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पढ़ें एचआईवी और एड्स के बीच का अंतर

by Mahima
HIV And AIDS

एचआईवी और एड्स जैसी बीमारी के कल्पना मात्र से ही लोग डर उठते हैं, दोनों ही बीमारी खतरनाक होती है जिनका शुरूआती अवस्था में ही पता चल जाये तो इनको आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। अधिकांश लोग यह मानते है कि एचआईवी और एड्स दोनों एक ही बीमारी है परन्तु ऐसा नहीं है दोनों ही अलग अलग बीमारी होती है। एचआईवी एक वायरस है इस वायरस की पूरी तरह से शरीर में फ़ैल जाने के बाद एड्स नामक बीमारी जन्म लेती है।

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आइये जानते हैं एचआईवी और एड्स के बीच में क्या अंतर है ?

एचआईवी एक वायरस है जो ह्यूमन इम्युनोडिफीसिअन्सी वायरस के नाम से जाना जाता हैं। यह वायरस केवल मनुष्यों को संक्रमित करता है और इम्यून सिस्टम पर हमला करता है। दूसरी ओर एड्स एक सिंड्रोम है। एचआईवी से संक्रमित होने के कारण व्यक्ति एड्स का शिकार बनता है, जो एक एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम है। एड्स तब विकसित होता है जब एचआईवी वायरस इम्यून सिस्टम को पूरी तरह से नुकसान पहुंचा चुका होता है।

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एचआईवी प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करके, टी लिम्फोसाइट्स नामक श्वेत रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर मानव शरीर को प्रभावित करता है, जो मुख्य रूप से रोगाणुओं और रोगों से लड़ने के लिए जिम्मेदार होते हैं। एचआईवी वायरस द्वारा शरीर की कोशिकाओं के प्रभावित होने के बाद, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गिरती चली जाती है जिससे हमारा शरीर बिमारियों से हमारी रक्षा करने में असमर्थ हो जाता है। दूसरी तरफ एचआईवी इंफेक्शन की आखिरी स्टेज में शरीर का इम्यून सिस्टम पूरी तरह से फेल हो जाने पर यह बीमारी एड्स में बदल जाती है। एड्स की वजह से वजन कम होना, सिरदर्द के साथ अन्य शारीरिक और मानसिक समस्याएं होने लगती है। एड्स से ग्रसित व्यक्ति को किसी भी तरह के संक्रमण हो सकते हैं क्योंकि इम्यून सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका होता है।

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एक व्यक्ति अगर एचआईवी संक्रमित है तो जरूरी नहीं कि उसे एड्स हो। एचआईवी सक्रमण का पता चलने पर इसको मेडिटेसन तथा अन्य दवाओं द्वारा नियत्रित्र किया जा सकता है जिससे एचआईवी ग्रसित व्यक्ति सामान्य जिंदगी जी सकते हैं। परन्तु इसका तात्पर्य यह बिलकुल नहीं की सभी एचआईवी संक्रमित लोगों को एड्स नहीं हो सकता। एचआईवी संक्रमित व्यक्ति को एड्स हो सकता है लेकिन हर एड्स से पीड़ित लोग जरूरी नहीं कि एचआईवी से संक्रमित हों।
एचआईवी एक इंसान से दूसरे इंसान में फ़ैल सकता है लेकिन एड्स नहीं। इंटरकोर्स, संक्रमित खून और इंजेक्शन से एचआईवी ट्रांसमिट होकर एड्स का रूप लेता है जबकि एड्स इन सभी से ट्रांसमिट नहीं होता है।

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नार्मल ब्लड टस्ट, स्लाइवा टेस्ट और बॉडी में मौजूद एंटीजन्स का टेस्ट कर पता किया जा सकता है एचआईवी संक्रमण है या नहीं, साथ ही इन टेस्टों का रिजल्ट कुछ हफ्तों के बाद ही पता लग जाता है। दूसरी और इम्युन सेल्स काउंट कर एड्स का पता किया जाता है। इस टेस्ट को सीडी4 सेल्स टेस्ट कहते हैं।

रिपोर्ट: डॉ.हिमानी


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