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जाने शिशु में दूध के दाँत निकलने से जुड़े आवश्यक तथ्य

by Dr. Himani Singh
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अधिकाशतः देखा गया है कि जन्म के बाद शिशुओं के दाँत  लगभग  5  से 10  माह की आयु के बीच निकलते है।  जब शिशुओं में पहली बार दाँत निकलने  है तो इसे  टीथिंग कहते हैं। जब शिशुओं में  पहली बार दांत निलकते हैं, तो उन्हें अलग-अलग प्रकार के  दर्द से गुजरना पड़ता है। जब शिशु के दाँत  निकलने लगते हैं तो वह समय  माता – पिता के लिए मुश्किलों भरा होता है क्योकि  शिशु बहुत छोटे होते हैं इसलिए वह बोल कर  अपने दर्द को नहीं बता पाते हैं, ऐसे में वह रो कर अपनी बात समझाने का प्रयास करते हैं।  शिशुओं में टीथिंग के दौरान चिड़चिड़ापन, बेचैनी और यहाँ तक कि बुखार जैसे कुछ दूसरे लक्षण भी  देखने को मिलते हैं। लगभग छह महीने की उम्र में, बच्चो के दूध के दांत उनके मसूड़ों से उभरने लगते है और इसी उम्र से दूध के दांत निकलने की शुरुआत होती है। चिकित्सा के क्षेत्र में शिशु के दांत निकलने के के समय को  “ओडोटियासिस”  के नाम से जाना जाता है। शिशु में अक्सर पहले ऊपर और नीचे  के सामने  वाले दांत  निकलते  हैं।  शिशु को दर्द  से निजात दिलाने के लिए, यह समझना जरुरी होता है कि  शिशुओं में ऐसा क्यों होता है। इस आर्टिकिल  द्वारा हम शिशु के  दांत निकलने से जुडी  जानकारियों के  आपको बताएंगे।

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शिशु के दांत निकलने पर दर्द क्यों?

जब शिशु के दांत निकलने लगते हैं तब ऐसे में उसे बहुत दर्द और असुविधा होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दांत मसूड़े के ऊतक की सतह के नीचे आना शुरू  हो जाते हैं जिससे मसूड़े लाल, सूजे हुए और संवेदनशील हो जाते है। दाढ़  निकलते समय दर्द अधिक होता है  क्योंकि अन्य दातों की तुलना में उनका आकार ज्यादा बड़ा होता है, परन्तु  दाढ़ अधिकाशतः सभी दांत  निकल जाने के बाद निकलते हैं।

टीथिंग के दौरान बुखार क्यों आता है :

माता -पिता द्वारा अधिकांशतः यह प्रश्न पूछा जाता है कि  शिशु  के दाँत निकलने पर उनको  बुखार क्यों  आता है।  दाँत निकलने के समय शरीर का तापमान थोड़ा अधिक  जरूर हो  जाता  है, लेकिन इतना भी नहीं कि उसको बुखार समझा जाए। जब  दाँत मसूड़ों से बाहर निकलते हैं तो ऐसे में  मसूड़ों में सूजन आ जाती है, जिससे हल्का बुखार हो सकता है। टीथिंग के समय होने वाला हल्का बुखार बैक्टीरिया के विरुद्ध शरीर की सुरक्षा का  प्रतिक माना जाता है। जब मसूड़े  फूल  जाते हैं, तो कुछ अस्थाई बैक्टीरिया  शिशु के मुँह में हो  सकते हैं जो शिशु के रक्त में चले जाते हैं। इन  बैक्टीरिया के विरुद्ध शरीर  कि प्रतिरक्षा प्रणाली तेजी से कार्य करती है जिससे  हल्का बुखार आ सकता है। इसके अतिरिक्त ,  शिशु के मुँह में लार भी अधिक बनती है, जो आंत तक जाती है जिसके कारण आपके शिशु का मल भी थोड़ा  पतला हो जाता है। हालांकि, यह मल दस्त के दौरान होने वाले मल की तरह नहीं होता। यदि शिशु को दस्त, भूख न लगना, उल्टी, आदि लक्षणों के साथ-साथ उसका रेक्टम तापमान (मलाशय का तापमान) 100.4 डिग्री फारेनहाइट है, तो यह एक अलग बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर्स से सलाह लेना ही बेहतर  विकल्प होता है।

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टीथिंग का बुखार कब तक हो सकता है :

शिशु के दाँत निकलने से पहले मसूड़े सूज जाते हैं। इस सूजन के साथ होने वाला दर्द और बुखार एक या दो दिन तक बना रहता है। शिशु के दांत एक साथ नहीं निकलते हैं अतः हर दांत निकलने के समय  शिशु को हल्का सा बुखार  आने   संभावना हो सकती है। यद्यपि, हर बार दाँत निकलते समय टीथिंग का दर्द और बुखार पिछली बार की तुलना में थोड़ा कम या ज्यादा हो सकता है।

