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गर्भावस्था से जुड़े कुछ आम मिथक

by Mahima
pregnancy myths

जैसे ही पता चलता है की आप गर्भवती हैं तो आपकी देखभाल परिवार द्वारा बढ़ जाती है। सभी लोग अलग अलग प्रकार की सलाह देते है जैसे की गर्भावस्था में ये करना चाहिए, ये नहीं करना चाहिए, ये खाना आपके और आपके होने वाले शिशु के लिए अच्छा है या अच्छा नहीं है। ऐसे में आपको बड़ी उलझन का सामना करना पड़ता है की कौन सी सलाह सही है और कौन सी सलाह सही नहीं है। प्रत्येक गर्भवती महिला की गर्भावस्था अलग अलग होती है अतः बेहतर होगा की लोगो की सलाह न मान कर अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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आइए हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे आम मिथक, जो गर्भावस्था के दौरान आपको सुनने को मिलती हैं:

मिथक 1: पीठ के बल सोना बच्चे को नुक्सान पंहुचा सकता है।

तथ्य: देखा जाये तो इस अवस्था में किसी भी प्रकार आप सो सकते है, होने वाले बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुँचता। परन्तु विशेषज्ञ प्रेगनेंट महिलाओं को बाईं करवट सोने की सलाह देते हैं, क्योंकि इससे यूटेरस और प्लासेंटा में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, जो की बच्चे के विकास के लिए अच्छा होता है।

मिथक 2: दीवार पर बच्चे की सुंदर सी तस्वीर लगाने से बच्चा भी सुंदर पैदा होगा।

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तथ्य: किसी भी नवजात का चेहरा उसके जेनेटिक गुणों पर निर्भर करता है। खूबसूरत बच्चों की तस्वीरें दीवार पर लगाने से प्रेगनेंट महिला पॉजिटिव महसूस करती है , जिससे उसकी सेहत पर अच्छा असर पड़ता है।

मिथक 3: अगर पेट का उभार ज्यादा है तो लड़की होगी और अगर उभार कम है तो लड़का होगा।
तथ्य: विशेषज्ञ मानते हैं कि इस का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं हैं। पेट का आकार और बनावट महिला के मसल साइज, स्ट्रक्चर, भ्रुण की अवस्था और उनके एब्डोमन के चारों ओर जमे फैट से तय होता है।

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मिथक 4: बेबी के सिर पर बहुत अधिक बाल होने की वजह से गर्भावस्था के दौरान मां को एसिटिडी की समस्या होती है।

तथ्य: यह पूरी तरह से गलत है। थर्ड सेमेस्टर में बच्चा सिर नीचे करके लेटा रहता है। मां को एसिटिडी उसके बढ़ते पेट के कारण होती है। यूट्रस बढ़ता है और आंतों को ऊपर की ओर ढकेलता है जिससे बदहजमी, एसिडिटी और कब्ज की समस्या होती है।

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रिपोर्ट: डॉ.हिमानी

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