Home हेल्थ टीबी रोग के लिए रामबाण इलाज है लौंग, पढ़ें इस्तेमाल की विधि

टीबी रोग के लिए रामबाण इलाज है लौंग, पढ़ें इस्तेमाल की विधि

by Mahima
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लौंग सिर्फ एक मसाला नहीं है, बल्कि एक दवा है। जिससे कई तरह की बीमारियां दूर हो जाती हैं। दांत से लेकर टीबी तक सारी बीमारियों के लिए कारगर है लौंग। हमारे-आपके सबके किचन में हमेशा मौजूद लौंग काफी आसानी से हमें मिल जाती है। एंटीसेप्टिक होने के कारण घरेलू उपचार में इसका स्थान अहम है। अच्छे लौंग की पहचान है उसकी खुशबू एवं तैलीयपन। लौंग ख़रीदते समय उसे दातों में दबाकर देखना चाहिए इससे इसकी गुणवत्ता पता चल जाती है। जो लौंग सुगंध में तेज, स्वाद में तीखी हो और दबाने में तेल का आभास हो, उसी को अच्छा मानना चाहिए। व्यापारी लौंग में तेल निकाला हुआ लौंग मिला देते है। अगर लौंग में झुर्रिया पड़ी हों तो समझे कि यह तेल निकाली हुई लौंग है।

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लौंग के तत्व

लौंग में मौजूद तत्वों का विश्लेषण किया जाए तो इसमें कार्बोहाइड्रेट, नमी, प्रोटीन, वाष्पशील तेल, गैर-वाष्पशील ईथर निचोड़ (वसा) और रेशे होते हैं। इसके अलावा खनिज पदार्थ, हाइड्रोक्लोरिक एसिड में न घुलने वाली राख, कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा, सोडियम, पोटेशियम, थायामाइन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, विटामिन सी और ए जैसे तत्व भी इसमें प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा कई तरह के औषधीय तत्व होते हैं। इसका ऊष्मीय मान 43 डिग्री है और इससे कई तरह के औषधीय व भौतिक तत्व लिए जा सकते हैं।

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जानें इसका प्रयोग कब करते हैं

  • एंटीसेप्टिक गुणों के कारण यह चोट, घाव, खुजली और संक्रमण में भी काफ़ी उपयोगी होता है। इसका उपयोग कीटों के काटने या डंक मारने पर भी किया जाता है। लेकिन संवेदनशील त्वचा पर इसे नहीं लगाना चाहिए।
  • लौंग और हल्दी पीस कर लगाने से नासूर मिटता है। लौंग के तेल को त्वचा पर लगाने से सर्दी, फ्लू और पैरों में होने वाल फंगल इन्फेक्शन और त्वचा के कीड़े भी नष्ट होते हैं।
  • आंखों के पास या चेहरे पर निकली छोटी-छोटी फुंसियों पर लौंग घिस कर लगाने से फुंसियां और सूजन भी ठीक हो जाती हैं।
  • आंत्र ज्वर में दो किलो पानी में पाँच लौंग आधा रहने तक उबालकर छानकर इस पानी को दिन में कई बार पिलाएं।
  • एक लौंग पीस कर गर्म पानी से फंकी लें। दो तीन बार लेने से ही सामान्य बुखार उतर जाएगा। चार लौंग पाउडर पानी में घोल कर पिलाने में तेज बुखार भी कम हो जाता है।
  • चार लौंग पीस कर पानी में घोल कर पिलाने में तेज ज्वर कम हो जाता है।
    लौंग के तेल को तिल के तेल (सेसमी आयल) के साथ मिलाकर डालने से कान के दर्द में राहत मिलती है।
  • लौंग मानसिक दबाव और थकान को कम करने का काम करता है। यह अनिद्रा के मरीजों और मानसिक बीमारियों जैसे कम होती याददाश्त, अवसाद और तनाव में उपयोगी होता है।
  • लौंग का तेल ख़ून को साफ़ करके ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है।
    चार लौंग कूट कर एक कप पानी में डाल कर उबालें। आधा पानी रहने पर छान कर स्वाद के अनुसार मीठा मिला कर पी कर करवट लेकर सो जाएं। दिन भर में ऐसी चार मात्रा लें। उल्टियां बंद हो जाएंगी।
  • खसरा में दो लौंग को घिसकर शहद के साथ लेने से खसरा ठीक हो जाता है।

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