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डिलीवरी के बाद मां और शिशु के लिए लाभकारी खाद्य पदार्थ

by Dr. Himani Singh
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जब एक महिला गर्भवती होती है तो परिवार के सभी सदस्य उसकी देखभाल में पूरी तरह से जूट जाते हैं क्योकि यह बात सभी को पता है की गर्भावस्था के दौरान खानपान का विशेष महत्व होता है क्योकि इस दौरान का अच्छा और हेल्दी खान पान आपको और आपके होने वाले शिशु को स्वस्थ रखने में मदद करता है। परन्तु क्या आपको पता है कि एक महिला को जितनी देखभाल की आवशयकता गर्भावस्था के दौरान होती है उतनी ही गर्भावस्था ख़त्म होने के कुछ महीनो बाद भी होती है। क्योकि गर्भावस्था के दौरान महिला का शरीर काफी नाजुक होता है, ऐसे में सही खानपान तथा कुछ आवशयक तथ्यों पर ध्यान देना जरूरी होता है, ताकि  महिला के नाजुक शरीर को अच्छी तरह से पोषण मिले और उसके शरीर को किसी तरह का नुकसान न हो और उसके शरीर की जल्दी से रिकवरी हो।

डिलीवरी के बाद महिला द्वारा नवजात शिशु को स्तनपान कराने के कारण उसके शरीर को और अधिक पोषण की जरूरत होती है। अतः डिलीवरी के बाद महिलाओं को सोच समझकर अपनी डाइट चुननी चाहिए। कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन आपके शरीर को ऊर्जा देता है, पर्याप्त प्रोटीन मांसपेशियों और ऊतकों के पुनर्निर्माण और मरम्मत में मदद प्रदान करता है। इसलिए, प्रसव के बाद इन आहार को अपनी डाइट लिस्ट में शामिल करना बहुत जरुरी होता है। अधिकांशतः प्रसव के बाद कई महिलाओं को कमजोरी महसूस होती है साथ ही कई बार शिशु की देखभाल के कारण कम और अनियमित नींद लेना भी  महिलाओं को अधिक थका देता है। जिसके चलते कई महिलाएं एनीमिक हो जाती हैं जिसमें उनके शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, जिसके कारण उन्हें थकान और कमजोरी महसूस होती है, और लगातार सिरदर्द होता है।

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आइये जानते हैं डिलीवरी के बाद महिलाओं को किन खाद्य पदार्थों का सेवन करना लाभकारी होता है:

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  1. मोरिंगा (सहजन) की सूखी पत्तियाँ :

प्रोटीन, विटामिन से युक्त सुपरफूड : यह सुपरफूड के रूप में जाना जाता है। मोरिंगा की पत्तियां  विटामिन सी, ए और डी के साथ-साथ फोलिक एसिड, आयरन और फॉस्फोरस जैसे अच्छे पोषक तत्वों से भरपूर होती है। बहुत से परिवारों में माताओं को प्रसव के कुछ ही घंटों बाद मोरिंगा के पत्ते खाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। सहजन लम्बी फलियों वाली एक सब्जी का पेड़ होता है। अधिकाशतः भारतीय सहजन की फली को सब्जी व अन्य भोजन बनाने में  प्रयोग करते है। इसकी पत्तियों में प्रोटीन, विटामिन B6, विटामिन C, विटामिन A, विटामिन E, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, जिंक जैसे तत्व पाए जाते है।  इसकी फली  विटामिन C और  पत्ती में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में उपस्थित होता है। इसके अतिरिक्त यह  एंटीओक्सिडेंट, बायोएक्टिव तत्वों से भी भरपूर्ण होता है। बहुत से अध्यनों के बाद यह पाया गया है कि इसकी  सूखी पत्तियों के 100 ग्राम पाउडर में दूध से 17 गुना अधिक कैल्शियम और पालक से 25 गुना अधिक आयरन उपस्थित  होता है। इसकी पत्तियाँ प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत मानी जाती हैं। एक कप ताजी पत्तियों में 2 ग्राम प्रोटीन होता है,  जो  किसी भी प्रकार से मांसाहारी स्रोतों से मिले प्रोटीन से कम नहीं होता  है क्योंकि इसमें सभी आवश्यक एमिनो एसिड्स उपस्थित होते है। इसकी वजह से डिलीवरी के बाद महिलाओं को इसकी पतियों के सेवन की सलाह दी जाती है।

