं पुरुषों की तुलना में डिप्रेशन की अधिक शिकार क्यों ?

भारतीय महिलाएं पुरुषों की तुलना में डिप्रेशन की अधिक शिकार क्यों ?

by Dr. Himani Singh
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दुखी या  शोक ग्रस्त होना एक बहुत ही समान्य अवस्था हैं। हम सभी अपने जीवन काल में समय-समय पर  इस प्रकार की  भावनाओं को महसूस करते हैं परन्तु इस प्रकार की भावनाये आमतौर पर कुछ दिनों के भीतर चली जाती हैं और यदि यह अवस्था काफी लम्बे समय (दो सप्ताह से अधिक)  तक बनी हुई है तो यह डिप्रेशन का रूप ले सकती है।

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मेंटल डिसऑर्डर (डिप्रेशन) क्या है?

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मेंटल डिसऑर्डर, जिसे एक मानसिक बीमारी या मनोरोग विकार के नाम से भी जाना जाता है। इस बिमारी में व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति किसी स्वस्थ व्यक्ति के  मानसिक स्वास्थ्य की तुलना में बहुत ख़राब होती है।  मेंटल डिसऑर्डर को आमतौर पर किसी व्यक्ति के व्यवहार, उसके सोचने और महसूस करने के तरीकों द्वारा परिभाषित किया जाता है। समय समय पर कई लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धित समस्याएं हो सकती है परन्तु यदि यह समस्या हर समय बनी रहे तो यह आपके तनाव के स्तर को बहुत अधिक बढ़ा देती है, जिसका सीधा प्रभाव आपके दैनिक जीवन पर पड़ता है।

डिप्रेशन को लोग गंभीर रूप से क्यों नहीं लेते?

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डिप्रेशन के सबसे बुरे लक्षणों में से एक अकेलेपन की भावना,  जो कई नकारात्मक भावनाओं के कारण हो सकती है। किसी को यह बताने के लिए कि आप डिप्रेशन से गुजर रहे हैं इसके लिए आपको बहुत हिम्मत की आवश्यकता होती है क्योकि आपको लगता है कि लोग आपको गंभीरता से नहीं लेगें और आपके ऊपर हसेंगे। मेंटल डिसऑर्डर को लेकर आज भी  लोगो के बीच  बहुत कम जागरूकता है और यदि कुछ लोग इस बीमारी को लेकर जागरूक है तो भी डॉक्टर के पास जाकर इस बिमारी के बारे में बात करने में शर्म महसूस करते हैं। यही कारण है कि इस बिमारी का इलाज तब शुरू होता है जब स्थिति काफी बिगड़ जाती है। ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिजीज का अनुमान  है कि 2020 तक दुनिया भर में विकलांगता का दूसरा प्रमुख कारण डिप्रेशन होगा।

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पुरुषों की तुलना में महिलाओं में मेंटल डिसऑर्डर:

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महिलाओं में मनोवैज्ञानिक  संबंधी विकारों का पैटर्न पुरुषों की तुलना में अलग प्रकार का देखने को मिलता है। अनेकों प्रकार की शोधों से यह बात सामने आई है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में मेंटल डिसऑर्डर, जैसे अधिक चिंता और डिप्रेशन विकसित होने की संभावना दोगुनी  होती है। डिप्रेशन एक गंभीर स्थिति है जो महिलाओं के जीवन के हर क्षेत्र, जैसे कि  सामाजिक जीवन, पारिवारिक संबंधों, करियर और आत्मसमान आदि  को प्रभावित कर सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, महिलाओं में अक्सर यौन उत्पीड़न या दुर्व्यवहार के कारण मेंटल डिसऑर्डर जैसी बिमारियों के बढ़ने की अधिक सम्भावना रहती है। भारत में जहां 1.2 अरब आबादी रहती है वहां विशेष रूप से सभी आयु वर्ग की महिलाओं में डिप्रेशन की समस्या व्यापक रूप से प्रचलित है।

