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वास्तु टिप्स से बनाये अपना घर सकारात्मक

by Darshana Bhawsar
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हर व्यक्ति की अभिलाषा होती है कि उसके घर में हमेशा खुशियाँ फैली रहे और सकारात्मक ऊर्जा रहे। लेकिन कई बार घर का वास्तु सही नहीं होने का कारण घर में क्लेश एवं कई प्रकार की परेशानियाँ होती है। पहले के समय में महल और मंदिरों के निर्माण के लिए इस प्राचीन विज्ञान वास्तु शास्त्र का प्रयोग किया जाता था लेकिन सामान्य लोग अपने घर बनाने के लिए इसका प्रयोग नहीं करते थे। अब फिर से वही समय आ गया है जब लोग इमारतों के निर्माण से पहले वास्तु शास्त्री की सहायता लेते हैं और अपने भवन का निर्माण वास्तु शास्त्र के अनुसार करवाना चाहते हैं और करवाते भी हैं।

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धीरे-धीरे लोगों का वास्तु विज्ञान पर विश्वास बड़ता जा रहा है। यह कोई जादू नहीं है यह सिर्फ एक विज्ञान है जिसकी सहायता से यह दिशा अनुमान लगाया जाता है और भवन में कौन सी चीज़ कहाँ होना चाहिए एवं कौन सा कक्ष कहाँ होना चाहिए इसका फैसला किया जाता है। इसके लिए भी शिक्षा ली जा जाती है ऐसे ही कोई भी व्यक्ति इसके बारे में नहीं बता सकता।

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  • वास्तु के फायदे:

वास्तु के अनगिनत फायदे हैं। जिन्हें शायद उँगलियों पर नहीं गिना जा सकता। आप खुद ही अनुमान लगा सकते हैं जो विज्ञान कई हजार वर्षों से चला आ रहा है उसमें कुछ न कुछ विशेषता जरूर होगी।

  • धन वृद्धि में सहायक:

अगर घर का वास्तु सही हो तो घर में धन और संपत्ति की कभी कमी नहीं होती। वास्तु शास्त्र धन में वृद्धि करने में सहायक माना जाता है, कुबेर और लक्ष्मी की कृपा हमेशा घर में बनी रहती है। कभी भी घर में धन धन्य  की कमी नहीं होती। हर व्यक्ति चाहता है कि उसके पास अपार संपत्ति हो और यह सपना वास्तु के अनुसार पूरा किया जाना संभव है।

  • सकारात्मक ऊर्जा:

कहते हैं अगर घर में सकारात्मक ऊर्जा हो तो घर में सुख शांति बनी रहती है। और घर में सुख शांति बनाये रखने के लिए लोग वास्तु का प्रयोग करते हैं। वास्तु शास्त्र में इतनी शक्ति होती है कि इसके अनुसार बनाये गए भवन में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती रहती है। जिससे व्यक्ति को कभी भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती। और अगर कोई परेशानी आती भी है तो बहुत ही जल्दी उस परेशानी से निजात मिल जाता है।

  • उन्नति में सहायक:

कई बार हम ये सोचते हैं कि इतनी मेहनत के बाद भी हमें मेहनत का फल क्यों नहीं मिलता तो इसकी वजह घर का गलत प्रकार से निर्माण भी हो सकता है। अगर घर सही दिशा में निर्मित हो या वास्तु के अनुसार निर्मित हो तो उन्नति होती है और कोई भी उस उन्नति को रोक नहीं सकता है। इसलिए कहा जाता है कि वास्तु उन्नति में सहायक होती है।

  • सुख शांति का वास होता है:

व्यक्ति सुख शांति के लिए हमेशा भगवान् के दरवाजे पर जाता है। जब भी किसी मंदिर का निर्माण किया जाता है तो वह वास्तु के अनुसार किया जाता है तभी उस जगह अपार सुख शांति होती है। अगर घर का निर्माण भी वास्तु के अनुसार किया जाये तो घर में भी सुख शांति निवास करने लगेगी। हर घर में सुख शांति की जरुरत होती है।

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  • वास्तु की कुछ विशेष बातें जिनसे घर में आती है सकारात्मक ऊर्जा:
  • रात में सिंक में झूठे बर्तन न छोड़ें:

हमेशा एक बात ध्यान रखना चाहिए कि रात को कभी भी सिंक में झूठे बर्तन न छोड़ें। चाहें तो वर्तन को कही एक स्थान पर एकत्रित करके रख दें या रात्त को ही साफ़ करके सोएं। और प्लेटफार्म भी कभी गन्दा नहीं छोड़ना चाहिए उसे साफ़ करके ही सोना चाहिए। यह बहुत ही जरुरी होता है।

  • बैडरूम में भगवान् की तस्वीर न लगाएं:

कुछ लोगों को भगवान् से इतना अधिक प्रेम होता है कि वे घर में हर जगह भगवान् की तस्वीर लगा लेते हैं। लेकिन हर जगह भगवान् की तस्वीर नहीं लगाना चाहिए। भगवान् की तस्वीर बैडरूम में तो बिल्कुल ही नहीं लगाना चाहिए। भगवन को हमेशा पूजा घर में रखना चाहिए और वहीँ उनकी देख रेख करना चाहिए।

  • कहीं भी नल से पानी नहीं टपकना चाहिए:

घर में अगर किसी भी नल से पानी टपकता है तो धन भी वैसे ही घर से बाहर निकलता है। इसलिए नल का पानी अगर टपक रहा है तो उस पानी का टपकना जल्दी से जल्दी बंद करवाएं। वास्तु के अनुसार ये बिल्कुल भी सही नहीं होता। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है।

  • मुख्य द्वार हमेशा साफ़ रखें:

घर का मुख्य द्वार हमेशा साफ़ सुथरा होना चाहिए। घर के सामने किसी भी प्रकार की गंदगी या नाला नहीं होना चाहिए। या बदबू नहीं होना चाहिए। घर में हमेशा सुगंध आती रहना चाहिए। मुख्यतः मुख्य द्वार पर सुगंध आती रहना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और लक्ष्मी घर में प्रवेश करती है।

  • वास्तु में दिशाओं का महत्व:

दिशाओं के ज्ञान को ही वास्तु शास्त्र कहा जाता है। और दिशाओं का वास्तु में बहुत ही अधिक महत्व होता है। और घर में क्या कहाँ निर्मित होना चाहिए वह भी दिशाओं के अनुसार ही चुना जाता है।

  • उत्तर दिशा:

वास्तु के अनुसार उत्तर दिशा में हमेशा खिड़की और दरवाजे बने हुए होना चाहिए। वाश वेसिन और घर की बालकनी भी इसी दिशा में होना शुभ माना जाता है। इस दिशा में वास्तु दोष होने से उन्नति में बाधा आती है इसके लिए घर की भूमि को थोड़ा ऊँचा करवाना चाहिए।

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  • दक्षिण दिशा:

वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा में खुलापन, शौचालय नहीं होना चाहिए। इस दिशा में भूमि पर भार रखा हुआ होना चाहिए इससे घर के सभी लोग निरोगी रहते हैं और घर में समृद्धि आती है। साथ ही इसी दिशा में तिजोरी होना चाहिए और उसमें धन रखने से धन में बढ़ोत्तरी होती है।

  • पूर्व दिशा:

पूर्व दिशा में सूर्योदय होता है और यह सबसे ऊर्जावान दिशा मानी जाती है। वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार और खिड़कियाँ इस दिशा में होनी चाहिए जिससे घर में सूरज की किरणे आ सकें और सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश कर सकें। यह दिशा कभी भी गन्दी नहीं होना चाहिए।

  • पश्चिम दिशा:

इस दिशा में वास्तु के अनुसार टॉयलेट और रसोई घर होना चाहिए। यह दिशा सफलता को दर्शाती है। इसलिए इस दिशा की भूमि भी जमीं से थोड़ी ऊँची उठी हुई होना चाहिए।

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ऐसे ही अलग-अलग दिशा अनुसार ईमारत एवं भवन का निर्माण किया जाता है। और वास्तु के अनुसार अगर इनका निर्माण किया जाता है तो ये सुबह फलदायी होती हैं। इस तरह से वास्तु टिप्स अपनाकर कोई भी अपने घर को सकारात्मक बना सकता है। वास्तु विज्ञान बहुत ही जाना माना शास्त्र है जो कई वर्षों से अस्तित्व में है।

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