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बढ़े हुए वजन को कम करता हैसहजन में डाईयूरेटिक गुण होते हैं जोकि शरीर की कोशिकाओं में अनावश्यक जल को कम करने में सहायक होता है, साथ ही इसके एंटी-इन्फ्लेमेटोरी गुण शरीर के  सूजन  को कम  करने में सहायक होते हैं। फाइबर से भरपूर  होने के कारण इसमें  शरीर के  फैट का  अवशोषण करने की क्षमता होती है जो प्रेग्नेंसी के बाद बढ़े हुए वजन को कम करने में बहुत अधिक लाभकारी होता है।

डिलीवरी के बाद शरीर में दूध बनाता है: दूध पिलाने वाली माताओं के लिए सहजन बहुत बढ़िया है क्योकि सहजन की पत्ती को घी में गर्म करके प्रसूता स्त्री को खिलाने से उसके शरीर में  दूध की कमी नहीं होगी जिससे शिशु को परेशानी नहीं होगी।

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बाल झड़ना रोकता है : डिलीवरी के बाद अधिकाशतः महिलाओं को बाल झड़ने की समस्या हो जाती है जिसके चलते उनको बहुत परेशानी होती है। सहजन की फली में मिलने वाले बीज  से निकलने वाले तेल को  बेन आयल के नाम से जाना जाता है, जिसके प्रयोग से बाल लम्बे, घने , डैंड्रफ रहित और कम झड़ते हैं। सहजन में जिंक, विटामिन और एमिनो एसिड्स भरपूर मात्रा में उपस्थित होने के कारण इसके प्रयोग से बालों के  केराटिन की मरम्त होती है, जिससे बालों की रिपेयरिंग बहुत अच्छे से हो पाती हैं। अतः यदि आप अपनी डिलीवर के बाद बाल झड़ने की समय से जूझ रही है तो ऐसे में सहजन की सब्जी खाएं, सूप पियें या पत्ती के पाउडर का सेवन करें, लाभ होगा।

त्वचा सम्बन्धित समस्याएं:   सहजन  के  बीजों का तेल (बेन आयल )  स्किन की  बहुत सी समस्याओं को दूर  करने के लिए लाभकारी होता है। प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को बहुत सी त्वचा सम्बन्धित समस्याएं हो जाती है ऐसे में नियमित रूप से इस तेल की मालिश से यह त्वचा सम्बन्धित समस्याएं जल्दी ही सही हो जाती हैं।  त्वचा के लिए उपयोगी विटामिनों, एंटीओक्सिडेंट गुणों से भरपूर यह तेल चेहरे की झुर्रियाँ और महीन लकीरें दूर करता है।

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2. लीन मीट : यदि महिला नॉन- वेजिटेरिअन है तो ऐसे में उसको डिलीवरी के बाद  लीन मीट अपने खानपान में शामिल करना चाहिए। लीन मीट  में आयरन, प्रोटीन और विटामिन बी-12 बहुत अधिक  मात्रा में होता है, जो बहुत अधिक ऊर्जा प्रदान करता है। लीन मीट आपके शरीर में सभी कोशिकाओं को ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण होता है। गर्भवती महिलाओं को अधिक आयरन की आवश्यकता होती है। लीन मीट  के सेवन से उनके शरीर में उचित मात्रा में आयरन पहुंचेगा। बच्चे के जन्म के बाद शरीर को मजबूत रखने  के लिए प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ महत्वपूर्ण होते  हैं। यदि महिला का वजन  गर्भावस्था से पहले कम था, तो  ऐसे में डिलीवरी के बाद उसको और अधिक  प्रोटीन खाने की जरूरत होती है।लीन मीट जैसे लौह युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से डिलीवरी के बाद  महिला के शरीर को  बहुत अधिक  ऊर्जा मिलती है।

