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पूजा घर कैसा हो एवं पूजा घर एक महत्व

by Darshana Bhawsar
poja ghar

घर में पूजा घर की परंपरा सदियों से चली आ रही है। और पूजा घर का घर में होना बहुत जरुरी माना जाता है। यह वह स्थान होता है जहाँ पूर्ण रूप से सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है। वास्तु के अनुसार भी घर में पूजा घर होना ही चाहिए या भगवान् के लिए एक छोटा सा स्थान होना चाहिए जिसे पूजा घर कहा जा सकता है। जरुरी नहीं है कि पूजा घर बहुत ही बड़ा हो।

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अगर आपका घर छोटा है तो एक छोटा सा पूजा का स्थान भी आप बना सकते हैं। हम अग्गर इतिहास उठाकर देखें तो राजा महाराजा के महल में भी पूजा घर अलग से हुआ करता था जहाँ पूजा अर्चना की जाती थी और इसे मंदिर भी कहा जाता था। आज भी वही परंपरा चली आ रही है। पूजा घर जरुरी नहीं है कि बहुत बड़ा ही हो लेकिन साफ़ और सही दिशा में होना चाहिए। मन का भाव भी साफ़ होना बहुत जरुरी होता है। इसलिए कहा जाता है कि किसी को भी सम्मान देना हो तो दिल से देना चाहिए। ऐसे ही भगवान् का आदर करना है तो पहले मन से करना चाहिए। यही हमारे शास्त्रों में भी लिखा है।

जब भी वास्तु शास्त्र से अनुसार घर का नक्शा बनाया जाता है तब उसमें पूजा घर के लिए भी एक दिशा और स्थान निर्धारित किया जाता है। पूजा घर को बनाने के लिए भी कुछ सावधानियाँ बरतनी बहुत जरुरी होती हैं। पहले के समय में भी पूजा घर को लेकर कई सावधानियाँ बरती जाती थीं। और आज के समय में भी लोग पूजा घर को एक विशेष स्थान देते हैं और इसके प्रति काफी सचेत हैं। पूजा घर को बनाने के लिए दिशा पर जरूर ध्यान दिया जाता है जहाँ से घर में सुख, समृद्धि आये और सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करे।

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पूजा घर को घर का एक अहम् हिस्सा माना गया है। पूरे घर में यही एक ऐसी जगह होती है जहाँ व्यक्ति शांति का अनुभव करता है। पूजा घर किसी भी घर का सबसे साफ़ स्थान होता है जहाँ पर घर के सभी शुभ कार्य संपन्न किये जाते हैं। लेकिन पूजा घर हमेशा वास्तु के अनुसार ही बनवाना चाहिए। क्योंकि पूजा घर की दिशा एवं स्थान सही होना जरुरी है नहीं तो कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जब हम घर बनवाते हैं तो उसमें हम चाहते हैं कि हर कमरा सही जगह पर बने और सुन्दर हो। हमारी यही सोच पूजा घर के बारे में होना चाहिए। क्योंकि पूजा घर किसी भी घर का एक विशेष स्थान है इसे सुन्दर और खुशबू वाला होना चाहिए।

  • वास्तु के अनुसार कैसा हो पूजा घर:

वास्तु शास्त्र के अनुसार जब भी घर बनाया जाता है उसमें पूजा घर की दिशा और स्थान का भी नक्शा बनाया जाता है। आज हम देखेंगे कि वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर कैसा होना चाहिए। पूजा घर में हमेशा हलके रंगों का प्रयोग होना चाहिए। चुनरी वाले कागज से आप पूजा घर को सजा सकते हैं।

  • पूजा घर की दिशा:
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वास्तु शास्त्र के अनुसार सबसे पहले पूजा घर की दिशा को ध्यान में रखा जाता है कि किस दिशा में पूजा घर होना चाहिए जिससे सकारात्मक ऊर्जा घर में हमेशा प्रवेश करती रहे। ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व की दिशा पूजा घर के लिए सबसे उत्तम होती है। हमेशा पूजा घर इसी दिशा में बनवाना चाहिए। अब बात आती है कि पूजा करने की दिशा क्या होना चाहिए तो इससे जुडी अन्य बातें हम नीचे देखेंगे।

  • पूजा घर से जुडी कुछ विशेष बातें:
  • पूजा करने की दिशा:

पूजा करते समय आपका मुँह हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा कि तरफ होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि धन प्राप्ति के लिए उत्तर दिशा एवं ज्ञान प्राप्ति के लिए पूर्व दिशा शुभ होती है। इसलिए इन दिशाओं की तरफ मुँह करके ही  पूजा करना चाहिए। इसके चमत्कारिक लाभ होते हैं।  इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखें।

  • सुबह शाम की पूजा:

पूजा घर में भगवान् के समक्ष रोज सुबह एवं शाम दीपक लगाना चाहिए। सुबह शाम दीपक लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और सुख शांति बनी रहती है। सुबह शाम घर में आरती और कपूर आरती का भी विशेष महत्व है। इसलिए हो सके तो आप प्रतिदिन कपूर आरती करें।

  • पूजा घर यहाँ न बनाएं:

पूजा घर कभी भी स्टोर रूम में नहीं बनाना चाहिए, न ही बाथरूम के पास पूजा घर होना चाहिए, न ही सीढ़ियों के नीचे होना चाहिए। पूजा घर हमेशा साफ़ सुथरी जगह में होना चाहिए और नाले के पास या बदबू वाले स्थान पर नहीं होना चाहिए।

  • मूर्तियाँ:
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हम कई बार देखते हैं कि लोग खंडित मूर्तियों को भी पूजा घर में रखते हैं। और कई बार पूजा घर में एक ही भगवान् की बहुत सारी मूर्तियाँ रख देते हैं। लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। यदि कोई मूर्ति खंडित हो गयी है तो उस मूर्ति को आप बहते हुए पानी मतलब नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। और एक ही भगवान् की बहुत सारी मूर्तियाँ न रखें। एक भगवान् की सिर्फ एक ही मूर्ति पूजा घर में रखें।

  • पूजा घर का महत्व:

पूजा घर एक ऐसी जगह है जहाँ पूरा परिवार एक साथ मिल कर शुभ कार्यों में शामिल होता है। और यह जगह घर की विशेष जगह होती है जहाँ से घर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है। पूजा घर का महत्व हर घर में होता है। जब आपको कही शांति नहीं होती तब आप पूजा घर में भगवान् के समक्ष बैठकर ही शांति का अनुभव करते हैं।  पूजा घर बहुत ही पवित्र जगह मानी जाती है इसका महत्व व्यक्ति के घर और मन दोनों में ही होता है। हमेशा व्यक्ति मंदिर में नहीं जा सकता इसलिए घर में ही मंदिर बनाकर वहाँ रोजाना पूजा की जाती है। एवं पूजा घर से जुडी हुई कई बातें हमने यहाँ बताई हैं उन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस महत्वपूर्ण स्थान में पूजा सामग्री ही रखना चाहिए कुछ अन्य सामान यहाँ नहीं रखना चाहिए। न ही यहाँ कुछ महंगी चीज़ छुपा कर रखना चाहिए।

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