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आयुर्वेद योग की जानकारी

by Darshana Bhawsar
आयुर्वेद योग

योग और आयुर्वेद में एक घनिष्ट संबंध माना जाता है। प्राचीन काल के अनुसार ऐसा माना जाता है कि ऋषि मुनियों ने योग के साथ ही आयुर्वेद को भी जन्म दिया। जहाँ एक साधना हो वही योग है और आयुर्वेद में जड़ी बूटियों के शोध के लिए, उनके बारे में जानने के लिए एवं उनके सही प्रकार से किये जाने वाले प्रयोग के लिए कई सालों की तपस्या और साधना की जरुरत होती है। और इसी संबंध को आयुर्वेद योग का उपाधि दी गयी। आयुर्वेद के फायदे अनेक हैं लेकिन इन फायदों का पता लगाना इतना आसान नहीं था। इसके लिए वैध और ऋषि मुनि तपस्या करते थे तब जाकर यह पता लगता था कि कौन सी जड़ी-बूटी किस रोग के लिए उचित है।

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इसलिए आयुर्वेद को आयुर्वेद योग कहा गया एवं इसकी तुलना योग से की गयी। आज के समय में शोध का कार्य आसान हो गया है। आधुनिक समय में कई सारे उपकरण मौजूद हैं जिनसे इन जड़ी-बूटियों के बारे में पता चल जाता है कि जड़ी बूटी की मात्रा सही है या नहीं या कौन सी जड़ी बूटी किस रोग के लिए लाभकारी होगी। लेकिन पहले के समय में ऐसा नहीं था इन जड़ी बूटियों का प्रयोग जानवरों पर किया जाता था और देखा जाता कि कौन सी जड़ी बूटी मानव के लिए उपयुक्त रहेगी। कई साल एवं दिन इन जड़ी बूटियों को बनाने में लग जाया करते थे। आयुर्वेद योग की तरह ही एक साधना है। एवं इस साधना से ही धन्वन्तरी जैसे आयुर्वेद के जनक एवं गुरुओं ने आयुर्वेद में कई औषधियों के बारे में जानकारी दी एवं आयुर्वेद के फायदे से हमें अवगत कराया।

आयुर्वेद योग

आज के समय में आयुर्वेद की कई सारी पुस्तकें उपलब्ध हैं जिनमें दुर्लभ से दुर्लभ बिमारियों का इलाज संभव है। एवं इन बिमारियों के लिए जो औषधि तैयार करने की विधि है वह भी आयुर्वेद योग का ही परिणाम है। और आयुर्वेद के फायदे मनुष्य आज उठा पा रहा है। आज लोग फिर से आयुर्वेद की तरफ वापस आ रहे हैं क्योंकि आयुर्वेद से बड़ी कोई चिकित्सा दुनिया में नहीं है जिसके परिणाम तो हैं लेकिन विपरीत परिणाम नहीं हैं।

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