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3. कम फैट वाले डेयरी उत्पाद : प्रसव के बाद महिला को डेयरी उत्पादों का सेवन करना बहुत लाभकारी हो सकता है क्योकि डेयरी उत्पादों को प्रोटीन, कई खनिजों और बी विटामिन राइबोफ्लेविन, नियासिन, बी 4 और बी 12 का उत्कृष्ट स्रोत माना जाता है, जो की शिशु को यह स्तनपान के लिए  बहुत जरूरी होता है।  आपको बता दें कि नवजात शिशु मां के दूध से ही कैल्शियम ग्रहण करता है, जिससे उसकी हड्डियां मजबूत होती हैं। ऐसे में मां के  शरीर में भी उचित मात्रा में  कैल्शियम होना बहुत जरूरी होता है।दूध हड्डियों को मजबूत बनाने वाले विटामिन डी को बढ़ावा देता है। कम वसा वाली डेयरी प्रोडक्ट में स्किम या वसा रहित दूध, दही और पनीर की किस्में शामिल होती हैं।

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4. ब्राउन राइस : ब्राउन राइस चावल का बिना रिफाइंड किया हुआ प्राकृतिक रूप  होता  है। इसके भूरे रंग के कारण ही इसे ‘ब्राउन राइस’ कहा जाता है। यह सफेद चावल के मुकाबले पकने में ज्यादा समय लेता है और स्वाद में भी थोड़ा अलग होता है। साथ ही, सफेद चावल की तुलना में इसमें ज्यादा पोषक तत्व होते हैं, क्योंकि  यह चावल  किसी पॉलिश प्रक्रिया से नहीं गुजरता। सिर्फ इसके ऊपर से धान के छिलके उतारे जाते हैं। सेहत विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्राउन राइस, वाइट राइस की तुलना में कहीं ज्यादा फाइबर युक्त होता है अतः  वाइट राइस की तुलना में ब्राउन राइस खाना ज्यादा फायदेमंद होता है।

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       वजन घटाने में मददगार: ब्राउन राइस में सफेद चावल की  तुलना में  कम कैलोरी होती है लेकिन इसमें फाइबर की भरपूर मात्रा होती है जिसकी          वजह से  मेटाबॉलिजम सही रहता है। अतः डिलीवरी के बाद इसका सेवन  वजन घटाने में फायदेमंद होता है।

      हड्डियों की मजबूती प्रदान करता है : ब्राउन राइस में मैग्नीशियम बहुत  अच्छी मात्रा में पाया जाता है।  मैग्नीशियम हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए         बहुत  ही  आवश्यक तत्व माना जाता  है। यह  बोन मिनरल डेंसिटी को बढ़ाने में मदद करता है।

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     त्वचा और बालों को रखे स्वस्थ : ब्राउन राइस में प्रोटीन, मैग्नीशियम, पोटैशियम व फास्फोरस जैसे मिनरल उचित  मात्रा में उपस्थित  होते हैं। यह       सभी तत्व डिलीवरी के बाद महिलाओं की त्वचा और बालों की मरम्मत में बहुत  अधिक भूमिका निभाते हैं। ब्राउन राइस में पाए जाने वाले मिनरल्स         जैसे जिंक व कैल्शियम  डिलीवरी के बाद  बालों के  झड़ने  की समस्या को काफी हद तक कम करते हैं। ब्राउन राइस में  पाया जाने वाला फोलेट           समय से पहले बालों को सफेद होने से बचाता है।

