Home हेल्थदिल की समस्याएं दिल की बीमारी को जड़ से खत्म करता है योग

दिल की बीमारी को जड़ से खत्म करता है योग

by Mahima
Woman practicing yoga

विश्वभर में हृदय रोग से पीड़ित लोगों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। इस रोग के लिए कई लोग दवाईयां भी लेते हैं। लेकिन इस रोग को खत्म करने का सबसे अच्छा और लाभदायक तरीका है योग। योग के दैनिक जीवन में प्रयोग से हृदय रोग से बचना संभव है। चयापचप हमारे शारीरिक परिश्रम और दैनिक जीवन में प्राप्त भोजन पर निर्भर करता है। आधुनिक जीवन में शारीरिक परिश्रम कम और भोजन में वसा, प्रोटीन व कार्बोज की मात्रा बढ़ती जा रही है।

इसे भी पढ़ें: इन आसन की मदद से करें अपने मेटाबॉलिज्म को संतुलित

हमारे देश में दिल के दौरे की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। हर साल करीब 25 लाख लोग दिल के दौरे के कारण असामयिक मौत के मुंह में चले जाते हैं। हृदय रोगों की संख्या के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है लोगों का अपनी सेहत को हल्के में लेना। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने काम को ज्यादा प्रथामिकता देते हैं। लेकिन जरा सोचिए अगर आप स्वस्थ नहीं रहेंगे तो काम कैसे कर पाएंगे। ऐसे में अगर आप थोड़ा सा समय योग के लिए निकालें तो आप अपने दिल को चुस्त दुरुस्त रख पाएंगे। आईए जानें हृदय रोग में कौन से कौन योग करना चाहिए।

ताड़ासन

पैरों को एक साथ मिलाकर खड़े हो जाएं। अब पंजों पर जोर देते हुए धीरे-धीरे ऊपर उठें एवं दोनों हाथों को मिलाकर ऊपर की ओर तान दें। इस अवस्था में पूरे शरीर का भार पैरों के पंजों पर होगा और पूरे शरीर को सीधा ऊपर की ओर तानेंगे। इसे करते समय पेट को अन्दर की ओर खींचना चाहिए तथा सीना बाहर की ओर तना हुआ रहना चाहिए। कमर-गर्दन बिल्कुल सीधी रखें। इस आसन का अभ्यास कम से कम 5 बार अवश्य करें।

इसे भी पढ़ें: किस प्रकार से करें पद्मासन योग

स्वस्तिकासन

दरी या कंबल बिछाकर बैठ जाएं। इसके बाद दाएं पैर को घुटनों से मोड़कर सामान्य स्थिति में बाएं पैर के घुटने के बीच दबाकर रखें और बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाएं पैर की पिण्डली पर रखें। फिर दोनों हाथ को दोनों घुटनों पर रखकर ज्ञान मुद्रा बनाएं। ज्ञान मुद्रा के लिए तीन अंगुलियों को खोलकर तथा अंगूठे व कनिष्का को मिलाकर रखें। अब अपनी दृष्टि को नाक के अगले भाग पर स्थिर कर मन को एकाग्र करें। अब 10 मिनट तक इस अवस्था में बैठें। इस योग से एकाग्रता बढती है साथ ही हृदय का तनाव कम होता है।

सर्वांगासन

इस आसन में पहले पीठ के बल सीधा लेट जाएं फिर दोनों पैरों को मिलाएं, हाथों की हथेलियों को दोनों ओर जमीन से सटाकर रखें। अब सांस अन्दर भरते हुए आवश्यकतानुसार हाथों की सहायता से पैरों को धीरे-धीरे 30 डिग्री, फिर 60 डिग्री और अन्त में 90 डिग्री तक उठाएं। इससे आपकी पाचन शक्ति ठीक रहती है और रक्त का शुद्धिकरण होता है।

You may also like

Leave a Comment

* By using this form you agree with the storage and handling of your data by this website.