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घर पर इलाज कैसे करें :

शिशु के  दाँत निकलने के समय आने वाला बुखार बहुत हल्का होता है, इसलिए आपको इसका इलाज करने के लिए दवाओं  का इस्तेमाल करने की कोई जरुरत नहीं होती। ऐसे में बस ध्यान रखें कि आप अपने  शिशु को कुछ न कुछ  चबाने  को देते रहें जिससे उसके मसूड़ों में कम दर्द होगा। इसके लिए आप शिशु को साफ़ सुथरे रबर के खिलौने ( टीथर)  चबाने दे सकते हैं। चूसनी और फ्रोज़न रिंग्स भी शिशु के मसूड़ों की सूजन और दर्द को कम करने  में मदद कर सकते हैं। दर्द से राहत दिलाने के लिए  आप अपनी उंगली को थोड़े ठंडे पानी में डुबोकर शिशु के मसूड़ों की धीरे-धीरे मालिश  भी कर सकती हैं। दांत निकलते समय  शिशु में लार निकलने की समस्या अधिक हो जाती है ,ऐसे में शिशु के चेहरे पर और विशेष रूप से ठोड़ी पर अधिक लार के कारण लाल चकत्ते पड़ जाते  हैं।  इन चकत्तों  पर आप कोई  सौम्य क्रीम या पेट्रोलियम जेली का  प्रयोग कर  सकते हैं। लार को थपथपा कर पोछें, रगड़ कर नहीं क्योंकि इससे  शिशु की नाजुक त्वचा पर और अधिक  चकत्तों की समस्या बढ़ सकती है ।

शिशु में दांत निकलने के कोई विशेष संकेत या लक्षण नहीं दिखते हैं। ये लक्षण  शिशु में कुछ दिनों तक रह सकते हैं या कुछ महीनों तक रह सकते हैं ।

दांत निकलने के निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं:

  • यदि आपके शिशु के मुँह में बहुत अधिक लार  बन रही है  जिसकी वजह से  मुँह से लार  बराबर टपकती रहती है और  उसके कपड़े लगातार गीले और लार से तर–बतर होते रहते हैं तो यह शिशु के दांत निकलने का संकेत हो सकता है।
  • दाँत निकलते समय शिशु को दस्त  अधिक होने लगते  है।
  • कुछ शिशु कब्ज से भी  परेशान  हो सकते हैं, जिसके कारण उनके पेट में भी  दर्द हो सकता  है।
  • दाँत निकलते समय शिशु के  मसूढ़ों में खुजली, सूजन और दर्द हो सकता है। गंदी बोतलों से दूध पीने या मिट्टी खाने वाले शिशु  दांत निकलते समय  अधिक  बीमार  हो सकते  हैं।
  • दाँत निकलते समय शिशु का सिर गर्म लग सकता है और उसकी आखें भी दुःख सकती है।

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  • शिशु थोड़ा चिड़चिड़ा हो जाता है, जिसकी वजह से छोटी छोटी बातों पर रोटा रहता है।
  • लगातार लार टपकने से शिशु के गले में ख़राश और खांसी हो सकती है।
  • लगातार लार के टपकने से बच्चे के मुंह और ठुड्डी के आसपास की त्वचा फटने लगती है जिससे, उनकी त्वचा पर लालिमा और चकत्ते पड़ सकते हैं।
  • बच्चे के दांत निकलते समय अधिकांश बच्चों के वजन में तेजी से गिरावट देखी जाती है।
  • दांत निकलने में दर्द होने के कारण शिशु अक्सर सही से सो नहीं पाता है।

दांत निकलने के  विभिन्न चरण :

आमतौर पर बच्चों के 30 महीने के भीतर सभी दूध के दांत निकल जाते है।  आइये जानते हैं शिशुओं में दांत निकलने के कौन कौन से चरण होते हैं :

कृन्तक दांत (नीचे के सामने वाले दांत ) – 5 से  7 महीने में

कृन्तक दांत (ऊपर के सामने वाले)  –  6 से नौ  महीने में

ऊपर के पिछले कृन्तक दांत-  उपर के सामने वाले दांतों के दोनों तरफ – 10  से  11 महीने में आते है

नीचे के पिछले भाग वाले कृन्तक दांत – नीचे के सामने वाले दांतों के दोनों तरफ  – 12-14 महीने में

