Home हेल्थ हल्दी वाला दूध किस प्रकार आपके फेफड़ों को जहरीली हवा से बचता है

हल्दी वाला दूध किस प्रकार आपके फेफड़ों को जहरीली हवा से बचता है

by Dr. Himani Singh
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दिवाली के बाद से ही दिल्ली और एनसीआर के लोग  धुंध और धूल के घने कोहरे से जूझ रहे हैं क्योंकि यहाँ वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी में  पहुंच गया है,  जिसके चलते लोगो को  गंभीर स्वास्थ्य  समस्याओं के जोखिम  से गुजरना पड़ रहा है। जिस हवा से इस शहर के लोग सांस ले रहे हैं वहाँ वायु प्रदूषण इस  खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है कि जो लोग  सांस से सम्बंधित समस्याओं से ग्रषित नहीं भी थे वह लोग भी अस्पताल के आपातकालीन कमरों में पहुंच रहे हैं।

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वायु प्रदूषण निगरानी एजेंसी SAFAR के अनुसार, दिल्ली, एनसीआर  में कई स्थानों पर हवा की गुणवत्ता, गंभीर ’दर्ज की गई  है  , जो कि शहर में समग्र AQI के आधार पर आधारित की जाती है। डॉक्टरों ने  लोगों को सुबह और शाम की सैर से बचने की सलाह दी है  क्योंकि इस अवधि में प्रदूषकों की सांद्रता सबसे अधिक  देखि जाती है इसके साथ ही  कार्डियो वर्कआउट से बचने की भी सलाह दी गई है क्योंकि कार्डियो वर्कआउट करने से शरीर को अधिक ऑक्सीजन का  प्रयोग करना पड़ता है जिसके चलते  श्वसन  से संबंधी बीमारियों की संभावना बढ़ने की उम्मीद और अधिक हो जाती है।

स्मॉग का स्वास्थ्य पर असर :

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इस प्रदूषण से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का एक स्पेक्ट्रम है, जो एलर्जी और श्वसन स्थितियों से संबंधित होता है, जिसमें अनेकों स्वास्थ्य सम्बन्धित समस्याएं जैसे अस्थमा, फेफड़े का  सही से कार्य न कर पाना और कैंसर  जैसी बिमारियों का बढ़ना शामिल होता है। स्मॉग और वायु प्रदूषण का छोटे  बच्चों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता हैं,  जिनमें से 4.4 मिलियन बच्चे  पहले से ही अपरिवर्तनीय फेफड़ों की क्षति से पीड़ित हैं। स्मॉग अनेक स्वास्थ्य समस्यायों को जन्म देने के साथ साथ पौधों और फसलों के विकास को  भी नुकसान पहुंचाता है।

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आइये जानते है स्मॉग के परिणामस्वरूप किस प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं :

1.सीने में जलन:

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स्मॉग में उपस्थित जमीनी ओजोन हमारे श्वसन तंत्र को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है, जिसके परिणामस्वरूप  खांसी और जलन जैसी समस्याएं उत्पन्न  हो सकती है। अधिक लम्बी अवधि  तक इसके  संपर्क में  रहने से  यह फेफड़ों के संक्रमण को जन्म दे सकती है।

2. अस्थमा / ब्रोंकाइटिस :

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अस्थमा तथा ब्रोंकाइटिस से पीड़ित व्यक्तियों के लिए स्मॉग और बढ़ते वायु प्रदूषण में  श्वसन समस्याओं अधिक गुजरना पड़ता है  क्योकि जब स्मॉग उच्च स्तर पर पहुंच जाता है तब इन  मरीजों को लगातार और  अधिक गंभीर अस्थमा  के दौरे पड़ने की सम्भाना रहती है।  बहुत से  मामलों में, इन रोगों के विकास का जोखिम  काफी हद तक  बढ़ता हुआ देखा गया है।

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3. जुकाम और आंखों में जलन:

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स्मॉग में बहुत समय तक रहने के कारण  व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो जाती है और आंखों में जलन  होने लगती है।प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण शरीर कमजोर पड़  जाता है जिसके वजह से व्यक्ति बार बार सर्दी जुकाम की चपेट में आ जाता है।

4. समय से पहले मृत्यु दर में बढ़ोतरी :

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आरआईसीई विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार यह बात सामने आई है कि जमीनी स्तर के ओजोन और पीएम5 के कारण लोगो में समय से पहले  मृत्यु दर में बढ़ोतरी देखी गयी है।

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इसके अतिरिक्त कुछ अन्य समस्याएं होने की भी सम्भाना हो सकती है जैसे :

1. प्राकृतिक तत्व विटामिन डी का उत्पादन कम होगा जिससे लोगों में रिकेट्स पैदा होने की सम्भावना बढ़ सकती है।

2. सीने में जलन, खांसी, निमोनिया और गले के कैंसर  और फेफड़े के कैंसर जैसी फुफ्फुसीय बीमारी  बढ़ सकती है।