    रोग प्रतिरोधक क्षमता  को बढ़ाती है : ब्राउन राइस में विटामिन-ई उपथित होता है, जो एंटी-ऑक्सीडेंट का काम करता है। यह एंटी-ऑक्सीडेंट          रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए लाभकारी होते है। यदि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी तो हम बहुत सी बिमारियों से             आसानी से लड़ सकते हैं।  डिलीवरी के बाद महिला का शरीर बहुत ही कमजोर होता है ब्राउन राइस खाने से शरीर को मजबूती मिलती है।

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   डिप्रेशन से छुटकारा : ब्राउन राइस में एंटी-डिप्रेशन गुण  उपस्थित होते हैं, जो तनाव और दिमाग से संबंधित समस्याओं से लड़ने में मदद करते हैं।       इसमें मौजूद गामा-एमिनोब्यूटिरिक एसिड  और ग्लूटामाइन  नामक  एमिनो एसिड  दिमाग में न्यूरोट्रांसमीटर का निर्माण करते हैं जो  तनाव  को कम    करने में मदद करते है। शिशु को दूध पिलाने वाली महिलाएं अक्सर डिप्रेशन की शिकार हो जाती हैं ऐसे में ब्राउन राइस का सेवन उनके लिए                  फायदेमंद होता है।

 

5. जई (ओट्स) का दलिया: ओट्स निस्संदेह स्वास्थ्यप्रद खाद्य पदार्थों में से एक माना जाता  है।  इसे विभिन्न तरीकों से पकाया जा सकता है।  यह  प्रोटीन, आवश्यक पोषक तत्वों और फाइबर  से  पैक होता  है। हम  कह सकते हैं कि दलिया एक ऐसा भोजन है जो पूर्ण-दाने वाला होता है, इस प्रकार बहुत सारे आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है। ये पोषक तत्व  डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में  दूध की आपूर्ति बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो की स्तन पान के समय आपके शिशु के लिए  बहुत  जरुरी होता है । उनमें सैपोनिन और अन्य आवश्यक खनिज जैसे जस्ता, मैंगनीज और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को भी  मजबूत  बनाने का काम करते  हैं, इस प्रकार माताओं के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले स्तन दूध का उत्पादन करना आसान हो जाता है। इसके अतिरिक्त जई (ओट्स)  में काफी ज्यादा फाइबर होता है, जिसकी वजह से इसका सेवन  कब्ज को दूर रखने में भी मदद करता  हैं। ओट्स खाने का सबसे आम तरीका है इसे  दूध में पका कर , इसमें  मेवे डालकर खाया जाए । आप इसकी पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इसमें केले, सेब या आम जैसे फल भी काटकर डाल सकती हैं। नमकीन रूप में बनाने के लिए आप ओट्स का उपमा या खिचड़ी भी बना सकती हैं।

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माँ के शरीर में दूध की आपूर्ति बढ़ाने के लिए ओट्स कई तरह से भूमिका निभाता है:

  • बीटा-ग्लूकोज, प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और भी कई ऐसे पोषक तत्व ओट्स  में उपस्थित होते हैं जो  स्वस्थ, रसीले दूध की आपूर्ति के लिए लाभकारी होते हैं।
  •  ओट्स में पाया जाने वाला एक और महत्वपूर्ण खनिज है आयरन। डिलीवरी के बाद अधिकांशता महिलाओं में आयरन की कमी हो जाती है, ओट्स का सेवन आयरन की आपूर्ति को दूर करके शिशु के स्तनपान करते समय होने वाले संघर्ष को कम करता है।
  • ओटमील आपके शरीर में ऑक्सीटोसिन और रिलैक्सिन जारी करके मन को शांत रखने में मदद करता है। यह दूध उत्पादन प्रक्रिया को उत्तेजित करता है और  दूध के प्रवाह को तेज  करता है।