दाढ़ (पीछे के दांत) – 14-18 महीनों में

कुक्कुरीय (मुँह के पीछे की ओर) दांत – 18-23 महीनों में आते है

दूसरी दाढ़ – 24-30 महीनों में।

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      दांत निकलने के समय बच्चों के लिए डाइट चार्ट और सही देख भाल :

  • शिशु के दूध के दांत निकलते समय उनका आहार तालिका ऐसा होने से पेट संबंधी समस्याओं को कुछ हद तक नियंत्रण में लाया जा सकता है, इससे बुखार आदि समस्याएं भी कम हो सकती हैं।
  • शिशु को दांत निकलते  समय यदि थोड़ा  बुखार सा लगे तो ऐसे में  उनको मसला हूला केला, उबला हुआ सेब, संतरे का जूस, दाल, खिचड़ी आदि  का सेवन करना लाभकारी होता है।
  • इस समय शिशु को ऐसी चीजे खिलाएं ,जिनमें कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन, विटामिन और मिनरल्स पर्याप्त मात्रा में उपस्थित हो  हैं।
  • दांत निकलने के दौरान शिशु को मल्टी विटामिन ड्रॉप्स, जैसे विटामिन-डी-3 भी देना चाहिए ।
  • शिशु को चबाने के लिए  खिलौने देते हुए, इस बात का विशेष  ध्यान रखें कि खिलौने गर्म पानी से धुले हों ताकि उनमें किसी तरह के कीटाणु न हों।
  • शिशु को 1 -2 घंटे के अंतराल पर ओ.आर.एस. का घोल बनाकर पिलाते रहें।
  • एक लम्बी गाजर को धोकर छील लें और अपने शिशु को उसे चबाने के लिए दें , आप शिशु को  खीरा या सेब का टुकड़ा भी दे सकती हैं।
  • एक कप पानी में 1 काली मिर्च और थोड़े से तुलसी के पत्ते डाल कर गर्म करें और थोड़ा ठंडा होने के बाद  इस काढ़े का सेवन  शिशु को कराएं।
  • भाप से पकी हुई या उबली हुई सब्जियों का सेवन ज्यादा से ज्यादा अपने शिशु को कराएं।  सूप को आहार में शामिल करें जैसे टमाटर, पालक आदि का सूप पीना आपके शिशु के लिए  काफी फायदेमंद हो सकता है।
  • शिशु को अंडे के पिले भाग का सेवन कराएं क्योंकि इसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन होता है तथा यह सफेद रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में भी मदद करता है।
  • दलिया को दूध में डालकर खिलाएं क्योकि  दलिया के सेवन से  शिशु को प्रोटीन और पोषक तत्व दोनों साथ में मिलेंगे।
  • शिशु के दांत निकलते समय दर्द कम करने के लिए अंगूर का रस पिलाएं। इससे दर्द कम होता है और दांत स्वस्थ व मजबूत निकलते हैं।
  • दोपहर या रात के समय शिशु को मूंग दाल की खिचड़ी खिलाना बहुत ही लाभकारी होता है क्योकि इससे अपच की समस्या नहीं होगी  और यह जल्दी भी पच  जाएगा ।
  • शहद में शक्तिशाली जीवाणुरोधी गुण उपस्थित होने के कारण ऐसे समय में शिशु शहद  का सेवन लाभकारी होता है इसमें शहद बहुत अधिक लाभदायक होता है। ऐसे समस्य में शिशु के मसूढ़ों पर शहद  की  मालिश करने से  भी दांत निकलने के समय होने वाले दर्द से राहत मिलती है।
  • शरीर में पानी की कमी होने के कारण बैक्टीरिया ज्यादा पनपते हैं अतः थोड़ी-थोड़ी देर बाद हल्के गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक मिलाकर  शिशु को पिलाते रहे।ज्यादा पानी पीने से सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ती है जिससे आपके शिशु के शरीर की  सुरक्षा अच्छे से हो पाती है  साथ ही शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ भी बाहर निकल जाते हैं।
  • थोड़ा पानी उबाल कर उसे ठंडा करके बोतल में या फिर फिडिंग कप में  भरकर   शिशु को पीने के लिए दें। ठंडक से दर्द सुन्न होने में मदद मिलती है।
  • दांत निकलते समय बच्चे को वंशलोचन और शहद मिलाकर चटाना चाहिए। इससे दांत सुन्दर निकलते हैं और दांतों का दर्द भी खत्म होता है
  • कई बार चिड़चिड़ाहट के कारण शिशु कुछ भी खाना -पीना पसंद नहीं करता है ऐसे में शिशु को अपने सीने से लगा कर प्यार-दुलार देना ही सबसे बेहतर उपाय होता  है।
  • दांत निकलने के कारण यदि आपका शिशु दर्द से परेशान है तो ऐसे में उसके पैरों की मालिस करने से उसको बहुत आराम मिलता है। विशेष रूप से तलवों और पैरों की उँगलियों की अच्छी प्रकार से तेल से मालिस करने से आपके शिशु को कुछ समय के लिए दर्द से राहत मिलेंगी।
  • ऐसे समय में ध्यान दें कि बच्चे को बोतल में मीठे पेय पदार्थ नहीं दें क्योकि इस समय मीठे पेय पदार्थ शिशु के लिए हानिकारक हो सके हैं क्योकि जब  शिशु  दूध पीते-पीते सो जाता है, तो ब्रेस्‍ट या बोतल के दूध की आखिरी घूंट को निगल नहीं पाता है। यह दूध उसके  दाढ़ों और निकलने वाले दांतों के आसपास जमा हो जाता है और नुकसान का कारण बन सकता है। इससे सबसे अधिक उसके सामने के ऊपरी दांत और दाढ़ें प्रभावित होती हैं।
  • अपने शिशु को सोते समय बोतल के साथ न सोने कि आदत विकसित करें । याद रखें शिशु की बोतल का उपयोग भोजन के रूप होना चाहिए न कि शिशु  को  शांत करने वाले खिलौने के रूप में ।
  • अपने घर के फर्श को साफ सुथऱा  रखने का प्रयास करें क्योंकि  आपका शिशु कई बार जमीन पर गिरी हुई चीजों को खा लेता है,जिसकी वजह से उसको इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है, अतः अपने फर्श पर  डिटॉल या फिनाइल का पोछा जरूर लगाएं।

