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पिता बनने का एहसास, पुरुषों में क्या लाता है बदलाव

by Mahima
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एक दाम्पत्य जीवन तब तक अधूरा माना जाता है जब तक की वह शिशु सुख से सरावोर न हो जाएँ। यह एक ऐसी सुखद अनुभूति होती है जिसको शब्दों में नहीं वर्णित कर सकते। शिशु के जन्म से न केवल माता के जीवन में बदलाव आते हैं बल्कि पुरुषों के जीवन में भी बहुत से बदलाव देखने को मिलते हैं। ऐसा देखने में आया है कि अधिकाशतः पिता बनने के बाद पुरुषों में मानसिक और व्यवहारिक तौर पर बदलाव आ जातें हैं जो उनको युवावस्था का अक्खड़पन भूल कर उनमें गंभीरता लाने का प्रमुख कारण बनता है।

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आइये जानते है की पिता बनने के बाद एक पुरुष के जीवन में क्या बदलाव देखने को मिलते हैं:

लाइफस्टाइल में बदलाव : आज कल संयुक्त परिवार में रहने का प्रचलन कम होने की वजह से शिशु होने पर उसकी सारी जिम्मेदारी माता पिता को ही अकेले निभानी पड़ती है जिसके चलते पुरुषो को एहसास होने लगता है कि उनकी आजादी पूरी तरह छीन गयी है। पुरुष अचानक आए इस बदलाव से घबरा जातें हैं और परेशान हो जाते हैं।

अकेलापन महसूस करना: शिशु जन्म के बाद महिलाएं पूरी तरह से अपने शिशु की और समर्पित हो जाती है जिसके चलते वह अपने पति की तरफ कम ध्यान दे पाती है ऐसे में कई पुरुषों को लगता हैं कि उनकी पत्नी उनकी परवाह कम करती है जिसके चलते वह अपने आप को घर में अकेला महसूस करने लगते हैं।

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बुरी आदतों से दूर रहने मदद मिलती है: वैज्ञानिक शोधों के अनुसार बच्चे के जन्म के बाद पिता बनने के एहसास से पुरुषों को अपने अंदर बुरी आदतों (धूम्रपान तथा शराब) का अपराध बोध आसानी से होने लगता है। ऐसे में पिता बनने की जिम्मेदारी बहुत से पुरुषों में गलत आदतों से दूर रखने में सहायक सिद्ध होती हैं।

आर्थिक तनाव : गर्भ में बच्चा आने के बाद पुरुष का खुद पर बढ़ती जिम्मेदारियाँ और खर्चों को लेकर चिंतित होना स्वाभाविक बात हैं। परिवार का आर्थिक बोझ बढ़ने और नए बच्चे की जिम्मेदारी का एहसास कई बार पुरुषों में आर्थिक तनाव का कारण बन जाता हैं।

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शारीरिक संबंध में कम रूचि: पिता बनने के बाद पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के स्तर में कमी आती है। यह हॉर्मोन कामभावना को बढ़ाने वाला हार्मोन कहलाता है, जिसकी वजह से पुरुष शारीरिक संबंधों में भी कम रुचि लेने लगते हैं। कई बार शिशु के आ जाने से माता पिता दोनों उसकी देखभाल में इतने व्यस्त हो जाते है की शारीरिक संबंध बनाने के प्रति उनका रुझान अपने आप परिस्थिति के चलते कम हो जाता है।

रिपोर्ट: डॉ.हिमानी

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