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6. अजवायन: प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में अजवाइन को अनेकों प्रकार के अन्न को पचाने वाला औषधि  माना गया है। अतः हम कह सकते है कि अजवाइन पाचन क्रिया से संबंधित सभी रोगों में बहुत ही लाभकारी होता है। शोधों के अनुसार  अजवायन में  एंटी ऑक्सीडेंट , एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक तत्व  उपस्थित होते  हैं। विशेषजों द्वारा अजवाइन  का सेवन डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाली बहुत सी समस्याओं को सही करने का रामवाण माना जाता है।

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    गैस्टिक समस्या से राहत दिलाये:

डिलीवरी के बाद अधिकाशतः महिलाओं को गैस्टिक समस्याओं से गुजरना पड़ता है। ऐसे में अजवायन पेट के दर्द और गैस की समस्या से राहत             दिलाने में लाभकारी होता है।  इसका पानी सिर्फ आपकी पाचन क्रिया ही नहीं बल्कि आपके शिशु की पाचन क्रिया को भी स्वस्थ रखता है। इसके           साथ ही साथ डायरिया और कब्ज की समस्या से भी छुटकारा दिलाता है।

   रक्त संचार में सुधार करता है:

डिलीवरी के बाद अजवाइन के नियमित सेवन से महिला के शरीर में रक्त का संचार सुचारू रूप से होता है। इससे शरीर में रक्त का संचार समान         रूप से बना रहता है जिससे मांसपेशियों में होने वाले दर्द से आराम मिलता है। यदि मांसपेशियों में कोई चोट लगी है तो वह भी ठीक हो जाती है।             इसका सेवन करने से बिल्डिंग के समय दर्द भी कम होता है।

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  दर्द को कम करने में लाभकारी: अजवाइन में एनएसथेटिक गुण पाया जाता है जो शरीर के किसी भी प्रकार के दर्द को कम करने में लाभकारी होता    है। इसके अतिरिक्त इसके नियमित सेवन से गर्भावस्था के बाद महिलाओं में होने वाले कमर दर्द और जोड़ों के दर्द को भी काफी हद तक कम करने       में  मदद मिलती है।

  मां का दूध बढ़ाने में सहायक: अजवाइन का पानी पीने से महिला के स्तन ग्रंथि में अधिक दूध का उत्पादन होता है। अजवाइन में स्तन से दूध उत्पाद    करने वाले गुण उपस्थित होते हैं, जो की आपके नवजात शिशु को उचित मात्रा में दूध प्रदान करने में मदद करता है।

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   वजन घटाने में सहायक : डिलीवरी  के बाद  महिलाओं के बढ़े  हुए वजन को कम करने के लिए अजवाइन  या अजवाइन का पानी का सेवन  आम       तौर पर एक स्वस्थ और सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। स्वस्थ आहार व व्यायाम के साथ अजवाइन का पानी पीने से वजन जल्दी घटता है।               अजवाइन के सेवन से मैटाबॉलिज्म रेट  बढ़ता है जिससे गर्भावस्था के दौरान जमा फैट धीरे धीरे  कम हो जाता है इसके साथ ही यह  गर्भाशय की           पेशियों को मजबूती प्रदान करता  है जो शिशु जन्म के दौरान अति आवश्यक होती है।

