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menopause

मेनोपोज़ या रजोनिवृत्ति महिलाओं में मासिक धर्म चक्र के बंद हो जाने की प्रक्रिया को कहते हैं। लड़कियों को 14 या 15 की उम्र में मासिकधर्म होना शुरू हो जाता है, जिसका मतलब यह है कि अब लड़की गर्भधारण कर सकती है।

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हर लड़की में मासिकधर्म शुरू होने से लेकर 45 से 55 वर्ष की आयु तक अधिकाशतः प्रत्येक 28 वें दिन तक मासिक धर्म होता है। अतः हम कह सकते है कि हर महीने में एक बार डिंबग्रंथि से एक डिंब परिपक्व हो जाता है और शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। जिसके बाद यह डिंब, वाहिका नली में उपस्थित शुक्राणु द्वारा संसेचित होकर गर्भाशय में गर्भ धारण का कारण बनता है।

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मेनोपोज़ के लक्षण:

  • मेनोपोज़ हो जाने के बाद महिला जनन शक्ति या गर्भ धारण की क्षमता को खो देती है क्योंकि ओवरी में इस्ट्रोजेन हॉर्मोन का उत्पादन कम हो जाता है। जिसके कारण उनमें बहुत सारी शारीरिक और मनोवैज्ञानिक बदलाव आते हैं।
  • महिलाओं में लगभग 80 प्रतिशत को हॉट फ्लैश होना या रात को तेज पसीना आने जैसे लक्षण होते हैं। कुछ महिलाओं में यह प्रकिर्या  6 से  7 साल तक भी हो सकती  है। एस्ट्रोजन हार्मोन में गिरावट की वजह से अक्सर शरीर तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता खो देता है।  जिस कारण हॉट फ्लैश होना या रात को तेज  पसीना आने की समस्या होती है ।
  • जनन पथ में बदलाव (जेनेटल चेंज) के कारण जननांग में सिकुड़न, सूखापन, खून बहना, पानी गिरना, सेक्स करने में दर्द या न करने की इच्छा आदि।
  • जोड़ों में दर्द होना भी मेनोपॉज का एक लक्षण होता है, लेकिन यदि जोड़ों का दर्द लगातार हो रहा है और इसकी वजह से रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो गया है तो ये अर्थराइटिस, फाइब्रोम्यल्गिया, लुपस या लयमे बीमारी का लक्षण भी हो सकता है।
  • यूरीनरी ट्रैक्ट चेंज के कारण मूत्र संबंधी परेशानी होती है, कभी अधिक होता है तो कभी कम। कभी-कभी असावधानी के कारण इन्फेक्शन होने का खतरा होता है।
  • हॉर्मोन्स के कारण हड्डी में भी बदलाव आता है जिसके कारण हड्डी कमजोर हो जाती है। इसके कारण जोड़ों, पीठ और मांसपेशियों में दर्द का अनुभव होता है।
  • हॉर्मोन्स के कारण त्वचा रूखी हो जाती है, स्तन सिकुड़ जाता है।
  • शारीरिक बदलाव के अलावा मानसिक बदलाव भी होता है जैसे- थकान, चिड़ाचिड़ापन, उदासी, कुछ भी न करने की इच्छा, याद न रहना, खोये रहना आदि।

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रिपोर्ट: डॉ.हिमानी