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एचआईवी और एड्स को लेकर हमारे समाज में कई तरह की बातें फैली हुई है। इस बीमारी का नाम सुनते ही लोग अपने दिल और दिमाग में अलग-अलग तरह की बात सोचने लगते हैं। अगर उनके आस-पास के व्यक्ति को यह बीमारी हो जाए तो उससे दूर भागने लगते हैं। ऐसे में आपको इस बीमारी के अंतर के बारे में जानने की जरूरत है।

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क्या है अंतर

एचआईवी का मतलब होता है ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस, जो कि एक वायरस है। एड्स, पूरा नाम एक्वायर्ड इम्‍यूनो-डिफिशिएंसी सिंड्रोम, एक मेडिकल सिंड्रोम है। एचआईवी वायरस प्रतिरक्षा प्रणाली की टी कोशिकाओं पर हमला करता है जबकि एड्स, एचआईवी संक्रमण के बाद सिंड्रोम के रुप में प्रकट होती है।

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एचआईवी संक्रमित होने का मतलब एड्स नहीं

एक व्यक्ति अगर एचआईवी संक्रमित है तो जरूरी नहीं कि उसे एड्स हो। एचआईवी से संक्रमित अधिकतर व्यक्ति प्रोपर मेडिकेशन टर्म्स फॉलो कर सामान्य जिंदगी जी सकते हैं। इसका मतलब ये नहीं की सभी एचआईवी संक्रमित लोगों को एड्स नहीं। एचआईवी संक्रमित व्यक्ति को एड्स हो सकता है लेकिन हर एड्स से पीड़ित लोग जरूरी नहीं कि एचआईवी से संक्रमित हों।

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एड्स के लक्षण और संकेत

एड्स पीड़ित के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होने से संक्रमण, यानी आम सर्दी जुकाम से ले कर क्षय रोग जैसे रोग बहुत ही आसानी से हो जाते हैं और उनका इलाज करना कठिन हो जाता हैं। एड्स की शुरुआती स्‍टेज में इसका पता नहीं चल पाता है और व्‍यक्ति को इलाज करवाने में देर हो जाती है। इसीलिए इसके शुरूआती लक्षणों के बारे में पता होना जरूरी है।

सूखी खांसी

सूखी खांसी होना एड्स के लक्षणों में शामिल है। अगर किसी को खांसी नहीं हैं लेकिन मुंह में हमेशा कफ आता रहता है। मुंह का स्‍वाद खराब रहता है। इसमें से कोई भी लक्षण लगने पर एच आई वी टेस्‍ट जरूर करवाएं।

मसल्‍स में खिचाव

भारी काम या शारीरिक श्रम किए बिना भी अगर किसी को मसल्‍स में हमेशा तनाव और अकड़न का एहसास होता है। तो यह एड्स का लक्षण होता है। तुरंत अपने चिकित्‍सक के पास जाएं।