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बच्चों में क्यों बड़ रहा है दिल की बीमारी का खतरा

by Darshana Bhawsar
heart problem

हृदय रोग या दिल की बीमारी बच्चों और युवाओं में आज के समय में बहुत अधिक देखने को मिल रही है। हृदय रोग वैसे यो किसी भी उम्र के लोगों में हो सकता है। यहाँ हम बात कर रहे है आखिर बच्चों में इतना अधिक हृदय रोगों का खतरा क्यों बड़ रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं जैसे अत्यधिक फ़ास्ट फ़ूड खाना, कम खेलना आदि। कुछ बच्चों में हृदय रोग जन्म से होते हैं उनका इलाज सर्जरी के द्वारा संभव हो पता है क्योंकि ऐसे बच्चे न तो खेल सकते हैं न ही ऐसे बच्चे खाना ठीक प्रकार से खा पाते हैं।

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अब बात आती है कि बच्चों में कोलेस्ट्रॉल की समस्या क्यों अधिक बढ़ रही है। और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के भी कई कारण है जो हम यहाँ देखेंगे। आज कल मोबाइल और फास्टफूड की दुनिया में बच्चों ने भी अपनी दुनिया यहीं तक सीमित कर ली है न तो बच्चे आउटडोर खेल खेलते हैं न ही पोषक भोजन लेते हैं परिणाम स्वरुप वे कई बिमारियों से जूझ रहे हैं। ये बीमारी कई प्रकार की हो सकती हैं जैसे हृदय रोग, मोटापा एवं अन्य।

  • बच्चों में हो रहे हृदय रोग की वजह:
  • मोटापा:

आज के समय में बच्चों में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बहुत अधिक बढती जा रही है। बच्चों में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कई कारण है ज्यादा खाना, फ़ास्ट फ़ूड, आउटडोर गेम न खेलना इत्यादि। मोटापा इन्हीं वजह से शरीर में अपनी जगह बनाता है। आज के बच्चों के हाथ में मोबाइल दे दो तो वे खाना और खेलना सब कुछ भूल जाते हैं। कोई व्यायाम न होने की वजह से और असंतुलित भोजन खाने की वजह से मोटापा बच्चों में पनप रहा है। और परिणाम स्वरुप हृदय रोग ब्लॉकेज जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं।

  • पढाई का प्रेशर:
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आज के समय में बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी तनाव में रहते हैं। आज के समय में बच्चों में पढाई का तनाव बहुत अधिक बढ़ता जा रहा है। अगर माता-पिता की तरफ से प्रेशर नहीं आता तो स्कूल की तरफ से प्रेशर आता है और कुछ बच्चे तो खुद ही आगे रहने की होड़ में तनाव लेते रहते हैं। यह भी एक बड़ा कारण है बच्चों में हृदय रोग होने का। तनाव और प्रेशर से भी हृदय पर सीधा असर पड़ता है और बच्चों का दिल थोड़ा नाजुक होता है वे इस तरह के तनाव को कई बार सहन नहीं कर पाते।

  • गलत खान पान:
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पहले के समय के बच्चों और आज के समय के बच्चों को अगर देखा जाये तो एक बहुत ही बड़ा अंतर देखने को मिलता है। आज के समय के बच्चे खाने को लेकर बहुत ही परेशान करते हैं। ये हर प्रकार का खाना नहीं खाते और हरी सब्जियाँ तो ये खाने में बहुत ही परेशान करते हैं। लेकिन पहले के समय में ऐसा नहीं था और इसलिए बच्चे तंदरुस्त होते थे। आज के समय में फ़ास्ट फ़ूड और जंक फ़ूड तो बच्चे कितना भी खा सकते हैं लेकिन अगर उन्हें सब्जियाँ खाने के लिए कहेंगे तो वे नहीं खाएंगे। यह भी बच्चों में हो रहे हृदय रोग का बहुत बड़ा कारण है।

