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बच्चों की खांसी को पहचाने और उसके के लिए घरेलू उपाय अपनायें

by Darshana Bhawsar
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सर्दी और खांसी तो आज के समय में आम बीमारी है। क्योंकि बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी में यह बीमारी देखने को मिलती है। और किसी-किसी को तो यह बीमारी नियमित बनी रहती है। लेकिन अगर बच्चों में सर्दी खांसी नियमित बनी हुई है तो वह चिंता का विषय है। इस दौरान बच्चे को किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाना चाहिए। यहाँ हम बात करने जा रहे हैं बच्चों की खांसी के लिए घेरलू उपाय के बारे में। तो खांसी की शुरुआत ज़ुकाम से होती है।

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बच्चों में खांसी के कुछ कारण होते हैं जिनसे अगर बचा जायें तो बच्चों को खांसी से बचाया जा सकता है।

  • ज़ुकाम:

ज़ुकाम खांसी सबसे बड़ा कारण है। जिसके कारण बच्चों खांसी, बुखार, नाक बंद और गले में खराश हो सकती है। और इसकी वजह से कई और बीमारियाँ भी होती हैं।

  • फ्लू:

फ्लू साधारण ज़ुकाम की तरह ही लगता है। इसमें भी बच्चे को बुखार होता है, उलटी दस्त और खांसी रहती है। फ्लू की वजह से जो खांसी होती है वह सूखी होती है उसमें बलगम नहीं आती लेकिन बहुत नुकसानदायक खांसी होती है।

  • क्रूप:

क्रूप खांसी के दौरान बच्चों के वायुमार्ग में सूजन आ जाती है और उसके कारण खांसी उत्पन्न होती है। संकीर्ण वायुमार्ग के कारण बच्चों को संन्स लेने में तकलीफ होती है और इसके कारण ही खांसी आती है।

  • काली खांसी:

काली खांसी को खांसी का एक प्रकार कह सकते हैं जिसमें बच्चे को खांसी में बलगम आता है। और साथ-साथ सांस लेते हुए हू हू की आवाज आती है। इसे जीवाणु संक्रमण भी कहा जाता है।

  • दमा:

दमा या अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें सांस लेने में बहुत परेशानी होती है और यह किसी प्रकार की एलर्जी के कारण होती है। जैसे अगर किसी को धूल से एलर्जी है तो उसे खांसी आएगी और सीना कस जायेगा सांस अंदर–बाहर होते समय घर्घराहट होगी। यह बहुत ही गंभीर बीमारी है।

  • क्षय रोग (टी. बी.):

अगर दो हफ़्तों से ज्यादा खांसी है और खांसी कम नहीं हो रही है तो यह क्षय रोग (टी. बी.) के लक्षण होते हैं। इस बीमारी में कई बार खांसी के साथ खून भी आता है। भूख कम लगती है, सांस लेने में तकलीफ होती है और बुखार आता है। यह बहुत ही गंभीर बीमारी है अगर इस पर समय रहते रोकथाम न लगाई जायें तो यह जानलेवा बीमारी भी हो सकती है।

  • विषाणु संक्रमण:

विषाणु संक्रमण भी खांसी का विशेष कारण है यह ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसे रोगों का कारण होता है। इसमें दम घुटना और नाक या गले में रूकावट की वजह से खांसी और घरघराहट होती है।

ये सभी खांसी के कारण होते हैं। इनके साथ ही खांसी के लक्षण भी पता होने चाहिए जिससे समय पर इसका इलाज किया जा सके और कई बड़ी बिमारियों को रोका जा सके।

