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human milk bank

मां का दूध बच्चो के लिए वरदान होता है। माँ के दूध से ही बच्चो में शारीरिक और मानसिक विकास होता है क्योकि माँ के दूध में वह सभी पोषक तत्व पाए जाते है जो शिशु के विकास के लिए जरुरी होते है। पर दुनिया में कुछ ऐसे भी बच्चे होते है जिनको माँ का दूध कुछ कारणो से नहीं मिल पाता, जिसकी वजह से उनका शारीरक और मानसिक विकास सही प्रकार से नहीं हो पाता है।

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अतः माँ के दूध के महत्व को ध्यान में रखते हुए जिन नवजात शिशुओं को किन्ही कारणों से मां का दूध नहीं मिल पाता है उनके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दिल्ली के लेडी हार्डिंग कॉलेज में ‘वात्सल्य मातृ अमृत कोष’ के नाम से ‘ह्यूमन मिल्क बैंक’ खोला गया है। इस बैंक में महिलाएं अपनी इक्छा से अपना दूध दान कर सकती है। नवजात बच्चों के लिए मां के दूध की महत्वता तो हर कोई जानता है लेकिन इसके बावजूद भी हमारे देश में स्तनपान कराने का चलन महज 40 % ही देखा गया है। इसलिए सरकार ने माताओं को इसके प्रति और जागरुक बनाने के लिए मातृत्व ममता के नाम से एक कार्यक्रम भी चलाया है। बच्चो के लिए जन्म के लगभग छह महीने तक मां का दूध सबसे सुरक्षित और पौष्टिक आहार माना जाता है।

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परन्तु  कई बार बच्चों के जन्म के बाद महिलाओं में दूध सही से नहीं बन पाता या कम बनता है या फिर दवा या दूसरी बीमारी के चलते उनके बच्चो के लिए उनका दूध सुरक्षित नहीं होता है। ऐसे में नवजात शिशुओं को मां के दूध से वंचित रहना पड़ता था परन्तु अब इसका समाधान ह्यूमन मिल्क बैंक के द्वारा ढूढ़ लिया गया है। इसके लिए एक नियमित प्रक्रिया तैयार की गयी है। जिसमें दूध दान करने वाली हर महिला की पूरी तरह से स्वास्थ्य जांच की जाती है। पूरी तरह से विभिन्न जांचो के बाद ही उनका दूध बैंक में रखा जाता है। बैंक में रखे ऐसे दूध को 62.5 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर 30 मिनट तक पॉश्च्युराइज करने के बाद चार डिग्री सेल्सियस तापमान पर ठंडा किया जाता है। सभी डिब्बे से एक मिलीलीटर दूध का नमूना माइक्रोलैब में परीक्षण के लिए जाता है। अगर परीक्षण में रिपोर्ट सही आती है तव इसे 0 से 20 डिग्री तक कम तापमान पर रखते है, जो की तीन महीने तक सुरक्षित होता है।

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ब्रेस्टफीडिंग प्रमोशन नेटवर्क ऑफ इंडिया के के अनुसार हर साल दुनियाभर में 13.5 करोड़ बच्चों में से 60 % ऐसे बच्चे है जिनको जन्म के बाद मां का दूध नहीं मिल पाता है। और उनको गाय, बकरी या डिब्बे वाले दूध के सहारे अपना बचपन काटना पड़ता है। अतः सरकार द्वारा नवजात शिशुओं के लिए यह एक उच्चतम कदम है।

रिपोर्ट: डॉ.हिमानी