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विश्वभर में करेले का सेवन औषधीय चिकित्सा के रूप में किया जाता है। इसका प्रयोग अनेको दवाइयों को बनाने में भी किया जाता है। हरे रंग  के  करेले  पके हुए पीले रंग के करेले की अपेक्षा अधिक फायदेमंद होते हैं ,इसलिए  हरे रंग के करेले का उपयोग करना अधिक लाभकारी होता है। हालांकि यह टेस्ट में  कड़वा होता है, इसलिए अधिकांश लोग इसके सेवन से परहेज करते है परन्तु आप यदि इसके जूस पीने के लाभ को जानेगे तो इसका सेवन किये बिना नहीं रह पाएंगे ।

आइये जानते है करेले के जूस पीने के फायदे :

  • इसके जूस के सेवन से शरीर से बिषैले पदार्थ बाहर निकल जाते है जिसकी वजह से हमारे शरीर का रक्त साफ़ हो जाता है और शरीर में खून का दौरा भी अच्छा हो जाता है। करेले का रस रक्तविकारों, दाद, खाज, खुजली, फोड़े फुन्सी की समस्या से छुटकारा दिलाता है। साथ ही इसके जूस के सेवन से त्वचा में चमक आती है क्यूंकि इसमें antimicrobial और एंटी ऑक्सीडेंट के साथ साथ विटामिन ए और सी भरपूर मात्रा में पाए जाते है जो झुरियों और उम्र के प्रभाव को कम कर देते हैं।
  • करेले में फास्फोरस काफी मात्रा में पाया जाता है इसीलिए यह दाँत, मस्तिष्क, हड्डी, ब्लड और अन्य शारीरिक अंगो के लिए जरुरी फास्फोरस की पूर्ति करता है |
  • करेले का जूस संक्रमण दूर करने वाला और शरीर में गर्मी बढ़ाने वाला होता है।
  • आधा कप करेले के जूस को चौथाई कप पानी में एक चम्मच पिसा हुआ आंवला पाउडर मिलाकर रोजाना  तीन बार पीने से एसिडिटी में लाभ होता है।
  • करेले का जूस पीने से अग्नाशय का कैंसर उत्पन्न करने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। करेले में मौजूद एंटी- कैंसर कॉम्पोनेंट्स अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं में ग्लूकोस का पाचन रोक देते हैं जिससे इन कोशिकाओं की शक्ति ख़त्म हो जाती हैं और ये नस्ट हो जाती हैं।
  • करेले के रस पीने से आप अपना पेट भरा हुआ महसूस करते है | इसके साथ ही करेले का रस आपके शरीर में फैट सेल्स को कम करता है और अधिक मात्रा में फैट सेल्स का निर्माण भी नही होने देता है। जिससे आपका वजन नियंत्रित रहता है।
  • करेले में बीटा- कैरोटीन और विटामिन ए की अधिकता होती है, जिससे दृष्टि ठीक होती है | इसके अलावा इसमें उपस्थित विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से होने वाली नजरों की कमजोरी से बचाता है।
  • करेला रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में सहायक होता है जिससे मधुमेह रोग में कमी होती है। यह पैंक्रियास के इन्सुलिन उत्पादन में मदद करता है और इन्सुलिन प्रतिरोध से बचाव करता है। यह टाइप-1 और टाइप-2 दोनों तरह के मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद होता है।

रिपोर्ट : डॉ. हिमानी