  • मोबाइल:
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मोबाइल को भी बच्चों में बड़ रहे हृदय रोग का कारण माना जा सकता है। बच्चे आज के समय में मोबाइल में इस प्रकार से व्यस्त हो जाते हैं कि उन्हें किसी चीज़ की सुध ही नहीं रहती। परिणाम स्वरुप न ठीक से खाना न ही ठीक से सोना और न ही आउटडोर एक्टिविटी में समय बिताना। यह एक बहुत बड़ा कारण है बच्चों में हो रहे हृदय रोगों के बढ़ने का। अगर बच्चों को मोबाइल और TV से थोड़ा दूर रखा जाये तो बच्चे स्वयं पर ध्यान अवश्य देंगे।

अभी हमने देखा कि बच्चों में बड़ रहे हृदय रोग का सबसे बड़ा कारण बढ़ता हुआ कोलेस्ट्रॉल है। अगर शरीर में इसकी मात्रा अधिक हो जाती है तो हृदय सम्बन्धी रोग पनपने लगते हैं। बच्चों में भी यही समस्या अधिक देखी जा रही है इसलिए हृदय रोग जैसे मामले सामने आ रहे हैं।

  • कोलेस्ट्रॉल क्या है?:

कोशिका झिल्ली का एक अहम् हिस्सा कोलेस्ट्रॉल होता है। प्रत्येक व्यक्ति एवं पशुओं के शरीर में यह पाया जाता है। शरीर में पित्त, हार्मोन्स एवं विटामिन डी का निर्माण कोलेस्ट्रॉल के द्वारा ही होता है। शरीर में कोलेस्ट्रॉल भोजन के माध्यम से आता है जैसे मांस, अंडा, अनाज, दूध इत्यादि। जब बहुत ही अधिक मात्रा में इनका सेवन किया जाता है तो कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बड़ जाती है जो सेहत के लिए हानिकारक है।

शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को पहचानने के लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवाना चाहिए। इसमें एलडीएल एवं एचडीएल की जाँच की जाती है। यह हाई कोलेस्ट्रॉल होता है। शरीर में एलडीएल की मात्रा 70 मिलीग्राम प्रति डेसिलिटर से अधिक नहीं होना चाहिए। एचडीएल रक्त वाहनियों से गंदगी को बाहर निकलने का कार्य करता है। यह अगर 40 मिलीग्राम प्रति डेसिलिटर से कम होता है तो नुकसानदायक होता इसकी अधिक मात्रा शरीर और हृदय के लिए उम्दा मानी जाती है।

  • कोलेस्ट्रॉल की समस्या को पहचानने के सुझाव:

कोलेस्ट्रॉल की समस्या को पहचानना बहुत ही जरुरी होता है। कई बार इसके खुलेतौर पर लक्षण नहीं नज़र आते लेकिन कुछ परेशानियाँ होने लगती हैं जैसे सांस फूलना, सांस लेने में परेशानी होना, ठीक प्रकार से व्यायाम न कर पाना इत्यादि। वैसे इस समस्या में मोटापा जैसे लक्षण सामने आते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर जाँच इस प्रकार करवाना चाहिए पहला टेस्ट 2 वर्ष में इसके बाद 10 – 11 की उम्र में इसके बाद 17 से 18 की उम्र में। इससे कोलेस्ट्रॉल के बारे में पता चल जायेगा।

  • बच्चों को हृदय रोगों से कैसे बचाया जा सकता है:

बच्चों को हृदय रोग से बचाने के लिए लोग डॉक्टर से सलाह लेते हैं और कई प्रकार के उपाय अपनाते हैं। बच्चों को हृदय रोग से बचाने के लिए कुछ साधारण से उपाय है। लेकिन अगर बच्चों में दिल की बीमारी जन्मजात है या जटिल है तो सर्जरी ही अंतिम विकल्प होता है।

  • भोजन का रखें ध्यान:

संतुलित भोजन बच्चों के लिए बहुत जरुरी होता है। बच्चों को हृदय रोगों से बचाने के लिए कार्बोहाइड्रेट्स, अधिक प्रोटीन और कम तेल वाले भोजन देना चाहिए इससे बच्चों के शरीर को पोषण मिलता है। बच्चों को तले हुए भोजन से दूर रखना चाहिए, फ़ास्ट फ़ूड से दूर रखना चाहिए और हरी सब्जियाँ और सूप बच्चों को देना चाहिए। यह बहुत ही जरुरी है।

  • बच्चों को आउटडोर खेल खेलने दें:

बच्चों को मोबाइल में खेल खेलने से ज्यादा आउटडोर खेल खेलने चाहिए। बच्चों को आउटडोर खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए क्योंकि बच्चों का इससे शारीरिक व्यायाम होता है जो सेहत के लिए बहुत ही जरुरी है। बच्चों को मोबाइल और टीवी से दूर ही रखना चाहिए इससे उनकी आँखों पर भी असर बुरा असर पड़ता है।

  • बच्चों को मछली का सेवन कराएं:

अगर बच्चा खाना खाने योग्य है तो उसे मछली का सेवन करायें। मछली में सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो हृदय रोगों से बचाने में सहायक होते हैं। मछली में ओमेगा पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। जो शरीर को स्वस्थ्य रखने में सहायक होता है। इसलिए मछली का सेवन बच्चे को करना चाहिए।

  • बच्चे को धूम्रपान वाली जगह से दूर रखें:

कई बार ऐसा होता है कि हम धूम्रपान वाली जगहों पर रहते हैं एवं बच्चों का दिल बहुत ही नाजुक होता है। बच्चों पर धूम्रपान का बहुत बुरा असर पड़ता है धूम्रपान के धुएं से बच्चे के फेफड़ें ख़राब होने का डर रहता है कोई कई बार बच्चा हृदय रोगों का भी शिकार हो जाता है इसलिए बच्चे के प्रति सतर्क रहे। बच्चों को धूम्रपान से वाले स्थानों से दूर रखें।

  • बच्चों के भोजन की सारणी:

बच्चों को बचपन से जैसा ढाला जाये वे ढल जाते हैं तो बचपन से ही उनके भोजन की एक समय सारणी बनाना चाहिए। जिसमें उनके सोने से लेकर उठने और खाने का समय निश्चित हो। बच्चों को पानी भी पर्याप्त मात्रा में पिलाना चाहिए। ये छोटे-छोटे से नियम आपके बच्चे को बड़े-बड़े हृदय रोगों से बचा सकते हैं।

  • तली चीजें न खिलाएं:

कई बार बच्चों की जिद के आगे माता-पिता की नहीं चलती और बच्चे जो भी मांगते हैं हम उन्हें देते जाते हैं। अब बात आती है खाने की तो बच्चों को तली हुई चीज़ें बहुत पसंद आती है। और बच्चों की जिद के आगे माता-पिता उन्हें ऐसी चीज़ें खिलाने लगते हैं। बच्चों को धीरे-धीरे रोज यही चीज़ें खाने की आदत पड़ जाती है और परिणाम स्वरुप बच्चे को हृदय रोग जैसी समस्याएँ उत्पन्न होने लगती हैं।

  • बच्चों को तनाव से रखें दूर:

कई बार पारिवारिक मतभेद में बच्चे भी आ जाते हैं और रोज-रोज की लड़ाइयों से उनके दिल और दिमाग पर बुरा असर पड़ने लगता है। और बच्चों पर पढाई के लिए भी कई बार अत्यधिक दबाब डाला जाता है जो गलत है। अगर इसी प्रकार से बच्चों पर दबाब डाला जाता रहता है तो वे डिप्रेशन का शिकार तो होते ही हैं साथ ही उन्हें हृदय रोग सम्बन्धी परेशानियाँ भी होती है। इसलिए बच्चों को हृदय रोगों से बचाने के लिए तनाव से दूर रखना चाहिए।

