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womens day

8 मार्च को दुनियाभर में इंटरनेशनल वुमन्स डे  के रूप में मनाया जाता है। परन्तु इस दिन को केवल एक दिन के लिए ही मनाना महिलाओं को आगे बढ़ने में मददगार साबित नहीं होगा। इसके लिए  हर महिला को पहले अपने आप के अंदर की ताकत और आत्मविश्वास को पहचानना होगा। जब तक आपके अन्दर जुनून और विश्वास है और आप  मेहनत के लिए तैयार हैं, तब तक दुनिया में आप कोई भी काम कर सकते हैं और कुछ भी पा सकते है|  ज़िन्दगीं में किसी भी मंज़िल या मुकाम को पाने के लिए सबसे आवश्यक चीज़ आपकी मेहनत तथा आपका धैर्य है।

कुछ आरम्भ करने के लिए आप का महान होना कोई आवश्यक नही.. ..लेकिन महान होने के लिए आप का कुछ आरम्भ करना अत्यंत आवश्यक है।

हर महिला के अंदर शक्ति का भंडार होता है बस, सही समय आने पर किस प्रकार अपनी शक्तियों का प्रयोग करना है यह हर महिला को सीखने का प्रयास करना है । शक्ति उपासना का भारतीय चिंतन में बहुत बड़ा महत्व है। शक्ति ही संसार का संचालन कर रही है। शक्ति के बिना शिव भी शव की तरह चेतना शून्य माने जाते हैं। दुर्गा सप्तशती में ‘त्वमेव संध्या सावित्री, त्वमेव जननी परा’ इत्यादि अनेक श्लोकों के द्वारा शक्ति के शाश्वत स्वरूप का उल्लेख किया गया है। खुद पर भावनात्मक रुप से निर्भर रहने वाली महिलाएं किसी भी परिस्थिति में टूटती नहीं हैं। अगर आप भी मजबूत महिला बनकर अपने आपको आगे बढ़ते देखना चाहती हैं तो आपको कुछ बदलाव खुद में लाने होंगें।

आइए जानते हैं कि मजबूत और स्वतंत्र महिला बनने के लिए आपको अपने अंदर किन बदलाव की आवश्कता हैं :

  • खुद को पहले स्थान पर रखें: खुद को प्यार करें और पहले स्थान पर रखें ताकि लोग भी आपका सम्मान करें। क्योकि कहा जाता है कि “जो खुद खुश रहते है उनसे दुनिया खुश रहती है।” आपको जो अच्छा लगता है उसको करने का प्रयास करें। नकारात्मक बातें और आलोचनाएँ हमेशा मनुष्य के भीतर की भावनाओं को तोड़ देती हैं। नकरात्मक के बीच अपनी प्रशंसा करने से आपको अपने प्रति समर्थन मिलता है। बैठें और अपने आपसे पूछें कि आप अपने कार्यों के लिए कितनी मेहनत करते हैं फिर चाहें वह छोटी-छोटी बातें ही क्यों ना हो।

खुद से प्यार करो,

अपने को क्षमा करो

ख़ुद के प्रति ईमानदार रहो,

आपके साथ दूसरे कैसा व्यवहार करेंगे,

इसका मानक आप खुद तय करते हों।” 

  • अपने श्रम की अहमियत समझें : ऐसा कहा जाता है कि भारत को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनना है, तो हमें अपने देश की महिलाओं के श्रम की महत्ता को समझना होगा। महिलाओं के श्रम को आर्थिक-दृष्टि से बराबर का सम्मान देना होगा। साथ ही उन्हें तमाम आर्थिक गतिविधियों में बराबर का महत्व देना होगा। महिलाएं अगर बड़े पैमाने पर उत्पादक का हिस्सा बन जाती हैं, तो इससे न सिर्फ अर्थव्यवस्था को जबरदस्त सामाजिक और नैतिक बल मिलता है बल्कि अर्थव्यवस्था के बहुआयामी विकास का रास्ता भी साफ होता है। अतः इसके लिए महिलाओं को अपने श्रम की अहमियत को समझने का प्रयास करना होगा ।

खुद से जीतने की जिद है,

मुझे खुद को ही हराना है,

में भीड़ नहीं हूँ दुनिया की,

मेरे अंदर एक जमाना है।

  • अपने अन्दर से डर को भगाएं: आपने वह कहावत तो सुना ही होगा “जो डर गया वो मर गया”। यह बात यहाँ पर भी लागु होती है। अगर आप अपने जीवन में डर को जगह देंगे तो डर आपके जीवन की खुशियों और आगे बढ़ने के रास्ते को समाप्त कर देगा। इसके हल के लिए जितना हो सके, जिस चीज से डर लगता है उतना ही उसको करने का प्रयास करें क्योकि डर एक ऐसे चोर की तरह है, जो चोरी तो कर सकता है परन्तु चोरी करते हुए उसका सामना यदि किसी से हो जाये तो वह तुरंत भाग जाता है।

यकीन मानिए यदि डर का सामना आपसे हो जाये तो भागना डर को ही है क्योकि वह कल्पना है और आप वास्तविक हो।

आचार्य चाणक्य जी ने कहा है…..

भय को नजदीक मत आने दो, अगर नजदीक आये तो उसपर हमला कर दो यानी भय से भागो मत उसका सामना करो

अंत में, मैं नरेन्द्र कुमार द्वारा लिखी कविता के माध्यम से हर महिला को महिला दिवस पर उसके की अंदर ताकत से रूबरू करना चाहूँगी …….

नारी तेरी नारीत्व नहीं किसी का मोहताज।

हर युद्ध में तुने हाथ बटाया,

धर्म युद्ध हो या गृह युद्ध,

स्वतंत्रा संग्राम हो या राजपाठ कि हो बात,

अच्छेअच्छो को तुने दिया मात,

कहो तो गिना दु मै सैकड़ो नाम,

फिर क्यू हो तुम बेकाम,

नारी तेरी नारीत्व नहीं किसी का मोहताज।

तू आधा नहीं अधूरा नही,

तेरे बिना जगत पुरा नहीं,

तेरे बिना बेकार है यह ब्रह्यमाण्ड,

नारी तु जाग अपनी तागत पहचान,

कर तु किसी से आशा,

दिखा दे तु अपना चमत्कार,

नारी तेरी नारीत्व नहीं किसी का मोहताज।

रिपोर्ट: डॉ.हिमानी