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छः महीने की गर्भवस्था में कैसे होता है शिशु का विकास जानिए

by Darshana Bhawsar
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गर्भावस्था का छठा महीना, इसका तात्पर्य है कि गर्भवती की दूसरी तिमाही खत्म होने वाली है। इस माह भी गर्भवती को कई प्रकार के बदलाब स्वयं में और अपने शिशु में देखने को मिलते हैं। इस दौरान भी गर्भवती को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो कई परिवर्तन अच्छे होते हैं। इस दौरान गर्भवती अगर थोड़े व्यायाम करें तो कई परेशानियों नष्ट हो सकती है लेकिन व्यायाम डॉक्टर की सलाह से ही करें। यहाँ हम देखेंगे छः महीने की गर्भवस्था में कैसे होता है शिशु का विकास साथ ही कई अन्य शारीरिक परिवर्तन के बारे में भी जानेंगे।  

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छः महीने की गर्भवस्था में कैसे होता है शिशु का विकास और गर्भवती में आते हैं क्या परिवर्तन

                                                

गर्भावस्था के छः महीने के लक्षण:

एडीमा (सूजन):

गर्भावस्था के छः महीने के दौरान  गर्भवती के पैरों, टखनों और हाथों में हल्की या ज्यादा सूजन आना स्वाभाविक होता है। इस सूजन को एडीमा कहते है। इस दौरान शरीर में टिश्यू के अन्दर एक तरल पदार्थ बनता है, इससे  गर्भवती और शिशु को पोषण मिलता है। श्रोणि पर इस दौरान दबाव में वृद्धि होती है और एड़ियों, पैरों व हाथों में सूजन आने लगती है यह सूजन एडीमा की वजह से होती है। हल्की-सी सूजन आना तो सामान्य है।

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अपच की समस्या:

गर्भावस्था में कब्ज होना, अपच होना एक आम समस्या है। इस दौरान गर्भाशय बढ़ने की वजह से पेट के नीचे वाले भाग पर दबाव अधिक पड़ता है और इसी कारण से अपच की समस्या होती है। इस समस्या से बचना बहुत जरुरी है इसके लिए फाइबर युक्त भोजन लेना चाहिए और साथ-साथ पानी की मात्रा भी भरपूर होना जरुरी है। ज्यादा अपच या कब्ज होने पर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

ज्यादा भूख लगना:

इस दौरान गर्भवती की भूख काफी बढ़ जाती है क्योंकि शिशु के विकास के लिए भी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। और इसी कारण से गर्भवती को अधिक भूख लगती है। गर्भवती को अक्सर भूख का अहसास होता है। कई बार गर्भवती का जंक फूड खाने का मन भी करता है, लेकिन गर्भवती को स्वयं पर नियंत्रण रखना बहुत जरुरी होता है हमेशा ऐसा आहार लें जो आपके और आपके शिशु के लिए पौष्टिक हो।

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खर्राटे आना:

यह लक्षण थोडा अजीब है लेकिन अक्सर गर्भवती को इस समस्या से भी जूझना पड़ता है। खर्राटों का एक कारण वजन बढ़ना भी है, क्योंकि इस दौरान सिर और गर्दन के टिश्यू सूख जाते हैं, और इसी कारण खर्राटों की समस्या आती है। कभी कभी खर्राटे का कारण मधुमेह भी होता हैं, इसलिए गर्भवती को डॉक्टर से भी सलाह लेना चाहिए।

पीठ दर्द की समस्या:

गर्भवस्था के दौरान यह लक्षण सामान्यतः सभी गर्भवती महिलाओं में देखने के लिए मिलता है। इस दौरान शरीर प्रसव के लिए तैयार हो रहा होता है। शिशु विकास के साथ उसका वजन भी बढ़ता है साथ ही साथ गर्भाशय भी बढ़ता है और पेट भी बढ़ता है, और इसी वजह से पीठ में दर्द जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

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गर्भवस्था के छः महीने में शरीर में होने वाले बदलाव:

  1. इस महीने में गर्भाशय लगभग पेट के ऊपर एक इंच बढ़ता है। और इस वजह से गर्भवती की नाभि बाहर की तरफ निकली हुई दिखाई देती है। प्रसव के कुछ हफ्तों बाद तक भी यह इस तरह ही रहती है। कुछ समय पश्चात यह अपनी पुरानी स्थिति में आ जाती है।
  2. छः महीने की गर्भवस्था में गर्भवती को मसूड़ों से खून आने की समस्या भी कई बार होती है। अगर यह समस्या निरंतर बनी हुई है तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
  3. गर्भाशय बढ़ने से इस दौरान पेट के नीचे के भाग में गर्भवती को खिंचाव महसूस होता है। खिंचाव के निशान भी इस दौरान दिखाई देने लगते हैं जिसमें कई बार खुजली होती है।
  4. शिशु तक पर्याप्त पोषण पहुँचना इस दौरान बहुत आवश्यक होता है जिसके लिए रक्त की तेजी से आपूर्ति होती है। इस दौरान  कभी-कभी गर्भवती के बीचे वाले भाग  जैसे पेट के निचले हिस्से और जांघों पर नसें उभर आती हैं इन नसों को वैरिकोस वेन कहा जाता हैं।

गर्भावस्था के छः महीने में बच्चे का विकास और आकार:

अभी हमने देखा कि छः महीने की गर्भवस्था में गर्भवती में क्या परिवर्तन आते हैं अब हम देखेंगे कि छः महीने की गर्भवस्था में कैसे होता है शिशु का विकास। इस दौरान गर्भवती शिशु विकास को महसूस करना चाहती है और यह उनके लिए सबसे सुखद अनुभव होता है। शिशु के विकास के साथ साथ शिशु हलचल भी करने लगता है। गर्भ में शिशु की यह हलचल गर्भवती की उत्सुकता को बढ़ाबा देती है।

छः महीने की गर्भवस्था में कैसे होता है शिशु का विकास:

  1. इस समय न केवल शिशु का वजन बढ़ता है  साथ ही शिशु लंबाई भी बढ़ती है।
  2. शिशु की त्वचा इस दौरान गुलाबी हो जाती है।
  3. अभी फेफड़ों पुर्णतः परिपक्व नहीं होते है।
  4. इस समय शिशु इतना सक्रिय हो जाता है कि जल्द ही बाहर की आवाज आने पर वह प्रतिक्रिया देना प्रारंभ कर देता है। इस माह के अंत तक शिशु की छोटी छोटी सी उंगलियां और शिशु के नाखून भी विकसित हो जाते हैं।
  5. इस दौरान शिशु का सिर उसके शरीर के अन्य अंगों की तुलना में बड़ा ही होता है।
  6. छः महीने के अंत में शिशु का वजन लगभग 900 ग्राम होता है और शिशु की लंबाई लगभग 12 इंच होती है। तो अब आप जान ही गए होंगे कि छः महीने की गर्भवस्था में कैसे होता है शिशु का विकास

गर्भावस्था के छः महीने में देखभाल:

छः महीने का समय वह पड़ाव है  जिसमें शिशु गर्भ के बाहर की गतिविधियों को भी महसूस कर सकता है। ऐसे में यह बहुत आवश्यक है कि गर्भवती अच्छे वातावरण में रहें। चिंता व परेशानी आप से गर्भवती को दूर रहना बहुत जरुरी है। इस दौरान गर्भवती को अपना विशेष ध्यान रखना होता है। छः महीने की गर्भवस्था में कैसे होता है शिशु का विकास के साथ गर्भवती को स्वयं के बारे में जानना भी बहुत आवश्यक होता है।

गर्भावस्था के छः महीने में कैसा आहार लेना चाहिए:

गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार का विशेष महत्व हैं। गर्भवती इस दौरान क्या खाती हैं या क्या पीती हैं, इसका  सीधा असर गर्भ में विकसित हो रहे शिशु पर होता है। इस दौरान गर्भवती को अपने आहार में कई प्रकार के परिवर्तन करने होते हैं। कई चीज़ें चनक खाने का मन होता है तो कई चीज़ें खाने का मन नहीं भी होता लेकिन गर्भवती जो भी खाए वो संतुलित आहार हो।

तो इस तरह से हमने यहाँ देखा कि छः महीने की गर्भवस्था के दौरान कैसे होता है शिशु का विकास और कैसे रखना होता है गर्भवती को स्वयं का ध्यान और गर्भ में विकसित हो रहे शिशु का ध्यान।

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