  • खांसी के लक्षण:
  • अगर ज़ुकाम के कारण खांसी हुई है तो यह रात में अधिक जोर पर होगी जिसमें खांसी के साथ बलगम आएगा। कई बार ज़ुकाम नष्ट होने के बाद भी छह हफ्ते तक खांसी रह सकती है।
  • दमा या अस्थमा के कारण होने वाली जो खांसी है वह रात के समय अधिक बढ़ जाती है और घर्घराहट व सांस लेने में तकलीफ होती है।
  • अगर घर्घराहट वाली कर्कश खांसी है तो यह क्रूप खांसी हो सकती है। इसके प्रति सतर्क रहें।
  • अगर ज़ुकाम के छह हफ्ते बाद तक भी खांसी रहती है तो यह काली खांसी हो सकती है और इसमें बच्चे की हालत गंभीर हो जाती है उसे बुखार भी हो जाता है। ऑक्सीजन की अस्थायी कमी की वजह से शरीर नीला दिखाई देने लगता है।
  • एक वर्ष से कम उम्र का शिशु अगर निरंतर खाँसता रहता है और उसे सांस लेने में तकलीफ होती है तो यह ब्रोंकियोलाइटिस के लक्षण हो सकते हैं।

खांसी के कुछ प्रकार होते हैं जिनके बारे में पता होना जरुरी है इसके बाद इन्हें ख़त्म करने के लिए उपाय करना आसान हो जाता है।

  • खांसी के प्रकार:
  • क्रूप खांसी:

जब बच्चे की ऊपरी श्वासनली या वायु–नली में सूजन आ जाती है तो उसे सांस लेने में परेशानी होती है स्वरतंत्री के नीचे हुई सूजन की वजह से बच्चे की आवाज भारी हो जाती है और घर्घराहट होती है। यह क्रूप खांसी होती है।

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  • सूखी खांसी:

यह खांसी ठंड या ज़ुकाम के संक्रमण के कारण होती है नाक और गले के साथ जब ऊपरी श्वसन भी प्रभावित होता है तो यह सूखी खांसी होती है। गर्म तापमान में यह खांसी बढ़ती है या जब बच्चा बिस्तर पर लेटता है तब यह खांसी बढ़ती है।

  • गीली खांसी:

गीली खांसी बलगम और कफ के साथ होती है। जब निचले श्वसन पथ में कफ जमा हो जाता है तो सांस लेने में तकलीफ होती है जिसके कारण गीली कैसी होती है।

  • काली खांसी (पर्टुसिस):

इस खांसी के लक्षण सामान्य खांसी जैसे ही लगते हैं लेकिन रात को यह गंभीर रूप ले लेती है और बार-बार इसके दौरे उठते हैं। इसमें बच्चा गहरी सांस लेता है और सांस लेते हुए आवाज आती है।

  • बच्चों की खांसी के लिए घरेलू उपाय:

इन खाँसी को पहचान कर समय रहते इन्हें रोका जा सकता है जो बहुत जरुरी है। नहीं तो ये बड़ा रूप ले लेती हैं और कई गंभीर बिमारियों का कारण बन जाती हैं।

  • गर्म पानी:

गर्म पानी पीने से गले में जमा कफ निकल जाता है जिससे सांस की नाली साफ़ हो जाती है और सर्दी खांसी में राहत मिलती है। बच्चो को हल्का गुनगुना पानी पिला सकते हैं।

  • हल्दी वाला दूध:

हल्दी वाले दूध के कई फायदे हैं अगर रोज हल्दी वाला दूध आप बच्चे को पिलायेंगे तो इससे उसे सर्दी खांसी की समस्या से निजात मिलेगा और कई बीमारियाँ भी दूर होंगी।

  • सोंठ और शहद:

सोंठ को पीसकर उसमें शहद मिला लें और सोते समय बच्चे को वह चटा दें। इससे खांसी में राहत मिलेगी और खांसी और सर्दी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकेगा।

  • अदरक और तुलसी का रस:

अदरक के रस में थोड़ा सा तुलसी के पत्तों का रस मिला लें और सोते समय बच्चे को वह पिला दें। इससे खांसी में तुरंत ही राहत मिल जाएगी और बच्चा सुकून से रात भर सो पायेगा।

  • गर्म चीज़ों का सेवन:

अगर बच्चा थोड़ा बड़ा है और वह कुछ खाने पीने में सक्षम है तो उसे आप गर्म चीज़ें खिलाएं और पिलाएं जैसे चाय, सूप इत्यादि।

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इन सभी घरेलू उपाय से बच्चों की खांसी पर रोकथाम संभव है लेकिन अगर इसके बाद भी खांसी में कोई आराम नहीं मिलता तो फिर चिकित्सक की सलाह लेना चाहिए उसमें देर नहीं करनी चाहिए।

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