  • क्या हृदय रोगों को पूर्ण रुप से नष्ट करना संभव है:

हृदय की कुछ बिमारियों को कई हद तक नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन कुछ बीमारियाँ ऐसी होती हैं कि उनके लिए व्यक्ति को सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है जैसे दिल में छेद। दिल में छेद का कोई घरेलु विकल्प नहीं है इसके लिए व्यक्ति के पास आखिरी रास्ता सर्जरी ही होता है वैसे ही अगर ब्लॉकेज की समस्या है तो उसका भी कोई घरेलु उपाय नहीं है। लेकिन कुछ हृदय रोगों को होने से पहले रोका जा सकता है। उसके लिए दिनचर्या और खाने की आदतों को बदलना बहुत ही जरुरी होता है।

  • मुख्य बात:

मानव शरीर में इतनी क्षमता होती है कि इसे जैसा ढाला जाये ये वैसे ढल जाता है। लेकिन व्यक्ति खुद ही स्वयं के शरीर को कमजोर और रोगों से युक्त बनाने में लगा हुआ है। व्यक्ति अपनी व्यस्त दिनचर्या की वजह से न स्वयं पर ध्यान देता न ही बच्चों पर। और परिणाम सुरूप कई बीमारियाँ व्यक्ति को घेरने लगती है। व्यक्ति की जिम्मेदारी जितनी कार्य के प्रति है उतनी ही खुद के शरीर के प्रति भी होती है। और व्यक्ति को यह समझना बहुत ही जरुरी है। ये ऐसी छोटी-छोटी बातें हैं जो सुनने में अजीब लगती हैं लेकिन इनका प्रभाव घर और परिवार दोनों पर ही पड़ता है।

  • योग के द्वारा ह्रदय रोगों से छुटकारा पाना संभव है:

अगर बच्चों की बात करें तो एक बहुत छोटा बच्चा तो योग करने में सक्षम नहीं होता लेकिन 5 साल का बच्चा अपने माता पिता को देखकर वही गतिविधियाँ करता है जो माता पिता करते हैं। तो आप अपने बच्चे के सामने योग करें अगर वह भी आपके साथ योग करता है तो उसे प्रोत्साहित करें। धीरे-धीरे आपका बच्चा भी योग की तरफ आकर्षित होने लगेगा और यह उसकी दिनचर्या बन जाएगी। और योग से ह्रदय रोग ही नहीं बल्कि कई रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है। इसे अपने जीवन में उतरना चाहिए जिससे शरीर में सकारात्मक उर्जा भी आती है, दिन भर उर्जा बनी रहती है। योग के गुण अनगिनत है आप योग को अपनी दिनचर्या में जरुर उतारें और कई रोगों से मुक्ति पायें।

  • आउटडोर गतिविधि:

घर में या ऑफिस में दिनभर बैठे रहने से सिर्फ शरीर पर चर्बी ही बढती है और इससे छुटकारा पाने के लिए आप प्रतिदिन कोई आउटडोर प्रतिक्रिया जरूर करें और अपने परिवार को भी इसमें शामिल करें। आउटडोर में आप अपने परिवार के साथ कोई खेल खेलें। यह सेहत के लिए बहुत ही उम्दा व्यायाम होता है। और जब आपके बच्चे आपको इस प्रकार की प्रतिक्रिया करते देखेंगे तो वे भी इसमें रूचि जरूर लेंगे।

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ये कुछ ऐसे आसान से तरीके हैं जिनसे आप अपने और अपने परिवार को कई बिमारियों से दूर कर पाने में सक्षम होंगे। लेकिन अगर आपको या आपके बच्चे को जन्म से ही ह्रदय रोग है तो उस स्थिति में परेशानी हो सकती है इसके लिए आप योग का सहारा लें। लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो आप पहले से ही खुद को और परिवार को सुरक्षित करते हुए चलें।

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