महिलाओं में डिप्रेशन को जन्म देने वाले कारण:

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1.हार्मोन परिवर्तन के कारण महिलाओं  में तनाव और डिप्रेशन की समस्या  बढ़ने की सम्भावना अधिक रहती है। हार्मोन सीधे हमारे मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं, जिसका प्रभाव सीधे महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर दिखता है। जिसके कारण महिलाओं की भावनाएं, मनोदशा और सम्पूर्ण  मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। कई बार शरीर में  हार्मोनल असंतुलन और प्रजनन हार्मोन में तेजी से उतार-चढ़ाव के कारण  महिलाओं में डिप्रेशन जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। गर्भावस्था, प्रजनन क्षमता, प्रीमेनोपॉज़, और मासिक धर्म चक्र से जुड़े मुद्दे  महिलाओं  में डिप्रेशन  के जोखिम कारकों को बढ़ाने का काम करते हैं।

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2. कहते हैं स्वस्थ शरीर खुशहाल जीवन की कुंजी है ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक समय से किसी पुरानी बीमारी से जूझ रहा है तो वह डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। पुरानी बीमारियों के उदाहरणों में मधुमेह, हृदय रोग, गठिया, गुर्दे की बीमारी, एचआईवी / एड्स, एआदि शामिल हो सकते हैं। वास्तव में, डिप्रेशन पुरानी बीमारी से ग्रषित लोगो में बहुत ही आम देखा गया है। यह अनुमान लगाया गया है कि गंभीर चिकित्सा स्थिति से गुजर रहे लगभग एक तिहाई लोग डिप्रेशन के शिकार होते हैं। एक पुरानी बीमारी आपके आत्मविश्वास और भविष्य में आशा की भावना को ख़त्म कर देती है।

3. अनेकों सर्वेक्षण द्वारा इस बात के स्पष्ट प्रमाण प्राप्त हुए हैं कि महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य, हिंसा और दुर्व्यवहार के उनके अनुभवों से बहुत अधिक जुड़ा होता है। भारत में महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकारों को बढाने में कई मनोवैज्ञानिक कारण महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, जिनमें वृद्धावस्था, कम शिक्षित होना, बेरोजगार होना, पारिवारिक क्लेश, अधिक धूम्रपान या शराब का सेवन और घर में या बाहर शारीरक शोषण शामिल है।

4. पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक भावनात्मक होती हैं जिसके कारण  उनके मन में बहुत जल्दी  नकारात्मक विचार प्रवेश कर जाते है जो धीरे धीरे डिप्रेशन में बदल जाते हैं।  साथ ही यह भी देखा गया है कि पुरुषों की तुलना में  महिलाएं अधिक  तनाव लेती हैं जो नकारात्मकता  को बढ़ा कर डिप्रेशन को जन्म देता है। एक सर्वेक्षण में पाया गया कि  मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझती 78% महिलाएं, बचपन और वयस्कता में शारीरिक और यौन हिंसा का शिकार हो चुकी होती है, जिसके चलते वह डिप्रेशन में आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने का भी प्रयास करती हैं।

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5. विभिन्न प्रकार की सामाजिक घटनाएँ भी डिप्रेशन को जन्म दे सकती हैं। कुछ सामान्य उदाहरणों में शामिल हैं: जैसे किसी प्रियजन की मृत्यु, तलाक या वैवाहिक समस्याएं, नौकरी का छूट जाना, पारिवारिक हिंसा, अपमानजनक रिश्ते, प्रेमी से ब्रेकअप, सामाजिक अलगाव, अपने मनपसंद लाइफस्टाइल को न अपना पाना आदि आत्मविश्वास में कमी का  कारण बनते हैं और डिप्रेशन को  जन्म देते हैं।