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7. बादाम: बादाम बहुत से पोषक तत्वों से भरपूर होता है जिसकी वजह से इसको  प्रसव से उबरने के लिए यह एक आदर्श खाद्य पदार्थ माना जाता है। बादाम बहुत से व्यंजनों के स्वाद को बढ़ाने के लिए भी प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त यदि आपका कुछ पकाने का मन न करे, तो आप  बादाम का सेवन  स्नैक के तौर पर भी करसकते हैं। डिलीवरी  के बाद  स्तनपान चरण के दौरान बादाम खाने से माँ के  स्वास्थ्य में बहुत से लाभकारी परिवर्तन हो सकते हैं। अखरोट और बादाम जैसे पोषक तत्व एक नर्सिंग मां के लिए सबसे अच्छा भोजन माने जाते हैं। सभी स्त्री रोग विशेषज्ञ बच्चों  को स्तनपान कराने वाली माताओं को बादाम  खाने की सलाह देती है। बादाम, में पाया जाने वाला गैलेक्टागोग्स प्रसव के बाद प्रभावी रूप से माता के  स्तन में  दूध की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार करता हैं। अतः डिलीवरी के बाद जो  महिलाओं कम  स्तनपान की समस्या से पीड़ित होती हैं उनको डॉक्टर्स बादाम का  सेवन करने की  सलाह देते है ताकि उनके दूध उत्पादन को स्वाभाविक रूप से उत्तेजित किया जा सके।  कच्चे बादाम स्वस्थ प्रोटीन और कैल्शियम का एक समृद्ध स्रोत होते हैं, जो माता के दूध के सेवन द्वारा आपके बच्चे की विकास प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से बढ़ाने में मददगार होता है।  बादाम  विटामिन ई,कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर,  विटामिन बी 2, बी 3 और बी 1 जैसे आवश्यक पोषक तत्वों का भंडार है। इसके अतिरिक्त  मैग्नीशियम, तांबा, फास्फोरस, कैल्शियम, लोहा और जस्ता  जैसे खनिजों का एक समृद्ध स्रोत भी है। अपने शिशु के जन्म के बाद  अपने  आहार में स्वादिष्ट ड्राई फ्रूट को शामिल करने से आपके बच्चे की प्रतिरक्षा  प्रणाली भी मजबूत होती है।

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8. सौंठ: अधिकांशतः ऐसा देखा जाता है कि  डिलीवरी  के बाद नई-नई मां को घर के बड़े बुज़ुर्ग सोंठ के लड्डू खिलाते हैं।इसके पीछे  तर्क यह होता है कि सोंठ के  लड्डू  मां और नवजात दोनों की ही सेहत के लिए लाभकारी होते है। सोंठ सूखे अदरक का पाउडर होता है और इससे बना लड्डू प्रसव के बाद स्तन में दूध का उत्पादन बढ़ाने और कमजोरी को दूर करने में बहुत ही लाभकारी होता है। सोंठ में  आयरन, फाइबर, विटामिन बी6 और ई, मैग्नीशियम, पोटाशियम, सेलेनियम, मैंगनीज, कैल्सियम, बी-ग्रूप विटामिन और मिनरल्स होने के साथ-साथ उच्च मात्रा में  कैलोरी भी  होती है  जो कि  डिलीवरी के बाद महिला के शरीर की रिकवरी करने में बहुत ही लाभकारी होता है।  ये  डिलीवरी के बाद  महिला के शरीर  के अंदरूनी जख़्म को जल्दी ठीक करने और एनर्जी को वापस लाने में मदद प्रदान करता है। लेकिन यह सबसे अच्छा काम दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है जो नवजात शिशु के लिए  बहुत ही अच्छा होता है। उत्तर भारत में सौंठ के लड्डू काफी  प्रचलित है और  दक्षिण भारत में सौंठ से बनी चटनी।  अतः आप  अपने  आहार में सौंठ को किसी भी प्रकार से शामिल कर सकते हैं।

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9. काले और सफेद तिल: काले और सफेद तिल के बीज कैल्शियम, आयरन, कॉपर, मैगनीशियम और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्वों से  युक्त  होते हैं, जो डिलीवरी के बाद महिला के शरीर को मजबूती प्रदान करते है। तिल का सेवन  मल प्रक्रिया को नियमित करने में बहुत ही फायदेमंद  होता हैं। उत्तरी भारत में तिल के लड्डू बहुत ही प्रचलित है इसके अतिरिक्त तिल पट्टी, रेवड़ी और चिक्की आदि का सेवन भी जाड़ों में काफी किया जाता है ।

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