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आठवें सप्ताह की गर्भावस्था के दौरान आने वाले परिवर्तन

by Darshana Bhawsar
8 week pregnancy

सप्ताह दर सप्ताह गर्भावस्था में परिवर्तन आना एक स्वाभाविक बात हैं साथ ही साथ इस दौरान गर्भवती के साथ ही साथ शिशु के आकार में भी परिवर्तन आता है। इन परिवर्तनों को अपनाना एक गर्भवती और एक शिशु के लिए एक चुनौती होती है और दोनों ही इस चुनौती से लड़ते हुए अपना नौ महीने य 39 से 40 सप्ताह का समय पूर्ण करते हैं। इस दौरान गर्भवती का बहुत ध्यान रखना जरुरी है जैसे खाना सही प्रकार और सही मात्रा में होना, किसी भारी सामान को गर्भवती न उठाए इसका ध्यान रखना इत्यादि। यहाँ हम देखेंगे आठवें सप्ताह की गर्भावस्था के दौरान आने वाले परिवर्तन के बारे में।

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आठवें सप्ताह की गर्भवस्था के दौरान आने वाले परिवर्तन:

आठवें सप्ताह की गर्भवस्था के दौरान आने वाले परिवर्तन में कई चीज़ें महत्वपूर्ण हैं जैसे:

  • शिशु का आकार:

इस समय शिशु का आकार या उसका माप हो जाता है 1.6 से. मी. और साथ ही शिशु का मुँह थोडा सा नज़र आने लगता है जो धड़ की और झुका हुआ रहता है। साथ ही जबड़ा, नाक और कान भी आकार लेने लगते हैं। शिशु देखने में बिल्कुल राजमा के दाने की तरह दिखाई देता है। इस दौरान शिशु का विकास अलग ही प्रकार से होता है उसकी बाजु लम्बी होने लगती हैं, तंत्रिका और कोशिकाएं बनने लगती हैं, टांगें भी लम्बी होना शुरू हो जाती है। शिशु विकास की और अग्रसर होने लगता है। यह आठवें सप्ताह की गर्भावस्था के दौरान आने वाले परिवर्तन में सबसे विशेष परिवर्तन है।

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  • वजन:

अभी हमने देखा शिशु में होने वाले परिवर्तन के बारे में अब हम देखेंगे कि क्या आठवें सप्ताह की गर्भवस्था के दौरान आने वाले परिवर्तन में गर्भवती का वजन कितना बढ़ता है। तो इस दौरान गर्भवती का वजन ज्यादा नहीं बढ़ता क्योंकि इस समय शिशु का वजन बहुत ज्यादा नहीं होता वह एक राजमे के दाने या जामुन के बराबर होता है। और शारीरिक आकार में भी गर्भवती में कोई ज्यादा अंतर नहीं दिखाई देता।

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  • पैरों में सूजन:

इस दौरान कभी कभी या अक्सर गर्भवती महिलाओं के पैरों में सूजन बनी रहती है यह सूजन ज्यादा चलने की वजह से या फिर पैरों को बहुत देर जमीन पर लटकाए रखने की वजह से भी होती है। वैसे तो यह स्वाभविक परिवर्तन हैं लेकिन कई बार गर्भवती महिलाओं को इस वजह से पैरों में दर्द बना रहता है और चलने में उन्हें तकलीफ का सामना करना पड़ता है।

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आठवें सप्ताह की गर्भवस्था के दौरान आने वाले परिवर्तन में ये सभी परिवर्तन आते है। इस दौरान बच्चा शुरूआती दौर में होता है और वह कई प्रकार से विकसित होता है। माता को भी यह परिवर्तन शुरूआती दौर में थोडा परेशान करते हैं जिसके कारण उन्हें मितली आना, उलटी आना, गैस का बनना जैसी समस्याएँ होती है।  लेकिन फिर धीरे धीरे माता को इन सब परिवर्तनों की आदत हो जाती है और वे मानसिक रूप से इसके लिए तैयार हो जाती हैं।

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