6. कई बार देखा गया है कि महिलाओं को घरों से निकलने, लोगों से मिलने जुलने आदि पर रोक होती हैं जिसके कारण पुरे दिन घर में अकेले रहने और अपने आस पास नकरात्मक विचार के कारण वह डिप्रेशन जैसी समस्या से अधिक ग्रषित हो जाती हैं।

डिप्रेशन के उपचार के लिए महतव्पूर्ण विकल्प:

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काफी हद तक डिप्रेशन  का  इलाज किया जा सकता है। कई  प्रभावी युक्तियों को अपनाने पर  डिप्रेशन को दूर करने के  सकारात्मक परिणाम  देखे गए हैं:

1. यदि आपको अनुभव हो रहा है कि आप डिप्रेशन की शिकार हो रही हैं तो ऐसे में आपको तुरंत उपचार की तलाश  में  पहला कदम अपने  डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सक से राय लेना होना चाहिए।  यदि आपके डॉक्टर को संदेह है कि आप डिप्रेशन से पीड़ित हैं, तो वह आपको  मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के पास जाने की सलाह देगा ऐसे में अपने डॉक्टर की सलाह मानना आपके लिए बहुत लाभकारी हो सकता है।

2. यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि महिलाएं अपने स्वयं के मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास  के लिए जितना संभव हो सके उतना अधिक से अधिक  शिक्षा / ज्ञान  लेने का प्रयास करे। क्योकि उपयुक्त  शिक्षा / ज्ञान की मदद से आप अपने आपको मानसिक  और  सामाजिक रूप से मजबूत बना सकते हैं जो आपको डिप्रेशन की बढ़ने से रोक सकती है। क्योकि काफी महिलाएं यह तक नहीं जान पाती कि वास्तव  प्रकार की बीमारी की चपेट में आ रही है ऐसे में  शिक्षा काफी हद तक आपका सही मार्गदर्शन करती है साथ ही उपयुक्त ज्ञान होने पर आप अन्य महिलाओं की भी मदद कर सकते हैं।

3. महिलाओं को डिप्रेशन से बचाने में पुरुष बहुत अधिक महतव्पूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। एक पिता, पति, भाई, दोस्त, और बॉयफ्रेंड  के रूप में आप डिप्रेशन से जूझ रही महिलाओं को भावनात्मक रूप से स्पोर्ट  कर सकते हैं क्योकि प्यार  और दया  के समर्थन के साथ महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य  में वर्द्धि देखी गयी है।

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4. डिप्रेशन के बारे में आम जनता के साथ खुल कर चर्चा करने की आवश्यकता है, क्योकि इसकी सहायता से मानसिक बीमारी के संकेतों और लक्षणों के बारे में व्यक्तियों के बीच में जागरूक  उत्पन्न की जा सकती है।

5. लोगों से मिलना जुलना (समाजीकरण) या अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों की कंपनी का आनंद लेना, तनाव कम करने का एक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है। लोगो से हाथ मिलाने , गले लगने ,लोगो से बात करके खुलकर हसने पर एक प्रकार का हार्मोन, जिसे ऑक्सीटोसिन कहते हैं वह हमारे शरीर से निकलता है जो हमारी चिंता के स्तर को कम करता है और हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाता है।

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6. डिप्रेशन की चपेट से दूर रहने के लिए यह जरुरी है कि आप अपने शौक के लिए समय निकाले ऐसे शौक जिसको करने से आपको ख़ुशी का अनुभव होता हो। इन शौक में आप किताब पढ़ना, पेंटिंग बनाना,मूवी देखना,कोई खेल खेलना या साज सजा करना आदि को शामिल कर सकते हैं। इन कामों के लिए जरुरी नहीं कि आप लम्बा समय निकाले आप 15 से 20 मिनट भी इन कामों को रोज करके अच्छा महसूस कर सकते हैं , साथ ही यह आपके तनाव के स्तर को भी काफी हद तक कम करने में आपकी मदद करता है।

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