3. असामान्य रूप से थकान, सिरदर्द, शरीर में कम ऊर्जा, घरघराहट महसूस होना आदि हो सकता है।

4. यह फसलों और जंगलों को भारी नुकसान पहुँचता है मुख्य रूप से सोयाबीन, गेहूं, टमाटर, मूंगफली और कपास  जैसी फसलें स्मॉग के संपर्क में आने पर संक्रमण का शिकार हो जाती हैं।

5. स्मॉग के संपर्क में आने पर विभिन्न जानवरों की प्रजातियां भी इससे प्रभावित होती हैं।

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 नोट : अतः  अधिक  स्मॉग  और वायु प्रदूषण होने पर  बच्चों, वरिष्ठों और अस्थमा से पीड़ित लोगों को विशेष रूप से ध्यान रखना आवशयक हो जाता  है। अतः इन लोगो को  समान्य लोगो की तुलना में  उचित सावधानी बरतनी चाहिए।

यदि आप  सभी कुछ हद तक  सावधानी बरते तो काफी हद तक आप अपने  फेफड़ों को प्रदूषण के  प्रभाव से बचा सकते है। दिल्ली की जहरीली हवा से निपटने और स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने में आपकी मदद करने के लिए, कुछ  ऐसे घरेलू उपचारों की एक सूची तैयार की गई है जो  बहुत अधिक प्रभावी होने के साथ-साथ तैयार करने में भी बहुत ही  आसान होती हैं। ये उपाय आपके फेफड़ों को साफ करेंगे, पाचन और प्रतिरक्षा में सुधार करेंगे और आपके शरीर को डीटॉक्सिफाय करने में मदद करेंगे। ऐसे में  आपको कुछ प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट पोषक तत्वों से परिचित  होना बहुत ही आवशयक है जो आपके शरीर को इन समस्याओं से  निपटने में मदद  प्रदान करते हैं। प्रदूषित वायु जिसमें  हम साँस लेते हैं, वह ओजोन, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, पार्टिकुलेट मैटर, डीजल निकास कणों आदि को हमारे फेफड़ों में इंजेक्ट करती है। हमारे फेफड़ों के अस्तर में मौजूद सुरक्षात्मक एंटीऑक्सिडेंट इन हानिकारक तत्वों से लड़ते हैं, परन्तु जब ये सुरक्षात्मक एंटीऑक्सिडेंट हमारे  शरीर में कम होने लगते हैं तव हमारा शरीर कमजोर पड़ने लगता है और बिमारियों से ग्रषित हो जाता है। ऐसे में हम कुछ लाभकारी खाद्य पदार्थों के सेवन से अपने शरीर में एंटीऑक्सिडेंट्स के लेवल को मैनटैंट रख सकते हैं।

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यहाँ कुछ बताये गए खाद्य पदार्थ वायु प्रदूषण का मुकाबला करने में आपकी मदद कर सकते हैं:

1. हल्दी :

हल्दी अपने  एंटी- इन्फ्लामैंट्री गुणों के लिए  जानी जाती  है, और यह एंटी- इन्फ्लामैंट्री गुण करक्यूमिन यौगिक उपस्थित होने के कारण होता है। यह फेफड़ों को प्रदूषकों के विषाक्त प्रभाव से बचाने में मदद करता है। वायु प्रदूषण से होने वाली खांसी और फेफड़ों में जलन से राहत पाने के लिए हल्दी और घी के मिश्रण का सेवन बहुत लाभकारी होता है। हल्दी को गुड़ और मक्खन के साथ मिलाकर इसका पेस्ट तैयार करें और फिर इसका सेवन करने से भी बहुत लाभ होता है। इन सब के अतिरिक्त  गर्म दूध के साथ हल्दी का  नियमित  सेवन  बहुत से लाभ प्रदान करता है।

हल्दी स्मॉग के नकारात्मक प्रभावों से लड़ने में कैसे मदद करती है:

करक्यूमिन, एक पॉलीफेनोल है जो  हल्दी का मुख्य जिम्मेदार सक्रिय घटक है, जो बहुत से चिकित्सीय प्रभावों के लिए जाना जाता है, इसमें  विरोधी भड़काऊ, एंटी-एलर्जी, एंटीऑक्सिडेंट और इम्युनोमोड्यूलेशन गुण पाए जाते हैं। करक्यूमिन ब्रोन्कियल नलियों की रुकावटों को रोकने में मदद करता है। करक्यूमिन ऊपरी श्वसन पथ के संक्रमण से राहत  प्रदान करने में भी मदद करता है।

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करक्यूमिन के कुछ स्वास्थ्य लाभ हैं:

