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रजोनिवृत्ति किसी स्त्री के जीवन का वह समय है, जब उसके अंडकोष की गतिविधियां समाप्त हो जाती हैं। रजोनिवृत्ति तक आने की अवस्था में स्त्री के शरीर में अनेक शारीरिक और मानसिक पविर्तन होते हैं। और इन परिवर्तनो से महिलाओं के स्वास्थ पर काफी हद तक प्रभाव पड़ता है। हर महिला में रजोनिवृत्ति अलग-अलग समय अंतराल पर हो सकती है। अधिकांशता यह महिलाओं में 45 से 55 वर्ष की आयु में देखी जाती है, परन्तु यह 30 से 40 वर्ष की आयु में भी हो सकती हैं, और हो सकता है कि 55 से  60  वर्ष की आयु में भी हो।

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मेनोपोज़ महिला के जीवन में अचानक नहीं आता है, इस अवस्था तक पहुंचने में महिला को कम से कम चार से पाँच साल लग जाते हैं। कभी-कभी ओवरी या यूटरस में किसी प्रकार के सर्जरी के कारण भी यह अवस्था समय से पहले आ सकती है। जिस प्रकार हर महिला के जीवन में मासिकधर्म की क्रिया आरंभ होती है, उसी प्रकार हर महिला को रजोनिवृत्ति की अवस्था से भी गुजरना पड़ता है। महिला के प्रजनन चीवन चक्र को चार भागों में बाँटा जाता हैं और हर अवस्था महिलाओं के उम्र के साथ बदलती रहती है। यह बदलाव मूलतः हॉर्मोन्स के कारण होता है।

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आइये जानते है महिला के प्रजनन चीवन चक्र के चार भागों के बारे में :

प्रीमेनोपोज़: प्रीमेनोपोज़ की अवस्था तक आते आते महिला में गर्भ धारण करने की क्षमता रहती है। प्रीमेनोपोज़ अवस्था महिला की प्रथम मासिक धर्म चक्र से लेकर मासिक धर्म चक्र के आखिरी अवधि तक की अवस्था को कहते हैं।

पेरीमेनोपोज़: पेरीमेनोपोज़, मेनोपोज़ के पहले की अवस्था कहलाती हैं। इसकी अवधि दो से दस साल तक हो सकती है, इस अवस्था में महिला का मासिक धर्म चक्र धीरे-धीरे बंद होने लगता है। यह अवस्था अधिकाशतः 35 से 50 साल के बीच में आ सकती है। इस अवस्था का कारण हॉर्मोन्स में होने वाला बदलाव होता है।

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मेनोपोज़: मेनोपोज़ या रजोनिवृत्ति की अवस्था में हॉर्मोन्स का उत्पादन बिल्कुल बंद हो जाता है। जिसकी वजह से ओवरी प्रजनन की क्षमता बिल्कुल खो देती है। अतः इस अवस्था में महिलाएं गर्वधारण नहीं कर पाती है।

पोस्ट मेनोपोज़: पोस्ट मेनोपोज़, मेनोपोज़ हो जाने के बाद की अवस्था कहलाती है। यह अवस्था महिलाओं में मासिक धर्म चक्र बंद हो जाने के बाद,  जीवनभर के लिए होती है।

रिपोर्ट: डॉ.हिमानी