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शिशु में दूध के दांत निकलने से लाभ:

शिशु के मुंह में दूध के दांत निकलने पर उसके चेहरे का आकार सही होता हैं। दांत आने के बाद शिशु के  शब्दों के उच्चारण में सफाई आती है। दांत से खाना चबाकर खाना खा सकने के कारण उसे उचित पोषक तत्व  मिलना शुरू हो जाते हैं।

  • लार का निकलना:

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अक्सर 6 महीने की उम्र के आसपास  शिशु के मुँह में अधिक  लार दिखने  लगती है, क्योकि तब तक लार की धारा वापस लेने के लिए उसके मुँह में सामने के निचले दांतों का विकास नहीं हुआ होता हैं।  शिशु के मुँह में लार का बढ़ना शिशु के  दूध के दांत निकलने का संकेत माना जाता है और अधिक दांत निकलने के साथ साथ  शिशु के मुँह में लार का स्तर भी  बढ़ने की उम्मीद की जा सकती है।लार में हल्के जीवाणुरोधी गुण होते हैं जो आपके बच्चे के मुंह को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

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बच्चों के दांत निकलते समय उसके मसूड़ों पर कौनसी चीज़ें ना लगाएं?

शिशु के दूध के दांत निकलते समय इन वस्तुओं का प्रयोग उनके मसूड़ों पर करना उपयुक्त नहीं होता है :

सुन्न करने वाली दवाएं:

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डॉक्टर्स शिशु के मसूड़ों पर टीथिंग जैल तथा  एल्कोहॉल (शराब) का प्रयोग करने से मना करते हैं क्योकि इनके प्रयोग से आपके  शिशु का गला सुन्न हो सकता है और उसे निगलने में परेशानी  का अनुभव हो सकता है।

टीथिंग क्रीम:

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अधिकांश लोग ऐसे समय में अपने शिशु के मुँह में टीथिंग क्रीम का प्रयोग करते हैं परन्तु इसके प्रयोग का कोई खास फायदा नहीं होता है, क्योंकि टीथिंग क्रीम उसकी लार के साथ बाहर निकल जाती है।

लौंग का तेल:

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दांत निकलने के समय शिशु के मसूड़ों पर लौंग का तेल नहीं लगाना चाहिए क्योकि इसके इस्तेमाल से शिशु के नाज़ुक मसूड़े जल सकते हैं।

अपने बच्चे का मुंह कैसे साफ़ करें:

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इससे पहले कि आपके  शिशु के  दांत आना शुरू हो जाएं, आपको दिन में  हर बार शिशु के कुछ पीने या खाने  के बाद साफ मुलायम कपड़े से अपने शिशु  के मुंह को  जरूर साफ करना चाहिए। इस प्रकिया को  एक नियमित आदत बनांना  चाहिए। इसके लिए आप अपनी उंगली के ऊपर एक साफ जालीदार पैड या मुलायम कपड़ा बांधें  फिर उसे साफ़ पानी में  डुबोएं ताकि यह गीला हो जाए अब इसकी मदद से अपने बच्चे के दांतों और मसूड़ों को धीरे-धीरे  से पोंछें।

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