Home हेल्थआंखों की समस्या नवजात शिशु के आंखों से पानी आने की समस्या से कैसे पाएं निजात

नवजात शिशु के आंखों से पानी आने की समस्या से कैसे पाएं निजात

by Dr. Himani Singh
New born baby eye care

नवजात शिशु के जन्म लेते ही घरवाले उसको दूसरों की बुरी नजर से बचाने लगते हैं क्योकि नवजात की हटखेलिया लोगो के दिलों को मोहित करती हैं। इसके लिए बच्चों बच्चों को काला टिका या आखों में काजल लगाया जाता है। कई बार देखा गया है की नवजात  शिशुओं  के आखों में कीचड़ तथा पानी आने की समस्या  बच्चे के घरवालों के लिए दुखदाई हो जाती है। ऐसे में माँ तथा घरवालों को  बच्चे की कजरारी आँखों की देखभाल की जानकारी होना बहुत  ज़रूरी  होता है और साथ में यह भी जानकारी होना आवश्यक होता है कि बच्चों के आँख से आसूं या कीचड़ क्यों आता है।

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आइये आँख की अश्रु संरचना  को जानें :  प्रतेक व्यक्ति की आँख में अंदर की तरफ़ आंसू की एक नली होती है। जो कि आँख के अंदर के हिस्से से शुरु होकर नाक के नीचे के हिस्से में खुलती है, इसे नेजोलेक्रॉईमल डक्ट के नाम से जाना जाता है। व्यक्ति की आँखों में आँसू लगातार बनते रहते हैं। जो आँखों की नली के माध्यम से नाक के नीचे के हिस्से से होते हुए गले में लगातार जाते रहते हैं। जिसकी वजह से आँसू आँख से नहीं घिरते हैं। जब आँख की नली किसी वजह से  बंद हो जाती है, तव  ऐसे अवस्था में  आँखों में पानी भरने लगता है और आँसू  आँख से बाहर निकलने लगते हैं।

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आँखों में पानी आने का कारण : लगभग 30% नवजात बच्चों में  अश्रु नली जन्म के समय बंद  पाई जाती है। ऐसा आँख की नली के नीचे के हिस्से में  एक झिल्ली  के पाए जाने के कारण होता है कई बार  ऐसा आँसू की नली में एपिथिलियल कोशिकाओं के  जमाव  के कारण भी ऐसा होता है। नवजात बच्चे में इस स्थिति को कंजेनाइटल डेक्रायोसिस्टाइटिस के नाम से जानते  हैं। अश्रु नली बंद होने पर  बच्चे की आंख से लगातार पानी गिरता रहता है, जिससे आंख में इन्फेक्शन की सम्भावना बढ़ जाती है और आंख चिपकने लगती है। ऐसी अवस्था में कंजंक्टिवाइटिस बीमारी जल्दी-जल्दी होने लगती है। आखों में लगातार पानी आने से अश्रु नली में लगातार आँसू भरने  के कारण उसमें बैक्टीरिया पनपने लगते है। जिससे आँख में संक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती है।

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उपचार : नवजात शिशुओं में टियर ग्लैंड पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता है। जिसकी वजह से उनके आखों से कीचड़ या पानी आना बिल्कुल ही नार्मल होता है। ऐसे  में बच्चे के आखों और नाक  के बीच में थोड़ी- थोड़ी देर के लिए मसाज करने से इस समस्या को काफी हद कम किया जा सकता है।

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रिपोर्ट: डॉ.हिमानी

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