  • हल्दी के सेवन से वायुमार्ग की सूजन  कम होती  है और भड़काऊ रसायनों का  उत्पादन भी कम होता है।
  • यह ऑक्सीडेटिव तनाव से निपटने में मदद प्रदान करता है।
  • कर्क्यूमिन एक एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करते हुए  मुक्त कणों को साफ़  करने का काम करता है और साथ ही एंटीऑक्सिडेंट एंजाइमों की एकाग्रता को बढ़ाता है, जिससे ऑक्सीडेटिव तनाव कम हो जाता है।
  • दूध के साथ हल्दी के सेवन से श्वसन पथ की रुकावट  दूर हो जाती है, सूजन  भी  कम होती है ।
  • यह ब्रोंकाइटिस से जुड़े माइक्रोबियल संक्रमण को दूर करने का सबसे आसान और घरेलु उपाय माना जाता है, साथ ही इसके सेवन से प्रतिरक्षा प्रणाली अधिक  विकसित  होती है।

हालाँकि, आप अपने भोजन या दूध में हल्दी के सेवन से  पूरी तरह से लाभ नहीं उठा सकते हैं, ऐसे में कुछ और अन्य खाद्यपदार्थ का सेवन आपको लाभ प्रदान कर सकता है जैसे कि :

2.पालक:

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पालक में बीटा कैरोटीन, ज़ेक्सैंथिन, ल्यूटिन और क्लोरोफिल उपस्थित होने के कारण नियमित रूप से इसका सेवन आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में मददगार होता हैं। पालक का हरा रंग क्लोरोफिल के कारण होता है, जो कि एंटी-म्यूटाजेनिक गुणों के साथ एक मजबूत एंटीऑक्सिडेंट है। पालक में  एंटी-कैंसर गुण पाए  जाते  हैं, जो की खासकर फेफड़ों पर अधिक सक्रीय रूप से काम करता है। इसके साथ ही पालक मैग्नीशियम  समृद्ध  मात्रा में पाया जाता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूती प्रदान करता है जिसके कारण आप  स्मॉग से लड़ने के लिए  अच्छे रूप से तैयार हो सकते है। मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली फेफड़ों को आराम और स्मॉग के कारण उन्हें होने वाले तनाव  से राहत दिलाती हैं। इसके अलावा, यह फेफड़ों में हवा की अभिव्यक्ति में भी  मदद प्रदान करता है।

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3.अलसी के बीज :

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अलसी के बीज में ओमेगा -3 फैटी एसिड और फाइटोएस्ट्रोजेन का उच्च स्तर पाया जाता है। ओमेगा -3 फैटी एसिड आपके कार्डियोवास्कुलर सिस्टम और स्मॉग के प्रभाव को कम करने में  बहुत ही सहायक सिद्ध होता है, दूसरी ओर, फाइटोएस्ट्रोजेन में एंटीऑक्सिडेंट गुण पाए जाते  हैं, जो फेफड़ों में अस्थमा और अन्य एलर्जी प्रतिक्रियाओं  को कम करने में मदद  प्रदान करते हैं। आप अलसी को भून कर और फिर उसको पीस कर अपने भोजन में, सलाद में , स्मूदी में,  ले  सकते हैं या इसे ऐसे ही साबुत भी खा सकते है। ओमेगा -3 फैटी एसिड की अधिक मात्रा वाले अन्य खाद्य पदार्थ अखरोट, अंडे, मछली और सोयाबीन का सेवन भी बहुत अधिक लाभ दे सकता हैं।

4. जैतून का तेल:

जैतून का तेल

जैतून का तेल अल्फा-टोकोफेरोल और विटामिन ई  से भरपूर होता  है, जो कि  फेफड़ों के कार्य में सुधार करता है। जैतून के तेल में उपस्थित  फैटी एसिड सूजन को कम करने  में लाभकारी होता हैं। जैतून के तेल  का अधिकतम लाभ लेने के  लिए अच्छा तरीका तेल को सीधा निगलना होता है, अतः आप रोज  एक चम्मच जैतून का तेल सीधा पी सकते हैं , क्योंकि खाना पकाने के दौरान गर्मी के संपर्क में  आते ही इसकी रासायनिक संरचना में बदलाव आ सकते हैं  जिसके चलते  इसके कुछ स्वास्थ्य गुण खो सकते हैं।

5. घी:

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एक चम्मच गर्म घी आप नियमित रूप से अपने भोजन में शामिल कर सकते है , जैसे कि चपातियां और सब्जी के साथ। इसके आलावा कुछ गर्म घी का उपयोग आप  अपने नथुने  में डालने के लिए  और पैरों की मालिश  के लिए भी प्रयोग कर सकते हैं।  विषेशज्ञों द्वारा यह  दावा किया जाता है कि घी का प्रयोग वायु  प्रदूषकों के दुष्प्रभाव को कम करने में लाभकारी होता है।

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नोट : इस आर्टिकिल में  उल्लिखित सुझाव  केवल सामान्य सूचना उद्देश्यों के लिए हैं। यदि आपके पास किसी भी चिकित्सा मामले से जुड़े  कोई विशिष्ट प्रश्न हैं, तो  अपने चिकित्सक या एक पेशेवर स्वास्थ्य सेवा अधिकारी से  परामर्श लेना  न भूलें ।

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