Home फिटनेसयोग क्या हैं योग मुद्राएं एवं योग आसन

क्या हैं योग मुद्राएं एवं योग आसन

by Darshana Bhawsar
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योग प्रकृति द्वारा दिया एक ऐसा वरदान है जिससे कई प्रकार के उपचार संभव है जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। योग से शारीरिक और मानसिक स्फूर्ति बनी रहती है। योग को करते समय कुछ विशेष योग आसन और योग मुद्राएं आना अनिवार्य हैं। अगर इन्हें सही विधि और नियम के साथ किया जाये तो योग के द्वारा पूर्ण रूप से स्वयं को स्वस्थ रखा जा सकता है।

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योग मुद्राएं:

योग मुद्राएं कई प्रकार की होती है और अलग-अलग मुद्रा का असर शरीर पर अलग प्रकार से होता है। इन मुद्राओं में ध्यान को केन्द्रित किया जाता है जिससे मस्तिष्क में शांति का संचार होता है। योग मुद्राएं आयुर्वेदिक सिद्धांत पर आधारित होती है। मुद्रा में पूर्ण शरीर और हाथों का विशेष महत्व होता है। दो मुद्राओं पर विशेष ग्रन्थ लिखे गए हैं: हठ योग प्रदीपिका और घेरन्ड संहिता। हठ योग प्रदीपिका  के अंतर्गत 10 मुद्राएं है एवं घेरन्ड संहिता के अंतर्गत 25 मुद्राओं का व्याख्यान है।

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विशेष योग मुद्राएं:

1.चिन मुद्रा

2. चिन्मय मुद्रा

3. आदि मुद्रा

4. ब्रह्म मुद्रा

चिन मुद्रा:

 चिन मुद्रा का विशेष महत्व है एवं इसके विशेष लाभ हैं एकाग्रता, स्मरण शक्ति, अनिद्रा दूर करना, कमर दर्द में आराम, शारीरिक उर्जा में वृद्धि इत्यादि। इस आसन को करने की एक विशेष विधि है:

1.सबसे पहले अपने दोनों हाथों की तर्जनी व अंगूठे को आपस में हलके से स्पर्श करें।

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2. दोनों हाथों को अपनी जंघा पर रखें। साथ ही अपनी हथेलियों को आकाश तरफ रखें।

3. अब अपना ध्यान सांसों के प्रवाह व शरीर पर प्रभाव पर केन्द्रित करें।

4. इस मुद्रा को कम से कम 10 मिनिट तक करें।

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चिन्मय मुद्रा:

चिन्मय मुद्रा के कई फायदे हैं। जैसे: शरीर में सुरजा प्रवाह को सुचरित करना, पाचन शक्ति को मजबूत करना इत्यादि। चिन्मय मुद्रा विधि इस प्रकार है:

1. दोनों हाथों की अंगूठा और तर्जनी को एक दूसरे से स्पर्श कराएं। बाकि उँगलियों को हथेलिओं की तरफ मोड़ लें।

2. हाथों को जाँघोपर रखें। और लम्बी सांस लें।

3. अब साँस के प्रवाह और शरीर पर सांस के प्रवाह को महसूस करें।

4. इस योग मुद्रा को कम से कम 10 मिनिट तक करें।

आदि मुद्रा:

अन्य योग मुद्राओं की तरह ही आदि मुद्रा के भी कई फायदे हैं जैसे तंत्रिका तंत्र में आराम, ख़र्राटों में आराम, फेफड़ों की क्षमता को बढाती है। इस प्रकार से इस योग मुद्रा के कई फायदे हैं। विधि:

1.सबसे पहले अंगूठे को कनिष्ठा के आधार पररख लीजिये एवं अन्य उँगलियों को अंगूठे के ऊपर से मोड़ लें एवं मुट्ठी बना लें।

2.दोनों हाथों की हथेलियों को दोनों जाँघो पर आकाश की ओर रखें और लम्बी सांस लें।

3. सांस के प्रवाह और शरीर पर इसके प्रभाव पर ध्यान केन्द्रित करें।

4. इस योग मुद्रा को कम से कम 10 मिनिट के लिए करें।

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ब्रह्म मुद्रा:

इस मुद्रा के कई लाभ हैं जैसे स्थूलता दूर करना, मानसिक तनाव कम करना, शरीर में स्फूर्ति लाना इत्यादि। विधि:

1. सबसे पहले अंगूठे को कनिष्ठा के आधार पररख लीजिये एवं अन्य उँगलियों को अंगूठे के ऊपर से मोड़ लें एवं मुट्ठी बना लें।

2. मुठ्ठी के जोड़ों को एक दूसरे से जोड़कर नाभि के पास लायें। एवं हथेलियों को आकाश की ओररखें।

3. सांस के प्रवाह और शरीर पर इसके प्रभाव पर ध्यान केन्द्रित करें।

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4. इस योग मुद्रा को कम से कम 10 मिनिट के लिए करें।

ये सभी योग मुद्राएं अगर आप सुबह और खुले वातावरण में करें तो उससे फायदा ज्यादा होता है। अब अगर योग आसन की बात की जाये तो यह कई प्रकार से किये जाते हैं एवं इनके फायदे अनगिनत हैं। कुछ मुद्राएं, योग आसन के दौरान बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। योग आसन से कई प्रकार की बिमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है और कई बिमारियों को जड़ से भी नष्ट किया जा सकता है। इसलिए कहा जाता है कि योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

यहाँ पर कुछ योग आसन के बारे में जानेंगे जो शरीर के लिए बहु रूप से उत्तम है:

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अर्ध चन्द्रासन:

यह योग आसन शरीर के लिए बहुत लाभदायक है। इस आसन के दौरान शरीर से सीधे खड़े होकर एवं दोनों हाथों को ऊपर उठाया जाता है। और अर्ध चन्द्र की स्थिति में शरीर को घुमाया जाता है। यह पुरे शरीर के लिए लाभदायक है।

भुजंग आसन:

यह भी योग आसन का एक विशेष और महत्वपूर्ण प्रकार है जो रीढ़ की हड्डी के लिए बहुत लाभकारी होता है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जायें, और सांस को अन्दर की तरफ लें। हथेलियों को कंधे के नीचे जमीन पर रखें। फिर धीरे-धीरे कन्धों को जमीन से हथेलियों के बल धीरे -धीरे ऊपर की और उठाएं। सिर एवं कन्धों को असमान की तरफ रखें। और धीरे—धीरे सांस को बाहर छोडें। इसी योग आसन को कम से कम 5 बार करें।

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बाल आसन:

शरीर को संतुलित करने एवं रक्त संचार को सामान्य करने के लिए यह आसन एक विशेष आसन है। सबसे पहले रीढ़ की हड्डी को सीधा करते हुए घुटने के बल बैठ जायें। अब अन्दर की तरफ सांस लें और दोनों हाथों को सीधा सर के ऊपर उठा लें। अब सांस को बाहर की तरफ छोड़ते हुए आगे की और झुकें और हाथों की हथेलियों को जमीन पर रखें। इसके साथ ही सिर को भी जमीन पर टिका लें। इस ही तरह इस आसन को कम से कम 5 बार करें।

प्रणाम आसन:

दिमाग की शांति और स्वस्थ्य शरीर के लिए यह योग आसन बहुत ही उम्दा माना जाता है। इस आसन के दौरान सीधा खड़े हो जीये एवं रीढ़ की हड्डी को भी सीधा रखें। साथ ही अपने दोनों पंजे एक साथ जोड़ लें एवं पूरा वजन अपने पंजों पर रखें। अपनी छाती को फुलायें एवं अपने कंधे ढीले छोड़ दें। दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम की स्थिति में खड़े हो जाएं। इस तरह से इसी अवस्था में 5 मिनिट खड़े रहें। इस दौरान कुछ सेकंड के सांस को अन्दर रोकें एवं फिर बाहर छोडें।

इस प्रकार योग मुद्राएं एवं योग आसन का बहुत महत्व है।

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